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सांसद सुधीर गुप्ता का फिर फूंका पुतला, मुर्दाबाद के लगाएं नारे

मंदसौर. जिले के सुवासरा के देवरिया विजय गांव में अभी 5 दिन पहले ही मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा था। वही अगले ही दिन एससी- एसटी एक्ट के विरोध में सुवासरा विधानसभा के गोवर्धनपुरा गांव के ग्रामीणों द्वारा सांसद सुधीर गुप्ता सहित भाजपा का विरोध कर सांसद का विरोध स्वरूप पुतला दहन किया था। सोमवार को फिर इसी क्षेत्र के गांव बर्डिया में एससी-एसटी के मुद्दे को लेकर फिर सांसद गुप्ता का पुतला फूंक दिया और सांसद मुर्दाबाद के नारे भी दागे। ग्रामीणों ने कहा कि वे एससी- एसटी एक्ट का विरोध करते हैं और वह भाजपा को वोट नहीं करते हुए नोटा का इस्तेमाल कर वोट देंगे ना वह भाजपा को वोट देंगे ना कांग्रेस को वोट देंगे और नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि उनके गांव में सभी सामान्य वर्ग से आते हैं इसलिए वह एससी-एसटी एक्ट का विरोध करते हैं। इस समय संसद के सदन में विधेयक लाया जा रहा है तो भाजपा के सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा विरोध क्यों नहीं किया गया। इसलिए ग्रामीणों ने सांसद का पुतला दहन किया।

‘प्रधानमंत्री बीमा पॉलिसी से किसान निराश’ 
प्रधानमंत्री फसल बीमा पॉलिसी से किसान निराश है। फसलों पर पीले मोज़ेक वायरस का प्रकोप है। खेतों में फसलें 50 प्रतिशत तक खराब होने की कगार पर है। किन्तु किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं होगी क्योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसलों को वायरस से हुआ नुकसान सूचीबद्ध नहीं है। यह बात युवा कांग्रेस अध्यक्ष सोमिल नाहटा ने ग्राम आकोदड़ा, सेमलिया हीरा, एलची सहित कई ग्रामों में फसलों की नुकसानी का अवलोकन करने के बाद विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र के किसान हताश और निराश है। यह बीमा योजना किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है, इससे किसानों को नहीं बल्कि बीमा कंपनियों को लाभ हो रहा है। उन्होंने किसानों से फसल में ईल्ली के प्रकोप एवं अन्य बीमारियों के संबंध में भी चर्चा की। नाहटा ने फसलों की स्थिति को चिंताजनक मानते हुए इसे मौसम के साथ ही बीमा नियम में असमानता बताया। सौमिल ने कहा कि जिम्मेदार विभागों के अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। किसानों को सही समय पर उचिता सलाह देने में बरती जा रही कोताही का नतीजा है कि किसान फसलों का संकट झेल रहा है और खेतों में 50 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक असमानता एवं मौसम की परिस्थितियों के कारण खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल खराब होने की कगार पर है। खेतों में 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। लेकिनए शासन- प्रशासन का ध्यान इस और कोई ध्यान नहीं है। जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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