Breaking News

हर्षोउल्लास के साथ मनाया भगतसिंह का जन्मोत्सव

मंदसौर – भारत माता की रक्षा के लिए भगतसिंह जैसे युवा व्यक्तित्व के धनी हंसते -हंसते फांसी के फन्दे पर झूल गये। 1857 से स्वतंत्रता का संग्राम शुरू होता है और लम्बे अंतराल बाद भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू व चन्द्रशेखर आजार जैसे क्रंातिकारी देश के लिए अंग्रेजो से लोहा लेते हुए जंग में कूद पड़े। शहीद भगतसिंह की तीन पिढि़या देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे चुकी थी फिर भला भगतसिंह कैसे पीछे रहते। इन्कलाब का नारा लगाते हुए वह भी देश के लिए कुर्बान हो गये और फांसी का फन्दा चुन लिया। उक्त बात वरिष्ठ समाजसेवी पूर्व पत्रकार प्रदीप शर्मा ने शहीद भगतसिंह के जन्मोत्सव के अवसर पर दशपुर जागृति संगठन तथा दैनिक मंदसौर जनसुनवई समाचार पत्र के संयुक्त तत्वाधान में गांधी चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं। मंदसौर जनसुनवाई के संपादक शेख जाफर शेख ने कहा कि हमे राष्ट्र को कमजोर नही होने देना है। भारतवासी के लिए राष्ट्र सर्वोपरी है। किन्तु आजादी के बाद हम जातियों में बट गयें है। हमे एकजुट होकर देश पर आने वाले किसी भी संकट का मुकाबला कर एकता का परिचय देना है। इस अवसर पर योग गुरू सुरेन्द्र जैन, पूर्व शिक्षक अजीज उल्ला खां, संगठन की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष श्रीमती प्रेमलता मिण्डा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के पूर्व में अतिथियों द्वारा भगतसिंह की चित्र पर माल्यार्पण कर द्वीप प्रज्जवलित किया। अतिथियों का स्वागत संगठन के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र पुराणिक ,संयोजक सत्येन्द्र सिंह सोम, हरिनारायण टेलर, महेश शर्मा, गुणवन्त कोठारी, परामर्शदाता सुनिल बंसल, बन्दना भावसार, अरूण गौड़ आदि ने किया। अंत में सत्येन्द्र सोम ने राष्ट्रपति के नाम पत्र का वाचन किया गया जिसमें मांग की गई कि भगतसिंह को भारत रत्न प्रदान किया जाए। कार्यक्रम का संचालन आशीष बंसल ने किया आभार डॉ. देवेन्द्र पुराणिक ने माना।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts