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संदर्भ-स्वतंत्रता संग्राम सैनिक पं. शर्मा – आखिर तंत्र हाराः गण की जीत हुई : (विक्रम विद्यार्थी)

चौरानवें वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सैनिक पं. नवलकिशोर शर्मा को इन्दौर जिला प्रशासन द्वारा गणतंत्र एवं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पिछले ग्यारह वर्षों से आमंत्रित नहीं किया जाने वाला मामला संवेदनहीनता की इंतहा ही कहा जाएगा। अंत में तंत्र हारा, गण की जीत हुई।

पं. शर्मा वर्ष 2008 में इंदौर आकर बस गए, उसके पूर्व वर्ष 1972 से वे मंदसौर में रहे। जहां जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय पर्व पर उन्हें ससम्मान आमंत्रित किया जाता रहा। इन्दौर प्रशासन द्वारा उनकी सुध नहीं लिये जाने पर आश्चर्य के साथ इसे शर्मनाक मामला कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

श्री शर्मा प्रखर चिंतक, निराभिमानी, स्वाभिमानी जनसेवक हैं। वे जो लिखते हैं उन्हें देश का प्रसिद्ध दैनिक जनसत्ता, ससम्मान प्रकाशित करता है। पौधारोपण उनका विशेष शगल रहा। किटियानी कॉलोनी की पथरीली जमीन पर उन्होंने 40 प्रकार के 155 पौधे लगाए जो अब वृक्ष बन गए। इसी कारण नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार (अब स्वर्गीय) ने इस बगीचे का नामकरण उनके नाम पर किया।

इंदौर जिला प्रशासन के कारकून की लचर दलील कि सम्मान निधि उन्हें मंदसौर से मिल रही इसलिये राष्ट्रीय पर्व के आमंत्रण मंदसौर से आएंगे और शर्मनाक बात यह हो गई कि कलेक्टर  इंदौर कह रहे है कि स्वतंत्रता सैनानी अपनी दिक्कत बनाए। श्री शर्मा को क्या दिक्कत? कलेक्टर के ये बोल तानाशाह के फरमान से कम नजर नहीं आ रहे। मंदसौर कलेक्टर का तर्क भी आम लोगों को रास नहीं आ रहा कि उनके परिवार का सदस्य आवेदन करे तो अपने रिकार्ड से जांच कर कलेक्टर इंदौर के सूचना भेज देंगे। परिवार किस बात का आवेदन करे।

नौकरशाहों के ये बोल अंग्रेजों के जमाने की याद दिलाते हैं कि जनता तुम्हें गरज हो तो ओखली में सिर दे दो तो योग्य चिकित्सक से उपचार करा देंगे।

संवेदनशील प्रशासन वह होता है जो यह देखे कि स्वतंत्रता सैनिक श्री शर्मा पहले ग्यारह वर्ष से राष्ट्रीय पर्व पर शिरकत क्यों नहीं कर रहे ? बेहतर तो यह होता कि श्री शर्मा के मंदसौर स्थित निवास के आस पड़ौस से पता लगाकर इंदौर जिला प्रशासन को जानकारी देते या इंदौर  प्रशासन अपने सूत्रों से श्री शर्मा का पता लगाकर राष्ट्रीय पर्व पर उन्हें ससम्मान आमंत्रित करता।

स्वतः संज्ञान नहीं लेने के इस प्रकरण ने दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारी (वह भी आय.ए.एस.) की कार्यशैली को पहचान जारी कर दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ व्यवहारिता का ज्ञान देने के लिए क्लास लेंगे, अधिकारियों की ?

इस चर्चा के चलते क्षेत्र के वरिष्ठ विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया ने इस प्रकरण में टिप्पणी देकर मन को सुकून दिया कि स्वतंत्रता संग्राम सैनिक पं. नवलकिशोर शर्मा मेरे गुरू हैं। उन्होंने मुझे पढ़ाया है, वे जीवन भर सिद्धांतवादी रहे हैं और किसी से याचना नहीं की। वे अब इंदौर में रहे हैं उन्हे वहां सम्मान मिलना चाहिये। यह इंदौर प्रशासन की जिम्मेदारी है। खेद की बात यह है कि जनप्रतिनिधि श्री सिसौदिया ने जो बात सहज समझा ली उसे ये कलेक्टर समझा नहीं पा रहे हैं। अन्त में इंदौर प्रशासन को गणतंत्र दिवस पर श्री शर्मा को आमंत्रित करना ही पड़ा।

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