Breaking News

हॉकी मंदसौर के भीष्म पितामह शेखावत नहीं रहे

नए हॉकी टर्फ का नाम शेखावत के नाम हो खिलाडि़यों की इच्छा

मंदसौर। मंदसौर हॉकी के ध्यानचंद कहे जाने वाले व जिले को देश में अलग पहचान दिलाने वाले खेल प्रशिक्षक अमरसिंह शेखावत नहीं रहे। दीपावली के दिन हुए हादसे में मंदसौर के हॉकी पुरुष व उनकी पत्नी आहत हुए थे जिनका टी चोइथराम हॉस्पिटल इंदौर में इलाज के दौरान शुक्रवार को देहवासन सुबह 6ः30 बजे हो गया। रेल्वे से रिटायरमेंट लेकर शहर के सेंट थॉमस सीनियर सेकेंडरी स्कूल खेल शिक्षक के रूप में कार्य संभाला व यहां से चालू हुई अमर सिंह सर की दूसरी पारी मंदसौर को कई सीनियर खिलाड़ी व कोच देने वाले ट्रेनर चले जाएंगे यह भरोसा किसी को नहीं था स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना व औरों को भी इसके लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। आज मंदसौर हॉकी भारत भारत के नक्शे पर है तो उनकी वजह है अमर सिंह 74 साल की उम्र में जहां चलना मुश्किल होता है वही वो आज भी हॉकी क्या करते पकड़े हुए ग्राउंड पर पसीना बहाते दिखते थे। मंदसौर में आज जो भी कुछ है और अपने अपने खेलों में नाम कमा रहे हैं उन्होंने अपना गुरु व मार्गदर्शक मार्गदर्शक आज खो दिया दिया आज जिनके के अथक प्रयासों के मेहनत के कारण मंदसौर को हॉकी टर्फ टर्फ मिला उनने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उस पर पैर भी नहीं रख सकेंगे।

अब बस सभी हॉकी प्रेमियों की इच्छा है कि मंदसौर के नए हॉकी ग्राउंड ग्राउंड का नाम अमर सिंह सर के नाम पर हो ताकि उस ग्राउंड में खेलकर में खेलकर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला हर खिलाड़ी अमर सिंह बन सके।  निधन पर पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि दी।

महू में जन्मे अमरसिंह शेखावत को अपने मौसा शंकर लक्ष्मण से हाॅकी की प्रेरणा मिली। 1964 में ओलिंपियन शंकर लक्ष्मण टोक्यो जापान से हॉकी का गोल्ड मेडल लेकर आए थे। इसके बाद शेखावत ने जीवन हॉकी के लिए समर्पित कर दिया। 1970 में खेल कोटे से रेलवे अजमेर में भर्ती हुए। हॉकी के अलावा एथेलेटिक्स में 400 हर्डल व 14 किमी क्राॅस कंट्री में रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। 1975 में रेलवे ने अमरसिंह का तबादला रतलाम किया। रतलाम में हॉकी का चलन नहीं हाेने से वे मंदसौर से अपडाउन करने लगे। 1986 में उन्होंने रेलवे से रिजाइन कर दिया और निजी स्कूल से खेल प्रशिक्षक के रूप में जुड़ गए। 70 साल की उम्र में शेखावत बच्चों के साथ ग्राउंड पर प्रैक्टिस करते थे।

31 साल में 5 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को दिया प्रशिक्षण

शेखावत ने शहर को 31 सालों में 5 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। 3 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय व 250 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। शहर में हॉकी का स्थान सबसे ऊपर है।

 

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts