श्री दूधाखेड़ी माताजी काण्ड : जाने कौन-कौन सी गंभीर अनियमितताओ के कारण ढहा था मंदिर?

Story Highlights

  • श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर के निर्माण कार्य में प्रबंध समिति ने की गंभीर अनियमितता
  • अग्रवाल की शिकायत पर हुई जांच कमिश्नर उज्जैन ने कार्यवाही हेतु शासन को भेजा प्रतिवेदन
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मंदसौर निप्र। दूधाखेड़ी माताजी मंदिर में मनमर्जी से हुए निर्माण कार्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश अग्रवाल गरोठ की शिकायत पर कमिश्नर उज्जैन संभाग द्वारा जांच के आदेश देते हुए संभाग के अपर आयुक्त डॉ अशोक भार्गव की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया जिसमें बतोर सदस्य अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग उज्जैन तथा अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग उज्जैन को सम्मिलित किया गया। समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच प्रारम्भ की, जांच में समिति ने पाया कि दूधाखेड़ी माताजी मंदिर प्रबंध समिति निर्माण कार्या में प्रक्रिया का पालन नही किया गया है। इस आशय का प्रतिवेदन जांच समिति ने कमीश्नर एम.बी ओझा को सौपा इस प्रतिवेदन के आधार पर कमिश्नर उज्जैन संभाग श्री ओझा ने जांच प्रतिवेदन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव को कार्यवाही के लिए भेजा है।

कमीश्नर द्वारा बनाई गई जांच समिति ने मौके पर पहुंचकर शिकायतकर्ता सहित मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में स्थल निरीक्षण कर जांच की और सभी के पक्ष जानने के बाद तत्कालिन कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वतंत्रकुमारसिंह से इस सम्बन्ध में रिकार्ड तलब किया और शिकायकर्ताद्वारा प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर दस पन्नों के अपने जांच प्रतिवेदन तैयार कर आयुक्त उज्जैन संभाग एस.बी. सिंह को सौपा। इस प्रतिवेदन के आधार पर कमीश्नर उज्जैन संभाग एम.बी ओझा ने धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव को कार्यवाहीं के लिये लिखा जिसमें कहा गया कि नवमंदिर निर्माण कार्य की ड्राइंग आर्किटेक सीपी त्रिवेदी एण्ड संस अहमदाबाद से तैयार करवाई गई जिस पर एसडीओ लोकनिर्माण विभाग तथा कलेक्टर ने हस्ताक्षर किए लेकिन प्रस्तावित नवमंदिर निर्माण कार्य की ड्राइंग का विस्तृत प्राकंलन, प्रशासकीय एवं तकनीकि स्वीकृति अभिलेखो में नही है और ना ही उक्त काम की किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई जबकि कलेक्टर एवं अध्यक्ष दूधाखेड़ी माताजी मंदिर प्रबंध समिति को सभी कार्या की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृतिसक्षम अधिकारी से ली जानी थी इसके अलावा ई निविदा के माध्यम से निविदाएँ आमंत्रित की जानी थी इसका भी पालन नही किया गया यही नही 34 करोड़ 18 लाख रू. के निर्माण कार्य होने के बावजुद निविदा का प्रकाशन नियमानुसार नही करवाया गया। इसके साथ ही कार्य का प्राकलन एवं उसकी तकनीकि स्वीकृत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा या लोकनिर्माण विभाग से लेकर इन्ही शासकीय एजेन्सियों के माध्यम से कार्य करवाया जाना था। इसके अलावा आलोट, भानपुरा मुख्य मार्ग से लेकर दूधाखेड़ी मंदिर परिसर तक फोरलेन सीमेन्ट कांक्रीट मार्ग निर्माण के मामलें में भी अनियमितता की गई इसमें भी किसी भी सक्षम अधिकारी से निर्माण की अनुमति नही ली गई। जांच समिति ने पूरी जांच के बाद यह माना कि कार्यालय कलेक्टर एवं अध्यक्ष दूधाखेड़ी माताजी मंदिर भानपुरा जिला मंदसौर के अभिलेख के अवलोकन में तकनीकि कार्य निविदा आदि समस्त कार्यवाही के लिए कार्यपालन यंत्री लोकनिर्माण विभाग मंदसौर को कलेक्टर जिला मंदसौर के आदेश से अधिकृत किया गया लेकिन अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि कार्यपालन यंत्री लोकनिर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्य से संबंधित कोई भी कार्यवाही नही की गई कलेक्टर ने ही सीधे निविदा आमंत्रण से लेकर सारी कार्यवाहिया संपादित कर ली जबकि लोकनिर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री ने केवल संबंधित निविदा दर का परीक्षण ही किया था। इसके अलावा मंदिर प्रबंध समिति के पास केवल 14 करोड़ रूपये की राशी ही जमा थी बावजूद इसके 41 करोड़ रू से भी अधिक की राशी के निर्माण कार्य ठेके पर दे दिये ऐसे में शेष राशी की व्यवस्था कैसे होगी भी इसका भी नियमानुसार अभिलेखों में कोई उल्लेख नहीं है। निर्माण कार्या के नक्शे एवं प्राकल्लन लोक निर्माण विभाग अथवा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग से बनाये जाने थे तथा निर्माण एजेंसी भी इन दोनो में से ही एक विभाग को बनाना था लेकिन इसमें भी नियमों के विपरित मंदिर प्रबंध समिति ने ही नक्शें एवं प्राकल्लन को मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं तत्कालिन कलेक्टर स्वतंत्रकुमारसिंह तथा स्थानीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने ही हस्ताक्षर कर स्वीकृत कर दिया। इसके अलावा करोड़ो रू के निर्माण कार्या के दौरान निर्माण कार्य के लिये उपयोग में लिये जाने वाली सामग्री की जांच हेतु मौके पर कोई लेब स्थापित नहीं की गई और ना ही अभिलेखों में टेस्टिंग से संबंधित कोई रिकार्ड उपलब्ध है।

जांच दल ने यह भी माना कि मंदिर प्रबंध समिति द्वारा बिना शासकीय तकनीकि स्वीकृति एवं एजेन्सी के ही सीधे ठेकेदार लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों की देख-रेख में बिना स्ट¬क्चर इंजीनियर के ही तथा मंदिर की खुदाई करने के पूर्व वहां की स्थिति को समझे या उसका परीक्षण किए बिना ही गर्भ गृह की खुदाई कर सिर्फ माताजी की मूर्तियों को चबूतरे के रूप में छोड़ दिया जबकि उसके नीचे रोज पानी आ रहा था फिर भी ठेकेदार एवं लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नही लिया परिणाम स्वरूप चबूतरा एवं मूर्तियां ढहने की गंभीर घटना हो गई। यही नही कलेक्टर एवं अध्यक्ष प्रबंध समिति ने बिना किसी तकनीकि प्रशासकीय स्वीकृति लिये बिना ही निर्माण कार्य की निविदा निकाल ली और निर्माण कार्य ठेकेदार को दे दिया जो शासन के नियमों के पूरी तरह विपरित है।

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