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संदर्भ-विधानसभा चुनाव-2018 : मतदाताओं को आकर्षित करने की जद्दोजहद में जुटे राजनैतिक दल

(कमल कोठारी) आज़ादी के बाद से भारत ने चुनावो का एक लंबा रास्ता तय किया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश है। 1951-52 में देश में कुल मतदाता की संख्या 17 करोड़ के आसपास थी जो 2014 के चुनाव के दौरान 82 करोड़ के करीब हो गयी। 1984 में राजीव गांधी कांग्रेस सरकार के बाद 2014 में 282 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्णबहुमत से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार बनी। इस वर्ष 2018 में चार राज्यो के विधानसभा चुनावो की घोषणा होने वाली हैं जिनको को लेकर राजनीति पार्टी के बड़े नेता चुनावी अभियान में लग गए। शहर से लेकर गांव की चौपाल तक राजनीत दल के नेताओ द्वारा मतदाताओं को अपनी-अपनी पार्टी को वोट देने के लिए आकर्षित किया जा रहा। किसानों को कर्ज माफ करने जैसी लोक लुभावने वादों के प्रलोभन देकर सत्ता के शीर्ष पायदान पर पहुचने की जद्दोजहद में दोनों ही पार्टी के नेतागण लगे हुए है। कांग्रेस भी 14 साल के वनवास को भोगने के बाद वापस आने की तैयारी में लगी हुई हैं।
2018 के चुनावी समर के भंवर में किसका पलड़ा भारी रहेगा ये तो चुनावी परिणाम आने के बाद ही पता चल सकेगा बहरहाल मध्यप्रदेश में इस बार चुनावी परिणाम अप्रत्याशित नतीजो के साथ नज़र आएगा  लेकिन 1 जून से 10 जून 2018 को किसानों ने फसलो की वाजिब कीमत को लेकर  देश व्यापी हड़ताल रख कर आक्रोश जताया था। 6 जून 2017 में किसान आंदोलन में मारे गए 5 किसानों की मौत को लेकर भी पूरे देश मे राजनीति घटनाक्रम का माहौल बन गया मंदसौर जिले के पिपलिया में किसान सम्मेलन में राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के किसानों का 10 दिन में कर्ज माफी की घोषणा ने भारतीय जनता पार्टी की नींद उड़ा  दी। जिसके कारण कई किसानों ने बैंकों में अपनी कर्ज की राशि जमा नही कराई। 2018 के चुनाव प्रभारी के रूप में केंद्रीय नेतृत्व ने राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी ज्योतिराधित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया व कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौपी।
भाजपा भी इस चुनावी मैदान में नए सिपहसालार उतारने की तैयारी में है। 80 से 90  विधायक के टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2018 में विधानसभा सभा व 2019 मे लोकसभा की तैयारी को लेकर प्रदेश में शिवराजसिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा का शुभारम्भ कर प्रदेश में चुनावी शंखनाद कर गए। मध्यप्रदेश के वर्तमान स्थिति का आंकलन किया जाए तो प्रदेश में भाजपा को जो जनाधार था वो पहले के मुकाबले कम हुआ है ? इसका मुख्य कारण वर्तमान विधायक की कार्यप्रणाली से कार्यकर्ता असंतुष्ट दिखलाई दे रहा है? प्रदेश में अफसरसाही हावी है? भ्रष्टाचार चरम पर हैं? व्यापारी वर्ग भी कुछ हद तक सरकार की नीतियों और जीएसटी की विसंगतियों को लेकर परेशान है।
वहीं विपक्ष अपनी वंशवादी परंपरा को आगे बढ़ाने की भूमिका के चलते कांग्रेस को आगे गति प्रदान करने में हिचकोले खा रहा है? कांग्रेस को वंशवादी परंपरा से बाहर निकल कर जनवादी जन परम्परा को मान्यता देकर सर्वमान्य नेता का चयन कर विपक्ष की या पक्ष की भूमिका को  मजबूती प्रदान कर एक सशक्त राष्ट्र बनाने के उत्तरदायित्व की परंपरा के संचार से ही राष्ट्र के चहुमुखी विकास का मार्ग प्रशस्थ होगा।

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