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10 वर्षों से आश्वासन के बाद मिड इंडिया ब्रिज की अवरूद्धता की रेल्वे की मनमानी कहीं भारी नहीं पड़ जाये

जननेताओं व सरकार को हो जाना चाहिये सचेत-बंशीलाल टांक

जबसे रेल्वे ने ब्राडग्रेज लाईन प्रस्तावित हुई थी, मंदसौर रेल्वे स्टेशन के समीप मिड इंडिया के उस पार अभिनन्दन आदि लगभग 21 कॉलोनी निवासियों के 50 हजार रहवासियों ने सर्वप्रथम मिड इंडिया फाटक पर ओव्हर अथवा अण्डर ब्रिज बनाने की मांग रखी थी परन्तु आग्रह-अनाग्रह अथवा दुराग्रह जो भी हो रेल्वे प्रारंभ से ही मिड इण्डिया ब्रिज के पक्ष में नहीं रहा और इसके लिये जनता को मजबूर होकर धरना, रेल रोका आदि आंदोलनों का सहारा लेना पड़ा था। तब कही जाकर इस गेट को मंजूरी मिली थी, परन्तु इसे विवादास्पद बनाकर गीता भवन अण्डरब्रिज बनाया गया जो कि एक प्रकार से ठीक ही रहा कि मिड इंडिया गेट 24 घण्टे में अधिकांशतः बन्द रहने से आवश्यक कार्य वाले गीता भवन अण्डर ब्रिज से समय पर अपना कार्य कर लेते है।

रेल्वे द्वारा प्रस्तावित अन्डर/ओवर ब्रिज के संबंध में मीडिया में छपी खबरों पर एक नजर डाले तो 27 फरवरी 2016 को मीडिया में मंदसौर रिहायशी क्षेत्र में चार ब्रिज-गीता भवन अंडर ब्रिज (कार्यपूर्ण), सीतामऊ फाटक ओवरब्रिज (कार्य जारी), संजीत नाका ओवरब्रिज की स्वीकृति की खबर छपी थी परन्तु मिड इंडिया फाटक की स्थिती स्पष्ट नहीं थी। इसके पश्चात् 29 अप्रैल 2016 को रेल्वे, नपा, पीडब्ल्यूडी द्वारा भूमि सर्वे हेतु ले आउट तैयार संबंधी खबर 28 अप्रैल 2016 को  प्रकाशित हुई थी। 24 फरवरी 2017 को रेल्वे नपा, जिला प्रशासन द्वारा अण्डरब्रिज का संयुक्त निरीक्षण कर नई डिजाईन बनाने की खबर छपी। परन्तु 6 माह और 10 दिन लम्बे अंतराल के बाद 4 अगस्त 17 को निराशा भरी खबर छपी कि रेल्वे ने जमीन देने से इंकार कर दिया पुनः तीसरी बार नया प्लान बनाया जावेगा। रेल्वे द्वारा अनुमानित लागत 4 करोड़ 42 लाख रूपये के ब्रिज निर्माण में सुपरविजन चार्ज के रूप में  नगरपालिका द्वारा 8 लाख 85 हजार प्रशासकीय प्रक्रिया में दिये जाने के साथ ही इस ब्रिज निर्माण की मुख्यमंत्री घोषणा में भी शामिल होने तथा 2015-16 के नगरपालिका के नवनिर्माण मद में 3 करोड़ के प्रावधान की स्वीकृति का उल्लेख भी प्रिंट मीडिया में किया गया था। साथ ही नगरपालिका द्वारा मिड इंडिया ब्रिज निर्माण से पीछे नहीं हटने का उल्लेख भी प्रकाशित हुआ था।

ब्रिज को लेकर दो बार डिजाईन बदली गई परन्तु नाच न जाने आंगन टेड़ा की कहावत के अनुसार रेल्वे ने जमीन देने से इंकार कर दिया। 26 अगस्त 2017 के समाचारों में उक्त खबर के साथ पुनः एक बार ओर नगरपालिका अध्यक्ष श्री प्रहलाद बंधवार ने दोहराया कि वे शहर के विकास के लिये इस प्लान को नहीं छोड़ेंगे।

सितम्बर 2017 में रतलाम रेल मण्डल क्षेत्र के सांसदों की बैठक में मिड इंडिया अण्डर ब्रिज प्लॉन को रिव्यू करने तथा बाधाओं को दूर करने की संभावनाओं के समाचार 17 सितम्बर को प्रकाशित हुए थे। बाद में रेल्वे ने जमीन लीज पर देने की नगरपालिका से कहा परन्तु नगरपालिका अध्यक्ष ने यह कहकर मना कर दिया कि रेल्वे की जमीन क्यों लीज पर ली जाये, निजी भूमि लेकर ब्रिज बनाने का नगरपालिका अध्यक्ष के आश्वासन के समाचार छपे थे। रेल्वे व नगरपालिका के बीच मंदसौर से रतलाम और रतलाम से मुम्बई तक चूहा-बिल्ली की दौड़ का यह खेल मुम्बई रेल्वे बोर्ड के पाले में छोड़ दिया गया और अब जैसा कि 12 अक्टूबर को प्रिंट मीडिया तथा नगर के स्थानीय न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित समाचार कि मुम्बई रेल्वे बोर्ड ने प्यासे पपीहे की तरह 10 वर्षों से आस लगाये बैठे रहवासियों की आशा पर पानी फेरते हुए मिड इंडिया अण्डर ब्रिज निर्माण को हरी झण्डी के स्थान पर लाल झण्डी दिखा दी गई है।

