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संगीत-साहित्य-कला संस्कृति का अद्भूत संयोग है कालिदास समारोह ऐतिहासिक गौरवपूर्ण उपलब्धि है मंदसौर नगर के लिये राष्ट्रीय स्तर के विद्वान एवं कलाकार देंगे प्रस्तुति

कवि कालिदास का जन्म मंदसौर के खिलचीपुरा में होना चाहे ऐतिहासिक तथ्यों पर सिद्ध नही मानते हुए किवदन्ती के रूप में ही क्यों न ग्रहण करे, गलत नहीं हो सकता क्योंकि किवदन्तियों का भी लोककथा, लोकचर्चाओं पर कहीं न कहीं कुछ आधार तो होता ही है। महाकवि कालिदास का जनमस्थल चाहे मंदसौर (खिलचीपुरा) न भी रहा हो परन्तु यह तो मानना ही पड़ेगा कि कोई भी रचनाकार-साहित्यकार-इतिहास वेत्ता यदि किसी स्थान के संबंध में यदि अपने तीन-तीन ग्रंथों में वर्णन करता हो, परिभाषित करता है और वह भी उस युग में जबकि वर्तमान में जैसे सड़क, हवाई, जलीय आवागमन के सहज, सुलभ साधन उपलब्ध नहीं थे, मीलों, महिनों पैदल, घुड़सवारी अथवा रथों से गंतव्य स्थान की दूरी तय करना पड़ती थी ऐसी स्थिति में यदि कवि कालिदास विश्व के एकमात्र दशपुर के अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ का अपने ग्रन्थों में ससम्मान उचित स्थान प्रदान कर अपनी लेखनी को धन्य करते हो तो स्पष्ट है कि कवि कालिदास का मंदसौर से अवश्य कोई न कोई गहरा सम्बन्ध-नाता रहा है और इस सम्बन्ध में इस धारणा को भी भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा व विश्वास को प्रबल बल मिलता है कि जो कालिदास समारोह सम्पूर्ण भारत में भगवान कालेश्वर, महाकाल की नगरी उज्जैन में ही आयोजित होता रहा है 8 दिसम्बर 2010 को मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान द्वारा भगवान श्री पशुपतिनाथ की नगरी को पवित्र नगरी घोषित करने के संबंध में धन्यवाद-आभार ज्ञापित करने जब आदरणीय विधायक श्री यशपालसिंहजी सिसौदिया के नेतृत्व में नगर के लगभग 10 गणमान्य नागरिकों के प्रतिनिधि मण्डल के साथ माननीय मुख्यमंत्रीजी के निवास स्थान पर पहुंचा और उस समय कार्यक्रम के संचालनकर्ता वरिष्ठ पत्रकार तथा लेखक श्री ब्रजेश जोशी को अंतःदेवी प्रेरणा से अकस्मात जब मुख्यमंत्रीजी के समक्ष उज्जैन की तर्ज पर ही मंदसौर मे भी कालिदास समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव रखा तो यह प्रथम अवसर था जब राष्ट्रीय स्तर का एक बहुत बड़ा आयोजन बिना किसी विचार-विमर्श, केबीनेट की स्वीकृति आदि किसी भी पूर्व औपचारिकता के माननीयम मुख्यमंत्रीजी ने स्वीकृति प्रदान कर दी। यह सचमुच भगवान श्री पशुपतिनाथजी की असीम महाकृपा थी उन्हीं की प्रेरणा रही होगी कि सदियों से माॅ क्षिप्रा के तट पर अवन्तिका जो कि मेरा (महाकाल) परम् धाम है ही परन्तु जब मेरा ही स्वरूप पशुपतिनाथ के रूप में दशपुर के शिवना तट पर भी प्रकट हो गया है तो फिर मेरा विशद गुणगान करने वाले महाकवि कालिदास की पुण्य स्मृति से दशपुर नगर कैसे वंचित रहे और उसी का प्रतिफल है कि उज्जैन के बाद मंदसौर नगर में भी कालिदास समारोह का आयोजन प्रारंभ हो गया है जो कि एक ऐतिहासिक उपलब्धी तो है ही साथ ही यह मंदसौर नगर के लिये परम् गौरव भी है।
मध्यप्रदेश शासन केे तत्वावधान में जिला प्रशासन के सहयोग से कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के द्वारा संगीत, साहित्य (संस्कृत विशेष) और कला के अद्भूत त्रिवेणी संगम का यह अभिनव कार्यक्रम तृतीय वर्ष में माँ शिवना के तट पर भगवान श्री पशुपतिनाथ के सानिध्य में 18 मार्च से 19 मार्च तक कल से प्रारंभ हो रहा है। प्रेस, इलेक्ट्रानिक तथा सोश्यल मीडिया के माध्यम से सम्पूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा आमंत्रण के साथ प्रचारित, प्रसारित की गई है। नगर के समस्त संगीत, साहित्य, संस्कृति, कलाप्रेमी तथा प्रज्ञावेत्ताओं को प्रातः एवं सायंकालीन आयोजित समस्त कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर अवश्य लाभ लेना चाहिए।

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