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स्व. महेन्द्रसिंह का निधन कांग्रेस के लिये अपूरणीय क्षति : श्री कालूखेड़ा अर्जुनसिंहजी व माधवरावजी के मध्य सेतु थे

(विक्रम विद्यार्थी की कलम से)  वरिष्ठ विधायक, पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री श्री महेन्द्रसिंह कालूखेड़ा के निधन से मध्यप्रदेश में तथा विशेषकर मंदसौर-गुना संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की अपूरणीय क्षति हुई है। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता श्री अर्जुनसिंह एवं माधवरावजी सिंधिया के मध्य सेतु का कार्य करते थे। वरिष्ठ सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के उन्हें राजनीतिक गुरू कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
उनमें राजनेता होने के जो गुण होते हैं, वे सभी मौजूद थे। सदाबहार, निराभिमानी, सहज, सरल व्यक्तित्व के धनी थे। उनके चेहरे पर सदैव मुस्कराहट रहती थी। अपनों तथा परायों से वे मिलकर खुश होते थे। सुख-दुख में जनता एवं कार्यकर्ता के बीच पहुंचना उनका शगल था। वे सदैव सभी की मदद के लिये तत्पर रहते थे। घमंड, अभिमान उन्हें छू नहीं पाया था। जनता तथा कार्यकर्ता भी उनके दीवाने थे। एक बार सांसद, छः बार विधायक रहना इसी कारण हो सका है। यह रिकार्ड मंदसौर संसदीय क्षेत्र में किसी भी कांग्रेस नेता का अब तक नहीं बन सका है। दुग्ध संघ, गृह निर्माण मण्डल, मंत्री रहते उन्होंने हर क्षेत्र नाप रखा था।
पहले तथा अब जब कांग्रेस सत्ता में नहीं है उन्होंने जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाने, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मनोबल बढ़ाने के लिये गांव-गांव दौरा किया।
श्री कालूखेड़ा के निधन पर वरिष्ठ नेता सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की टिप्पणी सहज थी कि वे नेता के साथ मेरे परिजन भी थे। यह भी सत्य है कि श्री कालूखेड़ा के निधन से श्री सिंधिया का सपना टूट गया। जिनके भरोसे उन्हें वर्ष 2018 की विधानसभा यात्रा पूरी करनी थी। उनकी पूर्ति दूसरा नेता कदापि नहीं कर सकता। गौरतलब है कि वर्ष 1993 में जावरा के तत्कालीन विधायक एवं पूर्व गृहमंत्री श्री भारतसिंह जावरा ने विधानसभा चुनाव के समय उनकी बेटी के विवाह के कारण श्री कालूखेड़ा से जावरा से चुनाव लड़ने का आग्रह किया। उन्हें जिताने में मदद की। लोकसभा के लिये मंदसौर से चार सदस्य अब तक चुने गए। जिनमें डॉ. कैलाशनाथ काटजू, माणकलाल अग्रवाल, बालकवि बैरागी एवं सुश्री मीनाक्षी नटराजन, संयोग से श्री कालूखेड़ा मात्र 7 हजार मतों से हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी थे।
अंतिम दौरे में मंदसौर में कुछ समय के लिये श्री कालूखेड़ा इस संवाददाता के निवास पर भी आए। उस समय इंटक के जिलाध्यक्ष श्री राधेश्याम पंडित, वरिष्ठ नेता श्री गोपाल गुरू भी थे। इस दौरान कांग्रेस संगठन एवं अन्य मुद्दों पर आत्मीय चर्चा हुई। यह मुलाकात सभी के जेहन में यादगार बन गई। संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूत करना है तो श्री कालूखेड़ा के सद्गुणों को नेताओं को अंगीकार करना होगा। उनके चरणों में श्रद्धांजलि।
विक्रम विद्यार्थी
श्री कालूखेड़ा, कर्मशील, दुर्लभ एवं लोकप्रिय नेता थे- पंडित
मन्दसौर। पूर्व मंत्री एवं सांसद तथा वरिष्ठ विधायक श्री महेन्द्रसिंह कालूखेड़ा कर्मशील, दुर्लभ एवं लोकप्रिय नेता थे। इंटक के प्रति उनका विशेष लगाव था।
ये उद्गार इंटक के जिलाध्यक्ष श्री राधेश्याम पंडित ने व्यक्त किए। वे श्रम शिविर में श्री कालूखेड़ा के निधन पर इंटक की जिला कार्यकारिणी एवं कार्यकर्ताओं की आपात बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्री कालूखेड़ा गरीबों, सर्वहारा वर्ग के हितैषी थे तथा उनकी मदद के लिये सदैव तत्पर रहते थे। गरीबों का भी उनके प्रति विश्वास था। श्री पंडित ने कहा कि श्री कालूखेड़ा ने इंटक की हमेशा मदद की।
गांधी स्मारक श्रमिक ट्रस्ट अध्यक्ष श्री त्रिवेद पाटीदार, जिला इंटक उपाध्यक्षद्वय श्री खूबचंद शर्मा, श्री विक्रम विद्यार्थी, श्री गोपाल गुरू, श्री सौभाग्यमल जैन, श्री झमक सांखला, श्री सुरेन्द्र कुमावत, श्री श्याम बैरागी, जिला इंटक महामंत्री श्री डी.एस. चन्द्रावत, श्री सुनील गुप्ता, श्री वीरेन्द्र पंडित, श्री जगदीश पाटीदार, श्री सत्यनारायण कुमावत, श्री सत्यनारायण मालवीय, श्री प्रेम पाटीदार, श्री जगदीश पुचेरिया, श्री रविन्द्र व्यास, श्री मनोज व्यास, श्री तरूण शर्मा, श्री नन्दलाल परमार, श्री बाबूलाल जेठानिया आदि ने श्री कालूखेड़ा की दीर्घकालीन सेवाओं का स्मरण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की एवं गहरा शोक प्रकट किया।

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