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सभी किसानों को मिले सिंचाई जल- कलेक्टर

श्री सिंह आज कलेक्ट्रेट में जिलास्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक को संबोधित कर रहें थे। बैठक में मंदसौर के विधायक श्री यशपाल सिंह सिसौदिया, सुवासरा के विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन श्री एसके वाघेला, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, मछलीपालन विभाग के अधिकारी, अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों सहित समिति के अशासकीय सदस्य एवं जिले भर की जल उपभोक्ता संथाओं के अध्यक्षगण एवं अन्य सदस्यगण भी मौजूद थे। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि नागरिकों को पेयजल मुहैया कराना पहली प्राथमिकता हैं। जल उपलब्धता के अनुपात में ही किसानों को सिंचाई हेतु जल दिया जायेगा। इसलिए जिले के सभी जलस्त्रोतों में पर्याप्त मात्रा में जल राशि संग्रहित रहे। उन्होने कहा कि नये निर्वाचन से पहले पुरानी जल उपभोक्ता संथा ही नहरों में जरूरी मरम्मत आदि काम करायें। यह काम 30 अक्टूबर के पहले पूरा हो जाये।
बैठक में बताया गया कि जिले के चंदवासा और हाडाखोह तालाबों में निम्नतम स्तर तक जलभराव हो सका। इस पर मंदसौर विधायक श्री सिसैदिया एवं सुवासरा विधायक श्री डंग ने कहा कि जिले में इस वर्ष प्रचुर मात्रा में वर्षा होने पर भी इन दोनो तालाबों में पानी क्यूं नही भरा। इसकी जांच कराई जाना चाहिये। दोषियों पर कार्यवाही हो। विधायकद्वय ने कहा कि चाहे जैसे भी हो इन दोनो तालाबों को पुर्नजीवित किया जाये। किसानों को अधिक मात्रा में सिंचाईजल मिले, ऐसी व्यवस्था और प्रयास किये जायें।
बैठक में ईई जल संसाधन ने बताया कि मंदसौर जिले के एक वृहद गॉधीसागर जलाशय, एक मध्यम रेतम बैराज एवं 103 लद्यु सिंचाई योजनाएं निर्मित है। इस प्रकार कुल 105 योजनाओं में गांधीसागर जलाशय के अलावा 1बैराज, 81 जलाशय, 7 उद्वहन सिंचाई योजनाएं,12 सॉलिड वियर, पि. अ. वियर एवं 1 डायर्वशन योजना है, जिनकी कुल वार्षिक रूपांकत सिंचाई क्षमता 30025 हेक्टर (4007 हेक्टर खरीफ एवं 26018 हेक्टर रबी) है। जिले की औसत वर्षा 826.50 मि.मी औसत वर्षा हुई थी एवं इस वर्ष जिले में अभी तक 923.80 मि. मी. औसत वर्षा हुई, जो विगत वर्ष से 24 प्रतिशत अधिक है। गॉधीसागर जलाशय से केवल विद्युत उत्पादन होता है। सात उद्वहन सिचाई योजना एवं 2 पिकअप वियर योजना को छोडकर शेष 95 निर्मित योजनाओं की कुल उपयोगी जल सग्रहण क्षमता 150.80 मि.घ.मी. है, जिसके विरूध्द आज की स्थिति में 139.64 मि.घ.मी है, जो कुल उपयोगी क्षमता का 92.60 प्रतिशत अधिक है। शेष 95 योजनाओं में 25.09.2016 तक वर्षा से हुए जलभराव की स्थितिनुसार 74 योजनाएं शत प्र्रतिशत पूर्ण जलस्तर तक, सात योजनाएं 76 प्र्रतिशत से 99 प्र्रतिशत तक, दो योजनाएं 51 प्र्रतिशत से 75 प्र्रतिशत तक, आठ योजनाएं 25 प्र्रतिशत 50 प्र्रतिशत तक, दों योजनाएं 25 प्र्रतिशत तक एवं दो योजनाएं निम्नतम जलस्तर से भी कम जलभराव स्थिति वाली है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिये रबी सिंचाई का लक्ष्य निर्धारण कर लिया गया है। विभाग के अधीन कुल 6 निमज्जित तालाब है, जिनमे वर्षकाल के दौरान संग्रहित जल को निकालने के बाद डूबक्षेत्र में रबी की खेती किसानां द्वारा की जाती है। इन जलाशयों सहित 95 योजनाओं में 139.64 मिलियन क्यू. मीटर पानी संग्रहित हुआ है। इस संग्रह से कुल 30 हजार 73 हेक्टर क्षेत्र में रबी सिंचाई प्रस्तावित की गई है। उन्होने बताया कि बीते वित्त वर्ष 2015-16 के लिये निर्धारित रबी सिचाई का लक्ष्य विगत वर्ष एवं इस वर्ष खरीफ सिचाई के समय वर्षा हो जाने के कारण किसानों द्वारा खरीफ सिचाई हेतु पानी की मांग नही की जाने से खरीफ सिंचाई नही की गई है वर्ष 2015-16 में रबी सिचाई हेतु 26695 हेक्टर लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरूध्द 26707 हेक्टर क्षेत्र में वास्तविक सिंचाई की गई है।
निमज्जित तालाबों के संबंध में चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि जिले में जल संसाधन संभाग के अधीन 6 निमज्जित तालाब हैं, जिन्हें शासन के नियमानुसार वर्षा पश्चात खाली कर दिया जाता है, ताकि किसान अपनी निजी भूमि में नमी का लाभ लेकर रबी की फसल लें सकें। इन जलाशयों में किसानां को उनकी भूमि का मुआवजा नही दिया गया है। ऐसे तालाबों में खोडाना तालाब ढिकोला तालाब, पानपुर तालाब, बडोद तालाब, भरडावदा, हासलीएवं लामगरा तालाब सम्मिलित है। इस वर्ष औसत से अधिक वर्षा होने के कारण इन तालाबों को 31 अक्टूबर 2016 को खाली करने का प्रस्ताव है। निरंतर पेज दो पर

