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हिन्दी साहित्य संस्थान द्वारा संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न

हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित करने में गांधीजी का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा

मन्दसौर। हिन्दी साहित्य संस्थान द्वारा महात्मा गांधी के 150वे जन्म वर्ष के आयोजनों के अन्तर्गत ‘‘महात्मा गांधी का राष्ट्र भाषा के उन्नयन में योगदान’’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में वरिष्ठ साहित्यकार पं. रामगोपाल शर्मा ‘बाल’ ने कहा कि हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित करने में महात्मा गांधी का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। गांधीजी की मातृभाषा गुजराती थी किन्तु उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का आधार हिन्दी को बनाया, विभिन्न आयोजनों में हिन्दी का प्रयोग शुरू किया तथा हिन्दी भाषा में लेखन और अभिव्यक्ति स्वयं की और अन्य लोगों को प्रेरित किया।

श्री रातडि़या ने कहा कि हिन्दी भाषा भारत की जनता की स्वाभाविक अभिव्यक्ति एवं संवाद का माध्यम है। हिन्दी के प्रति हिनता का बोध इसकी प्रगति में बाधक है। शासकीय न्यायालयीन एवं विधायी कार्य में हिन्दी का प्रयोग आवश्यक है। हिन्दी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष कृष्णकुमार जोशी ने कहा कि हिन्दी भाषा के उन्नयन के बिना सच्चे स्वराज्य की कल्पना  निरर्थक है।

सुनील कुमार बड़ोदिया, श्याम चौबे, भगवतीप्रसाद गेहलोद, रमेशचन्द्र जैन एवं कृष्णगोपाल शर्मा ने अपने विचार एवं रचनाएं प्रस्तुत की। संचालन हिन्दी साहित्य संस्थान के सचिव श्री योगेन्द्र जोशी एवं आभार प्रदर्शन श्री निरंजन भारद्वाज ने व्यक्त किया।  इस अवसर पर भेरूलाल पटेल, नरेन्द्रसिंह राणावत, प्रकाश कल्याणी, सागरमल मेहता, श्री सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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