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सौ फिसदी एफ.डी.आई. की मंजूरी भारत की अर्थव्यवस्था चौपट ना कर दे

मन्दसौर। समाजसेवी कमल कोठारी ने बताया कि पिछले दिनों श्री नरेन्द्र मोदी मंत्रीमण्डल ने एकल खुदरा व्यापार में एफडीआई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भारत में 100 फीसदी निवेश को मंजूरी दे दी। 100 फिसदी खुदरा व्यापार की विदेशी संस्थानों को छूट देने से भारत में विदेशी निवेश बढ़ने से बड़े-बड़े शापिंग मॉल खुलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। विदेशी संस्थानों के भारतीय बाजार में कदम रखने से छोटे व्यापारी दुकानदारों पर इसका प्रतिकुल प्रभाव देखनेे को मिल सकता है। छोटे-मोटे कारोबारियों का धन्धा चौपट हो जायेगा या ये कहा जाय कि बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को निगल जायेगी। छोटी औद्योगिक इकाईयों पर संकट के बादल खड़े हो रहे है। जिससे बेरोजगारी जैसी विकराल समस्या से भी जुझना पड़ सकता है। हमारे देश की आर्थिक रीढ़ की हड्डी, जीडीपी ग्रोथ का कम होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं।  श्री कोठारी ने कहा कि 2004 से लेकर 2014 तक केन्द्र में यूपीए/मनमोहनसिंह की सरकार रही है। यू.पी.ए. सरकार ने 49 प्रतिशत एफ.डी.आई. देश में लागू करने का मसौदा तैयार किया था लेकिन विपक्षी ने एफ.डी.आई. को लागु करने की सिफारिशों को जनविरोधी नीति करार देते हुए इसका पुरजोर देश में विरोध किया था। बाद में इसे यू.पी.ए. सरकार ने स्थगित कर दिया। स्वदेशी जागरण मंच ने भी एफ.डी.आई. का विरोध कर स्वदेशी अपनाओं देश बचाओं का नारा देकर एफ.डी.आई. के खतरों से सरकार का तख्ता पलट होने के बाद भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और सरकार ने आते ही साढ़े तीन साल बाद एफ.डी.आई. को मंजूरी दे दी। एफ.डी.आई. की खुली छूट देश की अर्थव्यवस्था को चौंपट ना कर दें। आजादी के पूर्व हमारे देश में विदेशी वस्तुओं की होली जलाई गई थी। सरकार को एफ.डी.आई. में विदेशी निवेश की पुनः समीक्षा कर इसको जनहितेषी बनाना होगा। जिससे छोटे व्यापारी के साथ कुठाराघात ना हो।

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