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10 श्रमिक संगठनों की राष्ट्र व्यापी हड़ताल

श्रमिक संगठनों ने किया प्रदर्शन, आज भी रहेंगे हड़ताल पर

मन्दसौर। सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियां, रोजगार बढ़ाने की मांग, ठेकेदारी प्रथा (आउट सोर्सिंग) बन्द करने, स्थाई कार्य के लिये स्थायी भर्ती लागू करने, न्यूनतम वेतन 18000 रू. मासिक करने, सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं से विनिवेश व निजीकरण के प्रोजेक्ट बंद करने सहित राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के प्रयासों को रोकने, फिक्स टर्म रोजगार सहित कई राष्ट्रहित व जनहित के मुद्दों को लेकर देश की दस शीर्ष श्रम संगठनों के आव्हान पर देशभर में हड़ताल रखी व प्रदर्शन किया। इसी तारतम्य में मंदसौर में सिटी ट्रेड यूनियन कौंसिल के नेतृत्व में बैंक, बीमा, बीएसएनएल, पोस्ट आफीस, इंटक, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा-उषा कार्यकर्ता सहित कई संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के कर्मियों द्वारा हड़ताल रखकर गांधी चौराहे पर जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार की जनविरोधी-श्रम विरोधी नीतियां अपनी पराकाष्ठा पर है। देश में रोजगार बढ़ाने की आवश्यकता है, विभिन्न क्षेत्र में नई भर्तियां चालू हो, लेकिन रोजगार में लगातार कमी आ रही हैं। हर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई को विनिवेश के जरिये निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। फिक्स टर्म एम्प्लायमेंट के नाम पर हर जाब को अस्थायी करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। मजदूर, किसान सभी त्रस्त है।

एक ओर बीएसएनएल, पोस्ट आफीस, एलआईसी को टूकड़ों में बांटकर निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। वहीं बैंक मर्जर नीति के तहत भी कार्पोरेट घरानों को बेचने की तैयारी में हैै। सरकार, यह साजिश बन्द करे।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर और जीवन निर्वाह लायक वेतन नहीं दिया जा रहा है। जबकि वे अपने परिवार को समय न देकर शासकीय कार्य के प्रति समर्पित है। मांग की गई कि स्थायी किया जावे व स्थायी एवं अस्थाई मजदूर का न्यूनतम वेतन 18000 रू. मासिक निर्धारित किया जावे। बैंक यूनियन पिछले 20 वर्षों से बैंकों का ऋण न चुकाना दण्डात्मक अपराध घोषित करने की मांग की है लेकिन सरकार की मंशा ऐसी नहीं है। जिसके कारण बड़े घराने हजारों करोड़ लोन लेकर चम्पत हो रहे है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कर्मियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पेंशन योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा हैं। कोर्ट के आदेश की अवहेलना की जा रही है।

इस प्रकार केन्द्र सरकार की नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। रोजगार, निवेश, लाभप्रदता घट रही है। महंगाई बढ़ रही है, सामाजिक सुरक्षा घट रही है। मजदूर वर्ग में असंतोष व्याप्त है।

उक्त उद्गार प्रदर्शन को संबोधित करते हुए महेश मिश्रा, गोपालकृष्ण मोड़, रमेश जैन, गजेन्द्र तिवारी, मुन्नालाल चंदेल, के.सी. सेन, के.के. गौड़, के.के. दुबे, सुरेन्द्र कुमावत, संतोष सालवी, बालूसिंह ने व्यक्त किये।

इस अवसर पर विक्रम विद्यार्थी, सूर्यप्रकाश सालगिया, विरेन्द्र भावसार, सुभाष भावसार, सोभागमल जैन, संगीता जैन, बसंती आर्य, रमेश देवड़ा, विपुल कच्छारा, राजेश सोनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आदि उपस्थित थे। प्रदर्शन का संचालन जिनेन्द्र राठौर ने किया एवं आभार भरत नागर ने माना।

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