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10 वर्षो से चिकित्सकों के पद है रिक्त, एक चिकित्सक के भरोसे है स्वास्थ्य सेवाएॅ, आमजन परेशान, प्रशासन उदासिन

सीतामऊ निप्र।  सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक दशक से भी अधिक समय से चिकित्सको के पद रिक्त पडे है एवं मात्र एक चिकित्सक के भरोसे स्वास्थ्य सेवाओ के नाम पर मात्र औपचारिकता का निर्वाह हो पा रहा है जिसके दुष्परिणाम स्वरूप क्षैत्र के नागरिको को चिकित्सका सुविधा के लिए इधर-उधर भटकना पड रहा है।

उल्लेखनीय है कि स्थानिय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सको के स्वीकृत पदो की संख्या महिला चिकित्सक सहित 9 की है किन्तु एक दशक से अधिक समय से शासन प्रशासन यहां चिकित्सको के रिक्त पदो पर नियुक्ति नही कर पाया है एवं मात्र एक चिकित्सक के रूप में डॉ जीएस सुर्यवंशी पदस्थ है जिले में शायद यह पहला स्वास्थ्य केन्द्र है जिसके अधिन दो तहसीले सीतामऊ सुवासरा जुडी हुई है एवं 260 गांवो के लोगो को चिकित्सा सेवाओ के लिए इस केन्द्र पर आश्रीत होना पड रहा है। डॉ सुर्यवंशी बीएमो की जुम्मेदारीयो का निर्वाह करना पड रहा है इतने बडे क्षैत्र की देखरेख एवं शासन की योजनाओ के क्रियान्वयन की जवाबदारी जैसे तैसे निर्वाह हो पा रही है तथा वे स्वास्थ्य केन्द्र में मरिजो के उपचार हेतु पर्याप्त समय नही दे पा रहे है ऐसी विषम परिस्थिति में उक्त स्वास्थ्य केन्द्र घोर उपेक्षाओ का शिकार बना हुआ है जिसके दुष्परिणाम स्वरूप नगर सहित क्षैत्र के नागरिको को न तो पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिल पा रही है नही शासन की स्वास्थ्य से संबधित योजनाओ का लाभ मिल पा रहा है। इस मामले में यदी कहा जाए की मात्र औपचारिता का निर्वाह हो रहा है तो कोई अतिशोक्ति नही होगी। मरिजो को स्वास्थ्य केन्द्र में घंटो परेशानी झेलना पड रही है। चिकित्सक उपलब्ध नही होने पर कई बार उन्हे जिला चिकित्सालय व निजी चिकित्सको का दामन थामना पडता है स्वास्थ्य केन्द्र की इस दुदर्शा के चलते कई घटनाक्रमो में उक्त स्वास्थ्य केन्द्र सुर्खियो पर छाया रहा है एवं नागरिको के आक्रोश का शिकार भी बना है। इस संबध में शासन प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक यहां चिकित्सको की नियुक्ति करवा पाने में नाकाम रहे है एवं नागरिको को सिर्फ आश्वासनो की बेसाखीया मिलती रही है यह विसंगती भी उभरी है कि शासन द्वारा एक दौ अवसरो पर चिकित्सको की नियुक्ति भी हो गई मगर वे ज्यादा समय टीक नही पाये उन्होने या तो अपने स्थानातंरण करवा लिये या फिर शासकीय सेवा से ही किनारा कर लिया। महिला चिकित्सक उपलब्ध नही होने का खामियाजा महिलाओ विशेषकर गर्भवती महिलाओ को भुगतना पड रहा है। समय पर त्वरीत उपचार नही मिल पाने की वजह से सनसनी खेज घटनाक्रम का साक्षी यह स्वास्थ्य केन्द्र बन चुका है चिकित्सको का पद स्थापना को लेकर समय-समय पर आंदोलन भी हुए है मगर समस्या जस की तस बनी हुई है प्रतित होता है कि कोई बडा उग्र आंदोलन से ही उक्त समस्या का निराकरण हो पाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियो को करवाया गया अवगत- इस संबध में स्वास्थ्य केन्द्र के बीएमओ डॉ सुर्यवंशी का कहना है ि वे समय समय पर स्वास्थ्य केन्द्र की समस्याओ को वरिष्ठ अधिकारीयो को अवगत करवाते रहते है उनसे समस्या निदान के आश्वासन भी मिले है दो तहसीलो का प्रभार होने से बडी जुम्मेदारीयो के निर्वाह के दबाब के बिच स्वास्थ्य केन्द्र में अपनी सेवाए प्रदान करने का सतत प्रयास करता रहा हुॅ। चिकित्सको के रिक्त पदो के बिच व्यवस्था संचालन हेतु सुवासरा व अन्य स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सको को यहां भी अपनी सेवाए देने हेतु निर्देशित किया गया है वे एक-एक दिन बारी-बारी से यहां ड्युटी दे भी रहे है क्षैत्र के मरीजो को शासन की योजनाओ का लाभ दिलाने हेतु नियमानुसार कार्यवाही संचालित होती रही है।

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