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सपाक्स की रैली में उमड़ा सैलाब, राजनेताओं की नींद उड़ी

आरक्षण और एस्ट्रोसिटी एक्ट का विरोध

हमारे मातृत्व और दूध को गाली दी है ,हमारी संताने इतनी कायर नही है देश के लिये जान दे सकती है तो जान ले भी सकती है – मातृशक्ति

मन्दसौर। सपाक्स के आव्हान पर 3 सितम्बर सोमवार को एक विशाल महारैली सवर्ण, पिछडा व अल्पसंख्यक समाजों द्वारा निकाली गई। रैली सम्राट मार्केेट स्थित आजाद चन्द्रशेखर की प्रतिमा का पूजन अर्चन करने के बाद प्रारंभ हुई। जो कालाखेत, घंटाघर, नयापुरा रोड, महाराणा प्रताप, बस स्टेण्ड, महू नीमच रोड़ होते हुए बीपीएल चौराहे से गांधी चौराहे पर पहंुची जहॉ पर रैली आमसभा में परिवर्तित हुई। महारैली में मशाल लेकर महिलाएं और पुरुष सम्मिलित हुए ,किसी ने काले कपड़े तो किसी ने काली पट्टी लगा रखी थी। माई के लाल नाम की टोपियां पहन कर युवाओ ने शिवराज सिंह को खूब कोसा।

 

इसके अलावा महिलाओं में विशेष आक्रोश देखा गया आरक्षण एट्रोसिटी एक्ट के विरोधी महिलाओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को चेतावनी देते हुए कहा है कि शिवराज ने हमारे मातृत्व और दूध को गाली दी है ,हमारी संताने इतनी कायर नही है देश के लिये जान दे सकती है तो जान ले भी सकती है, इस गाली का खामियाजा शिवराज और भाजपा को भुगतना होगा।

 

गांधी चौराहे पर सभा को संबोधित करते हुए सपाक्स संघ के प्रदेश संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि एस्ट्रोसिटी एक्ट अंग्रेजो के जमाने में बनाए गए एक्टों से भी खतरनाक है। इस कानून से देश की कानून व्यवस्था की बदल जाएगी। श्री त्रिवेदी ने कहा कि अब हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर आना होगा और हमने अधिकरो की मांग करना होगी। सरकार सिर्फ एक पक्ष को खुश करने का प्रयास कर रही है। श्री त्रिवेदी ने लांेगो को संबोधित करते हुए कहा कि इस काले कानून को सरकार को वापस लेना होगा। आज सपाक्स संघ के माध्यम से हम इस काले कानून और आरक्षक के पूर जोर विरोध करते है। श्री त्रिवेदी ने कहा कि एक और सांपनाथ है (भाजपा) तो दूसरी और नागनाथ (कांग्रेस) हम इनके बीच जनता के लिए नेवले का काम करेगे। आज दोनों ही राजनीतिक पार्टीयां वोट बैंक के लिए कुछ भी करने को तैयार है। जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक हो गया है। सपाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष के एस तोमर ,श्रीमती दुर्गेश कुंवर भाटी, प्रांतीय सदस्य भदोरिया जी, एम पी सिंह परिहार आदि ने भी अपने विचार रखें। इस दौरान संस्था के जयेश नागर, रणजीत सिंह भाटी ,आशीष बंसल, रमेशचंद शर्मा, धीरेंद्र त्रिवेदी ,रूप नारायण जोशी , हरिशंकर शर्मा ,शैलेंद्र चंद्रावत ,डॉ ज्योति शुक्ला ,श्रीमती उर्मिला तोमर,आदि भी विशेष तौर पर उपस्थित थे। आमसभा का संचालन का सत्येन्द्रसिंह सोम ने किया।

 

भाजपा व कांग्रेस के लोग हुए शामिल, कहते फिरे हम भी सामान्य है
सपाक्स की रैली में बड़ी संख्या में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े लोग शामिल हुए। हालांकि रैली में दोनों ही पार्टीयोें के प्रथम पंक्ति का या कोई बड़ा नेता शोमिल नहीं हुआ लेकिन दोनों ही पार्टी से जुड़े लोग जरूर शामिल हुए। इन लोगों से जब अन्यों ने पुछा तो कि आप तो फला पार्टी से है जो वे लोग सफाई देते दिखे कि हम भी सामान्य से वर्ग से आते है और आज इस रैली में इसी ऐसियत से आए है।

 

रिटायर अधिकारी भी शामिल हुए
सपाक्स रैली में बड़ी संख्या में रिटायर हुए सरकारी अधिकारी भी शामिल हुए। रैली में तहसीलदार, नायाब तहसीलदार, पुलिस अधिकारी कलेक्टर कार्यालय व अन्य बड़े विभागों में कार्य कर चुके कई रिटायर अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए। जिन्होने काली पट्टी बांधकर एस्ट्रोसिटी एक्ट व आरक्षण का पूरजोर विरोध किया। इनके अलावा रैली में कई व्यापारी भी शामिल हुए।

 

सपाक्स 230 सीटों पर लड़ेगा चुनाव
हीरालाल त्रिवेदी मंदसौर प्रवास के दौरान स्पष्ट कर दिया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगे और एक माह के भीतर अपने उम्मीदवार तय कर देगे।

 

भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
भाजपा के पूर्व मंडल अघ्यक्ष व बचपन से ही भाजपा से जुडे़ सुनिल बंसल ने गांधी चौराहे पर हुई आमसभा के दौरान भाजपा की प्राथमिक सदस्यता को त्याग कर सपाक्स संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली।

 

कईयों के मन में फुटने लगे लड्डू
श्री त्रिवेदी ने विधानसभा चुनाव में सपाक्स संघ के उम्मीदवारों को उतारने की घोषणा करने के बाद से ही मंदसौर में कई रिटायर अधिकारियों व सामाजिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों में लड्डू फूटने लगे कि वे भी विधानसभा चुनाव लड़ सकते है। उनमें प्रमुख है शहर कोतवाली के नगर निरीक्षक रहें एमपीसिंह परिहार, नगर के ख्यातनाम चिकित्सक डॉ विजयशंकर मिश्र, पूर्व तहसीलदार रूपनारायण जोशी, शिक्षाविद् जयेश नागर है।

 

दिल्ली में हुए परिवर्तन से मिल रही प्रेरणा
जिस प्रकार दिल्ली के लोगों को भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक अच्छा विकल्प मिला और दिल्लीवासियों ने दिखा दिया था कि एक अच्छा विकल्प मिलने पर जनता क्या कर सकती है। ठीक उसी प्रकार मध्यप्रदेश में सपाक्स को भी उसी निगाह से देखा जा रहा है हालांकि सपाक्स संघ की डगर बहुत मुश्किल दिखाई दे रही है। लेकिन निश्चित रूप से आगामी चुनाव में यह संघ दोनों दलों के राजनेताओं पर संकट जरूर डाल सकता है।

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