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सावन मास में भक्तो को मिले भगवान श्री पशुपतिनाथजी के जलाभिषेक की अनुमति

मंदसौर। पिछले दिनों भगवान श्री पशुपतिनाथ प्रबंध समिति द्वारा भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतिमा के शरण रोकने के उपायो के तहत प्रतिमा का जलाभिषेक पर प्रतिबंध के अलावा सावन मास में भी इस निर्णय को कठोरता से लागु करने का निर्णय लिया है, यह निर्णय भगवान शिव के सावन मास में होने वाले अनुष्ठान व जलाभिषेक के महत्व को देखते हुये धर्मसंगत नही कहा जा सकता है।

यह बात जिला कांग्रेस मिडीया प्रभारी व सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश भाटी ने एक बयान के माध्यम से अपनी राय प्रकट करते हुये कहा कि प्रबंध समिति मूर्ति का शरण रोकने लिये गये निर्णयो को लागु जरूर करे लेकिन सावन मास में भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व होने से भक्तो को अभिशेक से रोकना उचित कदम नही होगा। श्री भाटी ने कहा कि भगवान श्री पशुपतिनाथ  की प्रतिमा स्थापना के पूर्व शिवना नदी में ही रही लेकिन पानी के कारण उस पर उतना प्रभाव नही पडा लेकिन प्रतिमा का शक्कर, दही व अन्य पदार्थो के साथ अभिशेक के कारण मूर्ति का शरण अधिक हुआ इसे विशेषज्ञ भी इंकार नही कर सकते है। उन्होनें सावन मास में देश के अन्य शिव मंदिरो व शिवलिंगो पर अभिषेक होेने का तर्क देते हुये कहा कि धार्मिक आस्था व सावन मास के धार्मिक महत्व को देखते हुये इस माह में भगवान शिव के जलाभिषेक अनुमति दी जाना चाहिये। श्री भाटी ने भगवान श्री पशुपतिनाथ  प्रबंध समिति के पदाधिकारियो को प्रशासनिक दृष्टीकोण के साथ ही धार्मिक महत्व व आस्था को भी महत्व देने का आग्रह किया  है।

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