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सोयाबीन किसानों के लिए उपयोगी सलाह

सोयाबिन

कृषि: जिले में सोयाबीन की खेती किये जाने वाले क्षेत्रों में कम समय में पकने वाली प्रजातियों की फलियों में दाना भरने की स्थिति में देखी जा रही है। इस संबंध में उप संचालक कृषि, द्वारा जिले के किसानों को उपयोगी सलाह जारी की गई है। जारी सामयिक सलाह में कहा गया है कि सोयाबीन की फसल पर लाल मकड़ी का प्रकोप होने पर इसके नियंत्रण हेतु फॉसमाईट (1.5 ली./हे.) का छिड़काव करें। सोयाबीन की जिन किस्मों में अभी दाना पूरी तरह विकसित नहीं हुआ हो, वहाँ सेमीलूपर के प्रकोप से पत्तियों की क्षति रोकने के लिये क्विनालफॉस (1.5 ली/हे.) अथवा इन्डोक्साकार्ब (500 मि.ली./हे.) का छिड़काव करें। अधिक समय तक सूखा होने की स्थिति कृषकों को सलाह है कि आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। इसी प्रकार अधिक वर्षा की स्थिति में अपने खेतों से अतिरिक्त पानी के निकासी की व्यवस्था करें। सफेद मक्खी एवं गर्डल बीटल के सामूहिक प्रकोप की दशा में पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लूथ्रीन+इमिडाक्लोप्रीड का 350 मि.ली./हे. की दर से छिड़काव करें। चक्रभृंग (गर्डल बीटल) के नियंत्रण हेतु ट्रायजोफॉस (800 मि.ली./हे.) अथवा थायक्लोप्रीड (650 मि.ली./हे.) का छिड़काव करें तथा ग्रति पौध अवशेषों को प्रारंभिक अवस्था में ही तोड़कर निष्कासित करें। सोयाबीन की फसल पर पत्ती धब्बा नामक बीमारी दिखाई दें या पत्तियों की नोक की तरफ से झुलसी हुई प्रतीत होने पर कार्बेन्डाजिम (250 ग्रा/हे.) या थायोफिनेट मिथाईल (500 ग्रा./हे.) का 500 लीटर पानी के साथ छिड़ाकाव करें। सोयाबीन पौधों के तनों/डंठलों पर काले रंग के अनियमित आकार क धब्बे दिखाई देने एवं पौधों के सबसे ऊपर वाली तीसरी पत्ती उलटकर पलटी हुई दिखाई देने पर (एन्थ्रेकनोज/पॉड ब्लाईट बीमारी) बीनोमिल (बेनलेट) (500 ग्रा./हे.) या थायोफिनेट मिथाईल (500 ग्रा./हे.) या टेब्युकोनाजोल 250 ई.सी. (625 मि.ली./हे.) का छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में पीला मोजाइक बीमारी के फैलाव को रोकने हेतु ग्रसित पौधे दिखने पर उन्हें तुरंत उखाड़कर नष्ट करें। इस बारे में अधिक जानकारी के लिये कार्यालय उप संचालक कृषि, मन्दसौर एवं विकासखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।

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