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सच : आरआई ने जवान को नहीं पीटा, आरक्षक ने की अनुशासनहीनता

रंगरूट होकर अपने अधिकारी से किया दुर्व्यवहार, हीरोगिरी भी दिखाता है जवान

मन्दसौर। गुरुवार को पुलिस लाइन मंदसौर के रक्षित निरीक्षक श्री विजयकांत शुक्ला पर पुलिस लाइन में रंगरूट राहुल ने गंभीर आरोप लगाते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मनकामना प्रसाद से शिकायत करते हुए बताया कि रक्षित निरीक्षक श्री विजयकांत शुक्ला ने उसके साथ मारपीट व गाली गलौज की, साथ ही आरोप लगाया कि पुलिस अधीक्षक ने उसे लाइन से थाने पर पदस्थ कर दिया लेकिन रक्षित निरीक्षक रवानगी देने के एवज में रुपयों की मांग कर रहे हैं। मामला बहुत गंभीर था जिसे पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धार्थ चौधरी ने पूरी गंभीरता से लिया और मामले की जांच करने खुद पुलिस लाइन मंदसौर पहुंचे।

झूठ बोल रहा है जवान

दैनिक मालवा मेवाड़ का सवेरा की टीम ने इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जिसमें सच्चाई यह निकलकर सामने आई कि पुलिस लाइन में पदस्थ अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चुका जवान राहुल सफेद झूठ बोल रहा है। रक्षित निरीक्षक श्री विजयकांत शुक्ला हर रोज की तरह गुरुवार को भी रंगरूट व पुलिस लाइन में पदस्थ पुलिस कर्मियों को पीटी करवा रहे थे। रनिंग करते समय 3 जवानों की तीन लाइन बनाकर एक साथ सभी दौड़ते हैं, खहड़ आरआई भी साथ में रनिंग करते है, लेकिन जवान राहुल लाइन से बाहर निकल कर खड़ा हो गया। इस पर रक्षित निरीक्षक श्री विजयकांत शुक्ला ने राहुल से कहा कि रुक क्यों गया, तो अपने सीनियर अधिकारी से जवान राहुल ने कहा कि मुझे नहीं दौड़ना। इस पर रक्षित निरीक्षक श्री शुक्ला ने उसका हाथ पकड़कर एक तरफ कर दिया और बोले कि तुझे नहीं दौड़ना है तो साइड में खड़ा हो। बस इस बात को राहुल ने तूल दिया क्योंकि रक्षित निरीक्षक श्री शुक्ला ने महिला पुलिसकर्मियों के सामने हाथ पकड़कर उसे साइड में कर दिया था। इसे अपनी बेइज्जती मानते हुए राहुल ने अपने अन्य साथी जवानों को बरगला कर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रसाद के समक्ष पेश होकर रक्षित निरीक्षक की शिकायत करते हुए अनाप-शनाप आरोप लगा डाले। जबकि मौके पर मौजूद रंगरूट और पुलिसकर्मियों से हमारे द्वारा की गई पड़ताल में स्पष्ट होता है कि राहुल सरासर झूठ बोल रहा है, उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट रक्षित निरीक्षक श्री शुक्ला द्वारा नहीं की गई है। हालांकि मामला जांच में है और पुलिस कप्तान खुद मामले पर नजर बनाए हुए हैं सच्चाई जो भी होगी सामने आ ही जाएगी।

पुलिस कानून में संगठित होकर प्रदर्शन नहीं कर सकते

कानूनी जानकारों की मानें तो पुलिस लॉ के अनुसार कोई भी पुलिसकर्मी संगठित होकर प्रदर्शन करते हुए शिकायत नहीं कर सकते इसे अनुशासनहीनता माना जाता है। ऐसे में जवान राहुल ने अपने साथी जवानों को बरगला कर संगठित होकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मनकामना प्रसाद के समक्ष आरोप लगाए जो कि अनुशासनहीनता माना जाएगा। इतना ही नहीं मौके पर मौजूद सूत्रों की मानें तो राहुल यह कहता भी दिखाई दिया कि अपने गांव से लोगों को बुलाओ इस आरआई की शिकायत करने चलते हैं। यानी एक जवान जिसे अभी तक थाना भी नहीं मिला है वो अपने सीनियर अधिकारी से भिड़ता हुआ दिखा और उनकी झूठी शिकायत करके हीरो बनने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सोचने में आता है कि जिस दिन इस जवान राहुल को कोई थाना मिल गया तो ये आम नागरिकों के साथ क्या व्यवहार करेगा ? ऐसे बद-दिमाग पुलिसकर्मियों के कारण विभाग की बदनामी होती है ओर जनता भी प्रताड़ित होती है।

महिला कर्मियों के सामने भी हीरोगिरी दिखाता है

पुलिस लाइन के सूत्रों की माने तो राहुल खुद को किसी हीरो से कम नहीं समझता और लाइन में पदस्थ रंगरूट व अन्य महिला कर्मियों के सामने हीरोगिरी भी बहुत दिखाता है, यानी राहुल थाना मिलने के पहले ही ऐसी हरकतें कर रहा है जिन्हें करने के बाद थाने के लॉकअप में बंद होना पड़ता है।

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