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श्री पशुपतिनाथ सभागृह में चित्र प्रदर्शनी उद्घाटन से दो दिवसीय कालिदास समारोह का हुआ शुभारंभ

कला मानव की आदिम प्रवृत्ति है-कलापूर्ण ही सम्पूर्णता को प्राप्त करता है

मंदसौर/ विश्वप्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ सभागृह में 23 मार्च को महाकवि कालिदास के ग्रंथों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन से 2 दिवसीय कालिदास समारोह का शुभारंभ हुआ।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. सोहनी, विशेष अतिथि विश्व हिन्दू परिषद् प्रान्त विशेष सम्पर्क प्रमुख गुरूचरण बग्गा, सम्पर्क प्रभारी श्याम चौधरी,  जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल एवं आचार्य पं. श्री विष्णु ज्ञानी थे। अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। श्री पशुपतिनाथ पाठशाला बटूकों व श्री पशुपतिनाथ मंदिर पुजारी भगवतीप्रसाद भट्ट ने सस्वर देववाणी दीप ज्योति मंगलाचरण किया।

प्रदर्शनी में मधुवनी (बिहार), आदिवासी, गौंडशैली पर आधारित आकर्षक चित्रों का अतिथियों ने अवलोकन कर सराहा। प्रत्येक चित्र का  चित्र प्रदर्शनी प्रभारी मुकेश काला कालिदास अकादमी उज्जैन ने संज्ञान कराया।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. सोहानी ने कहा कि पाशविक प्रवृत्तियों का नाश करने वाले पाशुपत अस्त्र के स्वामी भगवान श्री पशुपतिनाथ की पावन नगरी में कालिदास समारोह एक अभिनव आयोजन है। कला मानव की आदिम प्रवृत्ति रही है। आपने कहा कि मनुष्य  की पहचान कला से होती है। अमृत और कहीं नहीं मनुष्य के भीतर ही है जिसे ढूंढने व प्राप्त करने का सुन्दर तरीका इस प्रकार के कला संयोजित आयोजन है। सत्यम् शिवम् सुन्दर का मूर्त रूप कला ही है।  चित्रों के माध्यम से जो कलाकार हमें आत्मसुखानुभूति का एहसास कराते हैं उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिये। कृतज्ञव्यती हमेशा विनम्र होकर वह जागरूक-सदैव-विकासोन्मुखी होता है। इस अवसर पर म.प्र. के प्रतिभावान चित्रकार श्री फड़के, देवलालीवर बेन्द्रे, मण्डला आदिवासी क्षेत्र के जसवन्तसिंह, भाबरा के पेमा फत्या, हेरू ताहेड़ का श्रेष्ठ कलाकृतियों की रचना के लिये स्मरण किया।

सतत् 4 वर्षों से मंदसौर में सफलता पूर्वक सम्पन्न हो रहे समारोह की श्री बग्गा ने सराहना करते हुए कहा कि कालिदास के अनुपम साहित्य से सभी परिचित हो, सभी लाभ उठा सके इसके लिये कालिदास समारोह को ओर विस्तार की आवश्यकता है जिसके लिये सबका प्रयास होना चाहिये जिससे केवल मंदसौर ही नहीं सम्पूर्ण मालवा क्षेत्र लाभान्वित होगा।
श्याम चौधरी ने कहा कि हूणों को पराजित करने वाले राजा यशोधर्मन की दशपुर नगरी सांस्कृतिक, धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक नगर रही है। कालिदास का नगर से सम्बन्ध नगर के लिये गौरव का विषय है। कालिदास के ग्रंथों से गंगा, संस्कृत और संस्कृति का त्रिवेणी संगम है। कालिदास के अनुपम ग्रंथ संस्कृत में होने से आमजन समझ नहीं पाते है। कालिदास समारोह का उद्देश्य सामान्यजनों तक कालिदास के ग्रंथों से परिचित कराना है। साहित्य जगत में पद्य रचियता को कवि कहा गया है परन्तु महाकवि होने का गौरव केवल कालिदास को ही मिला है।

प्रेस क्लब अध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी की अंतप्रेरणा एवं विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया के प्रयास के फलस्वरूप मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा मंदसौर में कालिदास समारोह का शुभारंभ होने से वर्षों पुरानी मांग मंजूर हुई है क्योंकि कालिदास का दशपुर नगर से अटूट संबंध रहा है। उज्जैन के पश्चात् मंदसौर में कालिदास समारोह को प्रारंभ करने के लिये पत्रकार श्री जोशी एवं विधायक श्री सिसौदिया साधुवाद के पात्र है जिन्होंने महाकाल के पश्चात् भगवान श्री पशुपतिनाथ के उपासक कालिदास की स्मृति को संजोये रखने में यह समारोह अवश्य सार्थक सिद्ध होगा।

डॉ. घनश्याम बटवाल, सचिन पारिख, गायत्री प्रसाद शर्मा, राजाराम तंवर, राव विजयसिंह, बंशीलाल टांक, एड. गोपालकृष्ण शर्मा, धनराज धनगर, कालिदास अकादमी कार्यकारी प्रभारी अनिल बारोट, जिला जनसम्पर्क अधिकारी ईश्वरसिंह चौहान, चित्र प्रदर्शनी प्रभारी मुकेश काला कालिदास अकादमी उज्जैन, दिनेश बैरागी आदि उपस्थित थे। संचालन वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने किया एवं आभार वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल ने माना।

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