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सेंट थॉमस स्कूल बस से निकला धुआं…. एक बड़ी घटना होते होते टली….

मंदसौर। मंदसौर मे भी इंदौर हादसे के बाद भी परिवहन विभाग एक दिन जांच कर सो गया। इसी कारण बड़ी लापरवाही शुक्रवार को उजागर हो गई। दोपहर में सेंट थॉमस स्कूल के बच्चों को छोड़ने जा रही स्कूल बस में शहीद ऊधमसिंह चौराहे के पास वायरिंग में फाल्ट हो गया। आग लगने से धुआं निकलता देख आसपास मौजूद लोगों ने बच्चों को बस से उतारा। हालांकि बड़ा हादसा होने से बच गया। परिवहन विभाग के पोर्टल पर बस का फिटनेस जुलाई 2015 तक का ही दिखा रहा था। जबकि परिवहन अधिकारी ने बस का फिटनेस निरस्त करते हुए आदेश में बताया कि फिटनेस जुलाई 18 तक का है। अब वह पोर्टल पर शो क्यों नहीं हो रहा था, इसका उनके पास भी कोई जवाब नहीं है।

सेंट थॉमस स्कूल से बच्चो को घर छोडऩे के लिए एक स्कूल बस दोपहर करीब २ बजे स्कूल  (एमपी 09 एस- 9528) से निकली। बस जैसे ही शहर के बीपीएल चौराहे क्षेत्र में पहुंची। यहां बस में से धुआं निकलने लगा, इस पर चालक ने बस रोक दी। बस में धुआं निकलते देख लोगों व आसपास के दुकानदारों ने बस की ओर दौड़ लगा दी और सभी बच्चों को तुरंत बस से बाहर निकाला। बस की वायरिंग में फॉल्ट होने से वायरिंग जल गई थी। हालांकि बस में आग बढऩे से पहले ही लोगों ने पानी डालकर स्थिति पर नियंत्रण कर लिया। घटना के बाद पुलिस, यातायात विभाग, शिक्षा विभाग व परिवहन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बस के दस्तावेज जांचे। इसके बाद परिवहन विभाग ने बस का फिटनेस निरस्त कर दिया। पुलिस ने बस जब्त कर ली। इस दौरान बच्चों को अन्य वाहनों से घर भेजा गया।

स्कूल को नहीं पता किस क्षेत्र में चलती है बस

सेंट थॉमस स्कूल में चलने वाले वाहनों का स्कूल से अनुबंध नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन वाहनों पर ध्यान नहीं देता है। सभी अभिभावकों को अपनी रिस्क पर ही बच्चों को स्कूल भेजने की व्यवस्था करना है। शहर में सबसे ज्यादा छात्र संख्या वाला स्कूल होने से यहां लगभग 200 ऑटो, टेम्पो, मैजिक व स्कूल बसों से बच्चे आते-जाते हैं। स्कूल की पीआरओ संगीता रावत का कहना है कि अभिभावक अपनी मर्जी से ही तय वाहनों में बच्चों को भेजते हैं। शुक्रवार को जिस बस में हादसा हुआ, उसमें बैठे बच्चे किस क्षेत्र के थे और बस नगर के किन क्षेत्रों में चलती है, यह भी स्कूल को नहीं पता।

एक दिन कार्रवाई कर सो गया परिवहन विभाग

इंदौर हादसे के बाद मंदसौर में परिवहन विभाग ने ऊपरी आदेशों की पूर्ति के लिए महज एक दिन स्कूली वाहनों को जांच की और फिर देखा तक नहीं। एक दिन की कार्यवाही में परिवहन विभाग ने 20 वाहनों की जांच की थी, 4 बसों में कमियां पाई गई थीं। उसके बाद परिवहन अधिकारी ने कार्यवाही नहीं की, जिसके कारण बच्चों की सुरक्षा पर खतरा खत्म नहीं हुआ। खामियाजा शुक्रवार को हुए हादसे के रूप में सामने आया है। शहर के स्कूलों में 400 से अधिक वाहन चल रहे हैं।

शाम को सेंट थॉमस स्कूल पहुंची परिवहन अधिकारी

स्कूली बस में वायर जलने के दो घंटे बाद जिला परिवहन अधिकारी रंजनासिंह कुशवाह सेंट थॉमस स्कूल पहुंची। यहां पर स्कूल स्टॉफ से चर्चा की एवं शाम को स्कूली बच्चों की छुट्टी के दौरान परिसर में ऑटो, मैजिक के कागजात चेक कर क्षमता अनुसार ही बच्चों को बैठाकर रवाना कराया।

बस का फिटनेस निरस्त

हादसे के बाद परिवहन अधिकारी ने बस (एमपी 09 एस- 9528) को संचालन युक्त नहीं मानते हुए मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 56(4) के तहत बस का फिटनेस निरस्त कर दिया। आदेश पत्र में लिखा है कि उक्त बस की फिटनेस अवधि 24 जुलाई 2018 है। जबकि पोर्टल पर बस का फिटनेस 27 जुलाई 2015 को ही समाप्त हो चुकी है। बस का रजिस्ट्रेशन 23 सीटर का है फिर भी उसमें लगभग 40 बच्चे सवार थे।

न फिटनेस न बीमा

परमिट-28 फरवरी 2018 तक है।

फिटनेस-24 जुलाई 2015 को ही समाप्त हो गया।

बीमा-27 अप्रेल 2013 तक का ही था।

(स्रोतः परिवहन विभाग के पोर्टल पर स्कूल बस एमपी 09-एस-9528 की जानकारी)

वाहनों को देखते हैं

स्कूल का कोई भी वाहन नहीं है। पालकों को जो अच्छा लगता है, उसमें अपने बच्चों को भेजते हैं। बस में वायरिंग में फाल्ट हुआ था, बच्चों को कुछ नहीं हुआ, मैं स्वयं मौके पर पहुंची थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन चालकों को समय-समय पर नियमों के संबंध में बताते है। बस जोशीजी की थी। बस का रूट नहीं पता।-संगीतासिंह रावत, पीआरओ, सेंट थॉमस सीनियर सेकंडरी स्कूल

हादसे का शिकार हुई बस में तकनीकी खामियां मिली हैं। इस कारण वायरिंग जली थी। बच्चे सभी सुरक्षित हैं। बस का फिटनेस निरस्त किया गया है। पोर्टल अपडेट नहीं होने के कारण फिटनेस की तारीख अलग-अलग है। स्कूल पहुंचकर संचालकों को हिदायत दी गई है कि वे वाहनों में सभी नियम पूरे कराएं। इसमें स्कूल की जिम्मेदारी है कि वे वाहनों में बच्चों की सुरक्षा करें। लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को 40 स्कूली बसों की जांच की गई है, जिसमें 11 बसों में कमियां पाई जाने पर कार्रवाई की गई है।- रंजनासिंह कुशवाह, जिला परिवहन अधिकारी, मंदसौर

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