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100 करोड से भी अधिक कि प्रॉपर्टी और करीब 3 साल की अबोध बच्ची को त्याग कर जैन धर्म की दीक्षा लेने का लिया निर्णय

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच शहर के रहवारी समृद्ध राठौड़ परिवार के उच्च शिक्षित एवम् सफल उद्योगपति सुमित राठौर(34)और उनकी पत्नी अनामिका (32) ने यकायक सांसारिक जीवन और करीब 3 साल की अबोध बच्ची को त्याग कर जैन धर्म की दीक्षा लेने का निर्णय लिया है।गुजरात के सूरत में 23 सितंबर 2017 को साधुमार्गी आचार्य रामलाल महाराज की निश्रा में दीक्षा सम्पन्न होगी।
वैभवपूर्ण और कामयाब जीवन छोड़ कर दीक्षा का निर्णय करने वाले सुमित राठौर नीमच शहर के सुप्रतिष्ठित सरदारसिंह राठौर के पोते हैं जबकि उनकी पत्नी अनामिका,राजस्थान के चितौडग़ढ़ जिले के पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष और कपासन निवासी अशोक चण्डालिया की बेटी है।दोनो की शादी चार साल पहले हुई थी और इस दम्पति के 2 साल 10 माह की  बेटी इभ्या है.
सुमित राठौर लंदन से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में डिप्लोमाधारी है. दो साल लंदन में जॉब करने के बाद दादा के कहने पर नीमच लौटे और करीब 10 करोड़ की फैक्ट्री स्थापित की जिसमे 100 व्यक्तियों को रोजगार मिला हैं। सुमित के बड़े भाई भी साथ ही फैक्ट्री संभालते हैं।
उनके परिवार के पास अरबो रुपए की अचल संपत्ति के साथ एक्सपोर्ट और फायनांस का बड़ा कारोबार भी है.
पत्नी अनामिका बचपन से काफी होनहार छात्रा रही थी. 8वीं, 10वीं और 12वीं में राजस्थान बोर्ड में टॉप करने के बाद उसने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. हिंदुस्तान जिंक में 8-10 लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की लेकिन 2012 में सगाई के बाद जॉब छोड़ दिया और सुमित के साथ विवाह बंधन में बंध गई।
राठौड़ परिवार के पास वृहद कैम्पस है जिसने अक्सर जैन साधु-साध्वी ठहरते है और वर्षभर धार्मिक विधियाँ संचालित होती है।इस माहौल के चलते ही सम्भवतः सुमित और अनामिका के मन में सांसारिक जीवन के वैराग्य पनपा और पिछले माह इस दम्पति ने भगवती दीक्षा लेने के निर्णय की घोषणा कर दी।
इस दम्पति के इस चौकाने वाले निर्णय से राठौर परिवार और नीमच अंचल के नागरिक अवाक रह गए।परिवार जनों ने उनकी बच्ची के भविष्य के मद्देनज़र फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह भी किया।लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग है।
सूरत में 23 सितंबर को दीक्षा ग्रहण करने जा रहे दम्पति का कहना है कि उनकी बच्ची ही वह पुण्यात्मा है जिसके जन्म लेने के साथ ही हमारे मन मे आत्म कल्याण का बोध जागृत हुआ है।बेटी के आठ माह की होने के बाद से ही हम ब्रम्हचर्य व्रत का पालन कर रहे है दंपत्ति का कहना है कि बच्ची की परिवार में परवरिश बहुत अच्छे से होगी और जब यह समझदार होगी तब हमारे निर्णय पर उसे गर्व होगा।
नीमच से ऋतिक शर्मा की स्पेशल रिपोट मो.7999548615

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