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सांसद सुधीर गुप्ता अफीम नीति में हुए फैल, भूल सुधार के बावजूद भी सांसद जी का इतना स्वागत क्यों ……………?

क्या सांसद जी अपनी पार्टी से जंग जीतकर आयें है ……….?
नीति बनाकर उसमें संसोधन करना भाजपा का नया पब्लिसिटी स्टंट या ज्ञान की कमी!

मंदसौर। फसलों में सर्वाधिक मूल्यवान और हाईवाल्टेज फसल है तो वो है अफीम और देश मेें सर्वाधिक अफीम की खेती मालवा क्षेत्र के मंदसौर नीमच जिले में होती है और दोनो ही जिलों की राजनीति अफीम की खेती के आस पास ही घुमती है। अफीम की खेती और किसान दोनों की एक बडा राजनीतिक मुद्दा रहते है। हाल ही मेें केन्द्र सरकार द्वारा अफीम खेती की नई नीति की घोषणा की गई जिसको लेकर बहुत विरोध हुआ और किसानों के भारी आक्रोश का सामना क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता को झेलना पड़ा और विरोध के बाद दो दिन में सांसद श्री गुप्ता दिल्ली पहुॅच गये और नीति में संसोधन भी करवा लायें।

संसद में अपने भाषणों पर अपनी खुद की पीठ थपथपाने व किसान आंदोलन में किसानो से विदेश नीति की बात करने वाले सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे और समस्या ध्यान ही नहीं रख पाए। यहॉ यह सोचने वाली बात यह है कि जब देश भर में सर्वाधिक अफीम खेती मालवा बेल्ट में होती है तो जब अफीम नीति बनाई जा रही थी तब क्या क्षेत्रीय सांसद के सुझाव नहीं मांगे गये थे और यदि मांगे गये थे तो क्यों क्षेत्रीय सांसद क्षेत्र के अफीम किसानों की बात सरकार तक नहीं पहुॅच पायें। यह क्षेत्रीय सांसद का फैल्यर ही माना जायेगा।

सरकार की नीति में अफीम पट्टे काटने की मंशा पहले से थी, इसमें जान बुझकर किसानों को बरगलाते हुए मार्फिन नीति का सहारा लिया गया, जो आज तक कभी नहीं हुआ| अफीम नीति बनाते समय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता इस मुद्दे का विरोध करते हुए किसान हित में अड़े रहते तो आज क्षेत्र के किसानों के अफीम पट्टे कटने की नोबत नहीं आती। केंद्र में भाजपा सरकार के आने के बाद राज्य में अफीम का रकबा पहले की तुलना में बहुत कम हो गया है, जिससे किसानों को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है।

भूल सुधार में कैसा स्वागत
सांसद श्री गुप्ता को जब अफीम नीति बन रही थी तभी ही सुधार करवाना था। लेकिन श्री गुप्ता ऐसा नहीं करवा पाये और अफीम नीति की घोषणा होने के बाद किसानों का आक्रोश झेलने के बाद दिल्ली गये और अफीम नीति में सुधार करवा लायेे। अब यहॉ यह बात समझ में नहीं आ रही है कि स्वयं की भूल सुधार में करने में ही सांसद जी का इतना स्वागत क्यों किया जा रहा है जैसे सांसद जी देश के दुश्मनो से बॉर्डर पर जंग जीतकर आये हो। जैसा स्वागत सांसद श्री गुप्ता किया जा रहा है ऐसा स्वागत तो भारतीय क्रिकेट टीम कास वर्ल्ड कप जितने के बाद भी नहीं हुआ था। तो यह माना जाये कि भाजपा की राजनीति में भूल सुधार करने पर भी जोरदार स्वागत होता है। जो स्वागत भी किया जा रहा है वो भी केवल बीजेपी के कार्यकर्ताओ द्वारा किया जा रहा है। किसानो द्वारा नहीं …

क्या है पब्लिसीटी स्टंट है
अफीम नीति तो क्षेत्रीर सांसद से पूछकर ही और उनके सुझाव से ही बनाना चाहिए थी लेकिन जो भी हुआ उससे तो यही लगता है कि यह एक पब्लिसिटी स्टंट है। क्योंकि पहले तो कमी वाली नीतियॉ दो जिसका विरोध हो फिर दो दिन में ही उसमें सुधार कर दो और फिर जोरदार स्वागत करके उसकी वाहवाही लूटा यह भाजपा की राजनीति का नया स्टंट ही लगता है।

सोशल मिडिया में हीरों बने सांसद जी
जो कार्य सांसद सुधीर गुप्ता का है उसमें ही वह फैल हुए और आक्रोश के बाद में उसमे सुधार करवाया यहॉ कोई भी कार्य श्री गुप्ता ने ऐसा नहीं किया जो उनके कार्यक्षेत्र के बाहर का था यह सब करना उनका कर्तव्य व फर्ज था क्योंकि इन्हीं कामों के लिये जनता ने उन्हें दिल्ली तक पहुॅचाया है नहीं तो वार्ड की कोई नीति बनाने के लिये हमारे पार्षद ही काफी है। लेकिन सोशल मिडिया पर जिस तरह सांसद श्री गुप्ता को हीरों बनाया जा रहा है उससे तो यह लगता है कि सांसद जी की गिरती टीआरपी से वे स्वयं और उनके प्रशंसक खासे निराश है और कोई मौका हाथ से जाने नहीें देना चाहते है।

 

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