मिड इंडिया ब्रिज ही नहीं रेल्वे बोर्ड मंदसौर की जनता की भलाई के ओर भी कार्यों में रोडे़  अटकाता रहा है। लगभग दो माह पूर्व अगस्त में ही मीडिया में एक खबर छपी थी कि नगर की स्थाई पेयजल समस्या निवारण हेतु मंदसौर नगर को जल उपलब्ध कराने के लिये कोलवी से मंदसौर तक चम्बल से पानी के लिये 53 करोड़ 25 लाख की लागत की योजना से 53 किलोमीटर लम्बी पाईप लाईन बिछाई जाने में चींटी की चाल से 17 अगस्त तक जहां 30 किलोमीटर पाईप लाईन डाली गई वहीं मंदसौर तक लाईन आने से पहले ही आसमान से गिरे और खजूर में अटके- रेल्वे बोर्ड द्वारा रेल्वे ट्रेक क्रास करने की अनुमति  नहीं दिये जाने पर नगरपालिका द्वारा बार-बार स्मरण कराने पर रेल्वे द्वारा 5 लाख रूपये अग्रीम जमा कराने को कहा जाने की समाचार प्रकाश में आये थे। पाईप लाईन क्रासींग सीतामऊ फाटक से होना है जहां सेतु निगम द्वारा ओवरब्रिज निर्माण कार्य जारी है। सेतु निगम को भी बायपास रास्ते की अनुमति के लिये रेल्वे के महिनों तक चक्कर काटने पड़े थे। रेल्वे की समय पर अनुमति नहीं मिलने के फलस्वरूप अभी तक ब्रिज निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से प्रतिदिन कितनी भयंकर परेशानियों का सामना इस मार्ग से आने-जाने वाले यात्रियों को करना पड़ रहा है वह भुक्त भोगी ही जान सकते है।

चाहे मिड इंडिया ब्रिज हो अथवा चम्बल पाईप लाईन, रेल्वे द्वारा जो मनमानी अथवा हठधर्मी अपनाई जा रही है उसके संबंध में यह यक्ष प्रश्न सबके मन में बार-बार कौंध रहा है कि केन्द्र से लेकर प्रदेश, नगरपालिका, जिला पंचायत, जनपद-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर सांसद, विधायक यहां से वहां तक और वहां (केन्द्र) से यहां (जनपद) तक बीजेपी का स्पष्ट बहूमत ओर सत्ता में होने के बावजूद रेल्वे का मंदसौर नगर की जनता के साथ कभी हाँ, कभी ना का छलावा का नाटक, समझ में नहीं आ रहा है कि रेल्वे सरकार के अधीन है अथवा सरकार पर रेल्वे हावी है।

10 साल तक धैर्य धारण करना, कम नहीं होता। 10 वर्षांे से नगर की जनता को भरोसा दिलाकर अंत में बहाने बनाकर ब्रिज निर्माण को खटाई में डाल देना जनता के साथ उसी प्रकार  धोखा है जैसे निमंत्रित भूखे मेहमान को घर बुलाकर उसके सामने भोजन की थाली परोसकर जैसे ही वह पहला कोर तोड़कर मुहं में रखने को तत्पर हो और उसके सामने से थाली खींच ली जाये।

2018 में विधानसभा व 2019 में लोकसभा चुनाव है, कहीं ऐसा ना हो कि रेल्वे की अपनी ढपली अपना राग अलापने की मनमानी तथा नगर की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ के परिणाम स्वरूप अभिनन्दन नगर सहित पटरीपार रहवासी आगामी चुनावों का बहिष्कार करने मजबूर न हो जाये और सरकार को भी इसके लेने के देने भारी नहीं पड़े, इसके लिये जनप्रतिनिधियों को अभी से सचेत हो जाना चाहिये और मिड इंडिया ब्रिज निर्माण के लिये जो आश्वासन दिया था, उसे पूरा करने के लिये चुनाव से पहले रेल्वे की मनमानी को दरकिनार करते हुए अपना वादा पूरा करना चाहिये। यदि ऐसा नहीं होता है तो पटरी पार लगभग 50 हजार रहवासियों को फिर से 10 वर्ष पहले जिस प्रकार धरना, रेल रोको जैसे आंदोलनों का सहारा लेना पड़ा था, कहीं फिर से उसे दोहराना नहीं पड़े।

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