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श्री रामकथा के आठवे दिन  बड़ी संख्या में श्रदालुओं ने किया कथा का रसपान

व्यक्ति के साथ या तो अभिमान चलेगा या हनुमान-आचार्य श्री रामानुजजी

मंदसौर।  धर्म का अर्थ  संकल्प के प्रति  निष्ठा, प्रतिबद्धता होता है लेकिन धर्म को गति देने के लिए संयम, प्रेम और करुणा की आवश्यकता होती है, सामाजिक बुराइया, समस्याओं और विक्रतियो का जन्मदाता मोह है। धर्म किसी से बेर नही करता लेकिन इतना पंगु भी नहीं कि धर्म के नाम पर फैली विकृतियों को कर्म के द्वारा समाप्त न कर सके।
यह बात पूज्य आचार्यश्री रामानुजजी ने श्री हरिकथा आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित श्री रामकथा में व्यास पीठ पर विराजित होकर कथा का रसपान कराते हूए कही। कथा प्रारम्भ होने से पूर्व  सकल ब्राह्मण समाज, सेवानिवृत नागरिक महासंघ, पशुपतिनाथ शयनकाल आरती मंडल,दशपुर योग शिक्षन संस्थान, दशपुर जागृति संगठन, अग्रवाल महिला मंडल,सकल ब्राह्मण समाज महिला मंडल, मीडिया जगत, संपादक मोहन रामचंदानी, नरेंद्र धनोतिया, वैद मिश्रा, सचिन पारिख, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील बंसल, जगदीश पहलवान कर्मकांड परिषद के संरक्षक पंडित सदाशिव गुरुजी ने श्री हरिकथा आयोजन समिति अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल,संयोजक मोहनलाल शर्मा जांगिड़,सहसंयोजक जे.पी . बटवाल,सचिव सुरेश सोमानी, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण सोमानी   ने पौथी पूजन कर आचार्यश्री का आशीर्वाद लिया।  इस दौरान आचार्यश्री ने शाल और पगड़ी पहनकर सदाशिव गुरुजी का सम्मान किया। आचार्य श्री रामानुजजी ने कहा कि हम मंदिर जाते है, घर में देवताओं की पूजा करते है, तिलक लगाना, माला पहनना, धोती पहनना ये सब ईश्वर के प्रति प्रेम है, धर्म नही। धर्म तो एक चरित्र है,सभ्यता है। प्रेम करने वाले को अलार्म नही भरना पड़ता उसका दिल उसे याद दिलाता है। इसी तरह संसार के पदार्थ शाश्वत नहीं है इसलिये आज मीठा लगने वाला प्रेम कड़वा भी लगने लगता है, क्योकि प्रेम तो रेशम को डोरी होता है। आपने कहा कि सद्गुरु, निष्ठावान की कृपा जब तक हम पर नही होता राम को समझ पाना आसान नहीं होता  है।धर्म की मजबूरी उसका स्वभाव है गतिशील रहना, चरित्र का ख्याल रखना, धर्म वह होता है जहाँ किसी प्रकार की वासना नही होती है, वासना व्यक्ति को डुबाती जरूर है।जिंदगी में किसके साथ चलना है यह व्यक्ति को स्वयं तय करना है, लेकिन इतना तय है कि व्यक्ति के साथ या तो हनुमान चलेगा या अभिमान। हनुमानजी जी और अभिमान साथ नही चल सकते। आपने कहा कि जिसके हृदय में प्रेम न हो वह कभी संत नहीं बन सकता। भगवान के लिए विभीषण ने भाई को, प्रहलाद ने पिता को छोड़ दिया।हानि- लाभ, यश अपयश, जीवन मरण सबकुछ परमात्मा तय करता है इसलिए भक्त बनो तो भरत जैसा जो राम को भी अपने प्रेंम से बांध लें।