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स्वाइन फ्लू आदि समस्त फीवर (बुखार) से बचाती है गिलोय (अमृता) बंूटी- योग भी होगा सहायक

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मन्दसौर। मन्दसौर, पड़ोसी जिला नीमच, राजस्थान में स्वाइन फ्लू बुखार के प्रकोप तथा बुखार से मौत के समाचार मिले है। बरसात में मौसम के परिवर्तन से कार्तिक मास तक स्वाइनफ्लू आदि बुखार प्रभावी हो जाते है। इनसे बचने की अचूक औषधी गिलोय बूंटी जिसे अमृता भी कहा जाता है।  उक्त जानकारी देते हुए पतंजली योग संगठन जिलाध्यक्ष बंशीलाल टांक ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ती यदि प्रतिदिन अथवा सप्ताह में एक बार भी प्रातः खाली पेट छः इंच लम्बी तथा आकार में ऊँगली जैसी मोटी ताजा गिलोय की डण्डी चबाकर उसका रस निगल लिया जाये तो फिर स्वाईनफ्लू डेंगू आदि कोई भी बुखार हावी नहीं हो सकेगा और यदि बुखार आ रहा है तो ऐसी अवस्था में गिलोय घनवटी अथवा गिलोय काड़ा का प्रयोग किया जा सकता है। गिलोय काड़ा में ज्वर नाशक तथा सर्वकल्प काड़ा तीनों का मिश्रण कर उबालकर काम में लिया जा सकता है।  नीम के समान गिलोय कड़वी होती है, इसलिये बच्चे अथवा जो कड़वाहट से परहेज करते है वे गिलोय घनबट्टी का उपयोग कर सकते है। गिलोय को देहात में गुड़बेल कहा जाता है। सांप के काटने पर जहर उतारने के लिये इसको पिलाया जाता है। पान के पत्ते के समान दिखने वाली यह बेल सर्वत्र उपलब्ध है। घर-आंगन, छत पर इसे गमले में भी लगा सकते है। जैसा कि इसका अमृता नाम है साधारण दिखने वाली यह औषधी बुंखार के लिये रामबाण के समान अमृत का काम करती है। स्वाईनफ्लू, मलेरिया आदि बुखार से बचने के लिये इसका उपयोग अवश्य करना चाहिये।  बुखार तथा अन्य रोगो से बचने के लिये योग भी परम् सहायक सिद्ध माना गया है। योग में विशेष रूप से कपालभाती, अनुलोम-विलोम प्राणायाम का जो बिना रूके (विदाउट ब्रेक) कम से कम दस-दस मिनिट दोनों का अभ्यास करता रहता है उसे सर्दी जुकाम, बुखार जैसी साधारण बिमारीयां तो होगी नहीं परन्तु डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, हृदयाघात यहां तक कि केंसर जैसी बिमारीयों से भी बचा रहा जा सकता है।  कपालभाती प्राणायाम महिलाओं को जब वै गर्भवती हो तथा मासिक धर्म के दिनों में नहीं करना चाहिये। लीवर का ऑपरेशन होने पर पर भी कपालभाती नहीं करना चाहिये परन्तु अनुलोम-विलोम प्राणायाम मासिक धर्म तथा गर्भधारण अवस्था में भी किया जा सकता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम के नियमित अभ्यास से माँ-बहने अनियमित मासिक धर्म आदि परेशानियों से जहां बचेगी वहीं गर्भवती महिलाएं यदि नियमित अनुलोम-विलोम प्राणायाम करती है तो जो भी संतान बालक-बालिका होगी वह स्वस्थ, सुन्दर तथा स्मार्ट होगी। बंशीलाल टांकमो.नं.ः 7697872264

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