पेयजल हेतु आरक्षण संबंधी विषय पर उन्होने बताया कि पेयजल हेतु इस वर्ष शामगढ नगर हेतु जूनापानी तालाब से 0.28 मि.घ.मी काका साहब गाडगिल सागर से पिपलिया नगर हेतु 1.34 मि.घ.मी, मल्हारगढ नगर हेतु 0.30 मि.घ.मी, नारायणगढ नगर हेतु रेतम बैराज योजना से 0.275 मि.घ.मी भानपुरा नगर हेतु इन्द्रगढ जलाशय से 0.20 मि.घ.मी एवं गरोठ नगर से परासली तालाब से 0.20 मि.घ.मी पानी आरक्षित रखा जाना प्रस्तावित है। विगत वर्ष नगर परिषद मल्हारगढ, नारायणगढ, पिपलियामण्डी द्वारा जलाशयां से जल आरक्षित करवाने के बाद भी इन नगर परिषदों द्वारा जल संसाधन विभाग से अनुबंध नही किया गया। सिंचाई प्रणाली की कमियों को दूर कर पानी के नुकसान में कमी जैसे नगर लाईनिंग, नये स्ट्रेक्चर्स, मिट्टी कार्य, सुधार एवं मरम्मत के बारे में बताया गया कि जिन जलाशयों में नहर निर्मित है, उनमें संथाओं का गठन वर्ष 2011 सितम्बर माह में किया जा चुका है। नहरों का आवश्यक सुधार एवं मरम्मत आदि संस्थाओं के पास उपलब्ध धनराशि विभाग से प्राप्त धनराशि से कराने का प्रस्ताव है। बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों द्वारा पेयजल आरक्षण के संबंध में अपनी बात रखी गई।

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