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सहायक यंत्री के कक्ष में दो ट्यूबलाईट और कूलर 45 मिनिट से अधिक समय तक बेवजह चलते रहे : अपने ही बनाए पोस्टर को नहीं मानते

यह है विद्युत वितरण कम्पनी के अधिकारियों की स्थिति

मंदसौर। सरकार के जनप्रतिनिधि हो या सरकारी अधिकारी हर कोई बिजली बचाने की बात करता है। लेकिन सरकारी अधिकारी ही सर्वाधिक बिजली का अपव्यय करते है। इस कई बार देखने को मिला है। ताजा मामला शनिवार को बीपीएल चौराहे वाले बिजली कम्पनी के कार्यालय की है। जहॉ पर सहायक यंत्री के कक्ष में 45 मिनिट से ज्यादा समय तक दो ट्यूबलाईट व कूलर बेवजह चलता रहा। कक्ष में इस दरमियान कोई अधिकारी या अन्य मौजूद नहीं था। हॉ इस दौरान कम्पनी के अन्य कर्मचारी जरूर दो से तीन बार कक्ष में आए लेकिन देखकर चले गऐ किसी ने भी बेवजह चल रही दो ट्यूबलाईट और कूलर को बंद करने जेहमत नहीं उठाई।

 

45 मिनिट तक हमारी टीम मौजूद रही कम्पनी के कार्यालय में
शनिवार को हमारी टीम 45 मिनिट तक विद्युत कम्पनी के कार्यालय में मौजूद रही और देखती रही कि कोई अधिकारी आता है या कोई कर्मचारी बिजली के अपव्यय को बचाता हे। लेकिन इस दरमियान किसी ने भी बिजली के अपव्यय को रोकने की कोशिश नहीं की।

 

समझदार बड़े पदों पर बैठे अधिकारी ऐसा करते है तो दूसरो का क्या…??
यह वाक्या सहायक यंत्री के कक्ष का है। जब बड़े पदों पर बैठे अधिकारी ऐसा करते है तो दूसरा से क्या उम्मीद कि जाए। लेकिन एक बात यह भी है कि यदि ऐसे अधिकारियों को जेब से बिजली के बिल भरना पडे़ तो उन्हे बिजली की अहमियत समझ में आए। बिजली कम्पनी में इस तरह खुले रूप से बिजली का अपव्यय हो रहा है और फिर कम्पनी आमजन को मोटे मोटे बिजली के बिल थमाकर उसकी भरपाई करती है।

 

कार्यालय में लगा है बिजली बंद करने का पोस्टर
बीपीएल चौराहा स्थित बिजली कम्पनी के कार्यालय में एक पोस्टर भी लगा है। जिस पर लिखा है कि जाते समय लाईट व कम्प्यूटर बंद करके जाए। लेकिन इसे कोई कम्पनी का अधिकारी या कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है।

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