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सुरक्षा में बड़ी चूक का भी नतीजा है पुलवामा हमला, जाँच भी हो और कड़ी कार्रवाई भी हो

13 जुलाई, 2018 को अनंतनाग में आतंकियों ने सीआरपीएफ पर आतंकी हमला किया था। हमले में एक अफसर सहित एक जवान शहीद हुए थे। आतंकी सीआरपीएफ जवानों पर फायरिंग कर भागे निकले थे।

आखिरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकी कब तक हमारी सेना के जवानों को मारते रहेंगे, कितनी सरकारें आयीं और गयीं लेकिन इसका कोई स्थाई हल नहीं निकल पाया। कभी पाकिस्तान की सेना संघर्ष विराम का उल्लंघन करती है तो कभी आतंकियों को घुसपैठ कराकर भारतीय सीमा में भेजती है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हमेशा से ही ऐसी घटनाओं को अंजाम देते आ रहे हैं इनका सफाया होना बहुत ही जरूरी है। एक सर्जिकल स्टाइक से कुछ नहीं होगा। आतंकियों का समय-समय पर सफाया होना बहुत जरूरी है, नहीं तो अवंतिपोरा और उरी जैसी घटनाएं होती रहेंगी। लेकिन मानने की बात यह है कि इंटेलीजेंस को इस हमले की खबर ही नहीं लगी। अगर रोड ओपनिंग पार्टी और इंटेलीजेंस नजर रखते तो इस हमले को टाला जा सकता था। ऐसा कैसे हो सकता है कि 78 वाहनों के काफिले से 2500 जवान श्रीनगर आ रहे थे और आरओपी को भनक तक नहीं लगी। यह घटना सोची समझी साजिश नज़र आती है। कहीं न कहीं इसमें कुछ अनसुलझी ताकतें नज़र आती हैं क्योंकि 2500 जवान श्रीनगर आ रहे हैं। यह खबर आतंकियों को कैसे लगी इसमें किसी स्लीपर सेल जैसे लोगों के होने के आशंका लगती है।
जिस प्रकार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अवंतिपोरा में सीआरपीएफ के काफिले को उड़ा दिया। जिसमें लगभग 42 जवान शहीद हुए और 20 से ज्यादा जख्मी हुए। यह बहुत ही दुखद घटना है। सभी जवान छुट्टी बिताकर अपने काम पर वापस लौट रहे थे। इससे पहले भी उरी में 18 सितम्बर 2016 में बड़ी घटना घटी थी इसमें 19 जवान शहीद हुए थे। इसी साल 17 जनवरी 2019 की बात की जाये तो घंटाघर लाल चौक, शोपियां पुलिस कैम्प में तीन ग्रेनेड हमले किए गये थे। इस हमले में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर इकबाल सिंह और दो ट्रैफिक पुलिस कर्मियों सहित छह लोग घायल हुए थे। गणतंत्र दिवस पर भी आतंकियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए कश्मीर में दो जगह हमले किए थे। पहला हमला पुलवामा के पंपोर और दूसरा खानमो इलाके में किया गया था। आतंकियों ने एसओजी और सीआरपीएफ को निशाना बनाया। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने दो आतंकी मार गिराए, हमले में पांच जवान जख्मी भी हुए थे। 30 जनवरी, 2019 को कुलगाम जिले में आतंकियों ने दमहल हांजीपोरा इलाके में पुलिस के एक दल पर ग्रनेड हमला किया। जिसमें तीन नागरिक घायल हुए थे। वहीं 31 जनवरी, 2019 को कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ की 96वीं बटालियन पर हमला किया था। आतंकियों ने हमले में ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था। हमले में दो जवान और पांच नागरिक घायल भी घायल हुए थे।
13 जुलाई, 2018 को अनंतनाग में आतंकियों ने सीआरपीएफ पर आतंकी हमला किया था। हमले में एक अफसर सहित एक जवान शहीद हुए थे। आतंकी सीआरपीएफ जवानों पर फायरिंग कर भागे निकले थे। पांच अक्टूबर, 2018 को श्रीनगर के करफल्ली मुहल्ला में आतंकियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक शमीमा फिरदौस के निजी सचिव नज़ीर अहमद सहित एक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 26 अक्टूबर, 2018 को नौगाम में आतंकियों ने सीआईएसएफ के जवानों को निशाना बनाते हुए ग्रेनेड हमला किया था। इसमें एएसआई राजेश कुमार शहीद हो गये थे।
अगर हम पिछली घटनाओं की बात करें तो 25 जून 2016 को पंपोर के पास सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने हमला बोला था। इसमें आठ जवान शहीद हुए थे जबकि 20 घायल हुए थे। 2 जनवरी 2016 को पठानकोट स्थित एयरबेस में आतंकियों ने हमला बोला। करीब 17 घंटों तक चले ऑपरेशन में सात जवान शहीद हुए थे। इसमें छह आत्मघाती हमलावर मारे गए थे। वहीं 7 दिसंबर 2015 में अनंतनाग जिले में सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया था। इसमें छह जवान घायल हुए थे। 27 जुलाई 2015 को तीन आतंकियों ने पंजाब के दीनानगर में एक बस पर हमला बोला था और फिर पुलिस स्टेशन पर धावा बोला। मुठभेड़ में एक एसपी समेत सात लोग मारे गए थे। 31 मई 2015 को कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में स्थित सेना के हेडक्वार्टर पर आतंकियों ने हमला बोला था जिसमें सेना ने छह में से चार आतंकियों को मार गिराया था। 21 मार्च 2015 को सांबा जिले में जम्मू-पठानकोट हाइवे पर सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले में दो आतंकी मारे गए थे। हमले में सेना के एक अधिकारी, एक जवान और एक आम नागरिक को चोटें आई थीं। 20 मार्च 2015 को कठुआ जिले में एक पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती हमलावरों ने हमला बोला था। जिसमें तीन जवान और दो आम नागरिक मारे गए थे। इसमें तीन आतंकी भी मारे गए।
अगर 2014 की बात करें तो 5 दिसंबर 2014 को बारामूला जिले के उरी सेक्टर में सेना के रेजिमेंट हथियार कैंप पर आतंकियों के समूह ने हमला बोला था। हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और जवानों के अलावा एक एएसआई और दो कॉन्स्टेबल शहीद हुए थे। 27 नवंबर 2014 को जम्मू जिले के अर्निया सेक्टर में बॉर्डर से सटे एक गांव में आतंकियों ने हमला बोला था। हमले में तीन जवान शहीद हुए थे और चार नागरिक भी मारे गए थे।
इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं क्योंकि जब उरी में आतंकी हमला हुआ था तब भी प्रधामंत्री, गृहमंत्री, अजीत डोभाल व सेना के अधिकारियों साथ बैठक कर सर्जिकल स्ट्राइक पर निर्णय लिया था। वहीं विदेश राज्य मंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह इस घटना के बाद कड़ी प्रतिक्रिया जताई और बदला लेने का जिक्र भी किया, जिससे साफ नज़र आ रहा है कि आतंकियों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जायेगी।

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