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संस्कृत संभाषण शिविर का हुआ समापन

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मंदसौर। संस्कृत भारती मालवा प्रांत के अनंर्गत 10 दिवसीय निशुल्क संस्कृत शिविर का आयोजन स्थानीय लोकमान्य तिलक उमावि में मंदसौर में दिनांक 28 जून से 7 जुलाई तक किया जगया जिसका समापन रविवार समय प्रातः 9 से 11 बजे तक किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमति प्रियंका गोस्वामी जिला पंचायत अध्यक्ष एवं डॉ रविन्द्र कुमार सोहोनी प्राचार्य शास रागा स्नोकत्तर महाविघालय मंदसौर थे। मुख्य वक्ता संस्कृत भारती मालवा प्रान्त के उपाध्यक्ष भरत बेरागी के सम्मुख अतिथियों द्वारा दीपप्रज्वलन कर किया। इसके बाद सरस्वती वंदना गुरूदत्त मेहता ने की। अतिथि परिचय दिलीप दुबे जिला संयोजक पंचांग वाचन वहिन योषिता दुबे ने किया। वर्ग का अनुभव शिविरार्थी डॉ मिथिलेश मेहता ने व्यक्त किया।

मुख्य वक्ता श्री बैरागी ने बताया कि प्राचीन काल में हमारे देश में संस्कृत भाषा सर्वोपरि थी। भारत में लाखों की संख्या में गुरूकुल थे। जिनमें वेदानुकुल संस्कार युक्त शिक्षा दी जाती थी। जिस कारण भ्रष्टाचार व्यभिचार जैसे कृत्य नही के बराबर होते थे। मै काले की शिखा पद्धति के आने से हमारे संस्कृत ग्रंथों एवं संस्कृत शिक्षाा को गर्त में डाला गया जिस कारण आज संस्कृत एवं संस्कार विहीन शिक्षा के कारण भ्रष्टचार वयभिचार जैसी घटनाएॅं आए दिन पनप रही हैं आज भारत में 20 संख्या के लगभग संस्कृत विश्व विघालय है। जबकि जर्मनी में 25 से अधिक संस्कृत विश्व विधालय है।संस्कृत का पाठन लोगो की विकृत मानसिकता को बदल देता हैं संस्कृत का श्रवण पठन एवं बोलने वाला व्यक्ति शरीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता हैं। यदि हमें हमारी संस्कृति समाज एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखना है तो वर्तमान पीढी को संस्कृत से जोडना होगा।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रियंका गोस्वामी ने कहा कि क्यों नं संस्कृत भाषा प्रथम कक्षा से ही अनिवार्य कर दी जाए क्योंकि यह भाषा हमारे पूर्वजों की भाषा हे वैज्ञानिकी भाषा है। कार्यक्रम की अध्यक्षीय भाषण में डॉ सोहोनी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद के वाक्य उतितष्ठित जागत प्राप्त वरान्निबोधत को आत्मसात करते हुए हमें अभी भी जागृत होने का समय है। हमारी इस देवभाषा को सहजने का कार्य हम लोगो के कंधे पर है। आज कोई भी धार्मिक कार्य बिना संस्कृत के मंत्रों के उच्चारण के नही हो सकता है। हम संस्कृत जानते है पढते है पढाते भी है पर संस्कृत बोल नही पाते है।

कार्यकम का संचालन वर्ग प्रशिक्षक डॉ सिद्धनाथ खजूरिया ने किया। ध्येय मंत्र बहिन ज्योति मेहता ने बोला तथा आभार शिविरार्थी दिनेश राठौर ने माना। इस अवसर पर विभाग संयोजक नवीन त्रिवेदी, पालक डॉ रवीन्द पाण्डे, प्रभुलाला जाट, दिलीप भाटी, हिम्मत डांगी, मनीष भावसार, कन्हैया देशमुख, राकेश भट्ट सहित सभी प्रशिक्षणार्थी एवं नगर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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