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सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दण्ड का भागी वह अधिकारी होगा जिसके नियंत्रण में सूचना होगी

लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्पन्न

मंदसौर। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के सदस्य हीरालाल त्रिवेदी की अध्यक्षता में जिला पंचायत के सभाकक्ष में स्थानीय लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की प्रशिक्षण एवं वर्कशॉप कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह, सभी अनुविभागीय अधिकारी, सभी कार्यालयों के लोक सूचना अधिकारी सहित सभी जिलाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

राज्य सूचना आयोग के सदस्य श्री त्रिवेदी द्वारा सभी लोक सूचना अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम की जानकारी देते हुये बताया कि अगर कोई व्यक्ति जानकारी मांगता है और उस व्यक्ति को जानकारी अधिनियम द्वारा जानकारी देने की जो अवधि निर्धारित की गई उस अवधि में नही दी जाती है। तो जिसके नियंत्रण में वह सूचना है वह अधिकारी दण्ड का भागी होगा। सूचना देने का काम सभी विभागो में लोक सूचना अधिकारी द्वारा किया जाता है। जहा पर लोक सूचना अधिकारी नहीं है या उसका सहायक है उसे सूचना अधिकारी माना जायेगा। लोक प्राधिकारी के अर्न्तगत आने वाले जितने भी कार्यालय एवं उनमें संग्रहित सूचना को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना माना जायेगा। सूचना के बारे में जानकारी लेने का अधिकार भारत के प्रत्येक नागरीक को है। वह एक विभाग से प्रत्येक सूचना के लिये अलग-अलग आवेदन देकर जनहित में सूचना प्राप्त कर सकता है। अधिनियम के लागू होने के चार माह पश्चात विभाग की जानकारी की सूचना वेबसाईट पर अपलोड कर दी जाती है सभी विभागों को यह प्रयास करना चाहिए की अधिक से अधिक सूचना पोर्टल पर ऑनलाईन हो सके जिससे आम नागरिक विभाग की सूचना के बारे में जान सके। विभागों को हर वर्ष ऑनलाईन डाटा अपडेट करना चाहिए जिससे आम नागरीक को गलत जानकारी न मिले। अगर कीसी व्यक्ति के द्वारा सूचना मांगी जाती है और सूचना अस्पष्ट है तो संबंधित व्यक्ति को बुलाकर सूचना के बारे में यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति के द्वारा किस विषय की जानकारी मांगी गई है जिससे जानकारी देने में आसानी हो जाती है। जानकारी देने में किसी विभाग को ला परवाही नही करनी चाहिए। अधिनियम के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति सूचना मांगता है। और वह व्यक्ति उस सूचना, गांव एवं जनहित से संबंधित नहीं हो तो उसे सूचना देने से मना किया जा सकता है। लोक सूचना अधिकारी अपने विभाग से संबंधित सूचना ही दे सकता है। अगर अपनी विभाग से संबंधित सूचना नही है तो वह अन्य विभाग को आदेशित नही कर सकता हैं और इसके लिये आवेदक को संबंधित विभाग में जाकर ही आवेदन करे। सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत देश की एकता और अखण्डता, सुरक्षा, विदेश निती, विधानसभा के विशेषाधिकार उल्लंघन जैसे मामलो में सूचना प्रदान नहीं की जा सकती। निजता के अधिकार के अन्तर्गत अगर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी सूचना के रूप में मांगी जाती है। ऐसी स्थिती में संबंधित अधिकारी या व्यक्ति के निजी डाक्युमेंट अगर पब्लिक फार्म पर ओपन हो जाते है जैसे अगर कोई व्यक्ति संघ लोक सेवा आयोग या राज्य सेवा आयोग के समक्ष अपने निजी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करता है और साक्षात्कार के पश्चात सरकारी सेवा में आता है तो उसके प्रमाण-पत्र पब्लिक डाक्युमेंट बन जाते है। इस तरह ऐसे डाक्युमेंट या व्यक्तिगत जानकारी लेने का अधिकार जनता को है।

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