भक्ति के मार्ग पर जो भक्त निकले याद रखे अंत तक अपना नियम न छोड़े, क्योकि भक्ति मार्ग पर अपने ही नियम तुड़वाने के लिये आगे बढ़ते है।समाज विरोध करे तो समझ लेना राम यात्रा में आपका दूसरा कदम पड़ चुका है। यदि विरोध करने वाले आपके प्रेम के कायल हो जाये तो समझना राम यात्रा का पहला पड़ाव आपने पा लिया।आचार्यश्री ने कहा कि जब समाज सुविधाओं में रहता हो तब एक संत रातभर सिर्फ इसलिए जागता है कि  सुविधाऐ समाज के लिए कोई  दुविधा नही बन जाए, सुविधा भोगी समाज एक संत का हाथपकडकर त्रिवेणी संगम पार कर लेता है। धर्म के मार्ग पर उठोगे तो नियम टूटेगे,संसार विरोधी हो जायेगा, राम से भटकाकर ले जाने का प्रयास करेगा । लेकिन यदि संत का हाथ थामे रहोगें तो यात्रा अधूरी नहीं रहेगी।
आचार्य श्री ने युवाओं से आव्हान करते हुए कहा कि व्यक्ति की वासना तब तक चलती हैं जब तक समष्टि की वासना उसे न पकड़े। अपने पिता की अभिलाषाओं को पूरा करने में लिए पुत्र को कटिबद्ध होना चाहिए, वह अपने कर्म के द्वारा अपने अपने माता- पिता कों किसी भी प्रकार का कलेश न हो इसका वह ध्यान रखे। सच यह है कि माता -पिता से प्रेम करते हो तो आपके एक- एक कदम से मुक्ति का मार्ग खुलेगा। रामकथा से प्रेम का एक वाक्य भी ग्रहण कर लिया तो समझना अपनी मुक्ति का मार्ग खोल लिया निश्चित मानना किसी न किसी गली में आपको भगवान के दर्शन हो जायेगें। आपने कहा कि हम किन वस्तुओ के लिए अपनो का अपमान करने के लिए खड़े होते है, क्योकि सब कुछ यहीं रह जाने वाला है। दो भाई के बीच प्रेम कैसा हो यह राम और भरत ने सिखाया है।धीरज, धर्म, मित्र और पत्नी संकट के समय काम आते है। सफलता के लिए मेहनत करो तो स्वयं मुस्कराते रहना।समस्या आये तो धीरज रखकर मुस्कराते हुए समस्या को टाल देना।
आरती का लाभ लिया- रामकथा के आठवें दिन प्रदेश भाजपा महामंत्री बंशीलाल गुर्जर, पूर्व  मंत्री नरेंद्र नाहटा, देवेंद्र गुप्ता ,सत्यनारायण सोमानी, रजत शिप्रा कंथारिया किशनगढ़, अभिषेक श्रुति बटवाल, दशरथ कुमावत, जेठा भाई, दिलीप ग्वाला, राजेंद्र नाहर, जितेंद्र अग्रवाल, पंकज पारीख, समन्वय परिवार के दिवाकर उपाध्याय ,डॉ मनोज उपाध्याय, श्रीमती तारा बाई पालीवाल, केलाश गुप्ता पिपलिया मंडी, रुपी सेठ, अशोक सेठिया, ओम चंद्र हेयर, वीरेंद्र सिंह राठोर रुणीजा, कृष्णपाल सिंह चंद्रावत, ओमप्रकाश अकेला ,सनत अग्रवाल,मोहनलाल लड्डा, रोटरी क्लब के राजेश सिंघवी, नरेंद्र मेहता, राधेश्याम झंवर, इनरव्हील क्लब के शशि मारू, सीमा गांधी, जमुना बाफना, गीता झंवर,निर्मला मेहता,रेखा सोनी,रक्षा जैन,देवेंद्र त्रिवेदी, गोपाल गोयल, दिनेश रांका,डॉक्टर कमलेश संगतानी,राजू भाई पारेख ने लिया। संचालन ब्रजेश जोशी एवं संजय वर्मा ने किया। आभार श्री हरिकथा आयोजन समिति अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल ने माना।

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