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सामाजिक समरसता समाज की पहचान है- प्रमोद झा

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सामाजिक समरसता मंच की पिपलिया मंडी की ईकाइ के तत्वािधान में सामाजिक ऊंच-नीच को दूर करने के उद्देश्यं से सामाजिक सद्भावना बैठक का अयोजन किया गया। जिसमें सभी समाज व वर्ग के लोगों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्यअ वक्ताा के रूप में प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख प्रमोद झा ने भारतीय समाज में व्याप्त कमियों को दूर कर समरस समाज बनाने की बात कही। उनका कहना था कि हिंदू धर्म व भारत में कभी भी जाति-पांती का भेद नहीं रहा है। भारत कर्मप्रधान देश है। जहां कबीर दास, तुलसीदास और व्यास जैसे महान संत हुए हैं। रविदास की शिष्याद मीराबाई थीं। शंकराचार्य जी को चांडाल से परमात्मा का ज्ञान प्राप्त हुआ। भगवान राम जी ने शबरी के झूठे बेर खाए कभी जाति-बिरादरी को लेकर हमारा समाज आपस में लड़ता नहीं है। श्री झा ने इस बात को जोर देकर कहा की जो व्यसक्ति समाज में भेदभाव रखता है उसे राम की भक्ति का अधिकार नहीं है राम के जीवन चरित्र में अनेको स्था न पर आपको जाति भेद को कम करने के उदाहरण देखने को मिलते है जब भगवान ने भेदभाव नहीं किया तो हम कौन होते है भेदभाव करने वाले, ओर अगर आप भेदभाव करते है तो क्या आप राम से बढ़कर हो गए है? समाज से उंच-नीच का भेद समाप्त होना चाहिए। श्री प्रमोद जी ने उक्त बात अपने बोद्धिक में कही।

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