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हिन्दू संगठनों के कारण आज कमजोर वर्ग के लोग भी ले पा रहे है आधुनिक गरबों का आनन्द : प्रोफेशनल गरबों से दूषित हो रहा था धार्मिक आयोजन

मंदसौर। विगत् कई वर्षो से मंदसौर नगर में भी महानगरांे की तर्ज पर प्रोफेशनल गरबो का दौर शुरू हो गया था। विगत् चार वर्षो से तो नगर में पॉच से छः स्थानों पर प्रोफेशलन गरबे आयोजित किये जाने लगे। जहॉ प्रवेश शुल्क 20 से लेकर 100 रू तक वसूल किया जाता था। ऐसे में कमजोर व निर्धन परिवार के लोग ऐसे गरबों को आनन्द नहीं ले पाते थे और समाज में भेदभाव का वातावरण पैदा हो रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर माता पिता अपने बच्चों के प्रश्नों का उत्तर नही दे पाते थे। इन सबके साथ साथ ऐसे गरबों को डांडिया नाम देकर फिल्मी गीतों पर डांडिया करवाया जाता था जो सीधे सीधे भारतीय संस्कृति का परिहास था।

ऐसे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं संघ के सहयोगी संगठन लगातार ऐसे गरबों का आयोजनों का विरोध करते रहे। विरोध इस वर्ष पूरी तरह सफल भी रहा नगर के अलग अलग हिन्दू संगठनोें ने लगातार नगर के जिम्मेदार वर्ग को गरबों को लेकर ज्ञापन सौंपे जिससे इस वर्ष नगर में एक भी प्रोफेशनल गरबा आयोजित नहीं करवाया गया। चूॅकि इस बार प्रोफेशनल गरबों आयोजित नहीं हो पायें तो वहॉ पर गरबो करने वाली टीमें इस बार सार्वजनिक गरबों में अपनी प्रस्तुति दे रही है जहॉ उनकी गरबा कला को हजारों लोग देखकर सराहना कर रहे है और हर वर्ग हिन्दू संगठनों की तारीफ कर रहा है कि ऐसेे संगठनों की वजह से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हुई है जो शहर के लिये एक अच्छा शकुन है। यही ही नहीं प्रोफेशनल गरबांे के कारण धार्मिक वातावरण दूषित हो रहा था। अब वह माता रानी की वास्तविक आराधना में परिलक्षित हो रहा है।

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