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14 से 16 मार्च तक हरिद्वार में लगेगा युवा चेतना शिविर

शिक्षा ने संस्कारों से दूर कर दिया युवाओं को-आचार्य श्री रामानुजजी

पत्रकारवार्ता में दी आचार्यश्री ने आयोजन की जानकारी

मंदसौर । पूज्य स्वामी विवेकानंदजी के निर्देश पर स्थापित व भारत वर्ष को विश्व पटल पर एक अनोखी प्रसिद्वि दिलवाने वाले रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल हरिद्वार 100 से अधिक वर्षो से चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अनेकों सेवाओं के माध्यम से उत्तराखंड के लोगोंएवं यात्रियों की स ेवा करता रहा है। जहां साधु-संतों व निःशक्तजनों का निःशुल्क उपचार प्राप्त होता है। रामकृष्ण मिशन के इसी सेवा कार्य में सहयोग हेतु मानवता सेवा ट­स्ट यूके  एवं हरिकथा आयोजन समिति के सौजन्य से त्रिदिवसीय युवा चेतना शिविर का आयोजन 14 से 16 मार्च तक श्री रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, कनखल हरिद्वार में किया जा रहा है। शिविर के माध्ध्यम से योग, यज्ञ, सेवा एवं जीवन में सकारात्मक बदलाव के साथ ही अध्यात्म को युवा चेतना के साथ गतिशील करने का प्रयास होगा। इस पुनीत कार्य मेंआम जन द्वारा दिया गया दान स्वरूप सहयोग रामकृष्ण मिशन हरिद्वार में मधुमेह से ग्रसित बच्चों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लाभार्थ दिया जायेगा।

यह बात परम पुज्य आचार्य श्री रामानुजजी ने मंदसौर प्रवास के दौरान दैनिक जनसारंगी कार्यालय पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहीं । इस दौरान दैनिक जनसारंगी के प्रधान संपादक नरेन्द्र अग्रवाल ने जनसारंगी परिवार की और से आचार्य श्री की अगवानी की ।पत्रकारों से चर्चा करते हुए आचार्यश्री रामानुजजी ने कहा कि दो पीढ़ि के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ गया है लेकिन इसका कारण केवल युवा नहीं है बल्कि परिवार के बड़े भी उतने ही जिम्मेदार है जो बड़े सिखाते है वहीं तो बच्चें  सिखते है इसमें वर्तमान की शिक्षा प्रणाली सबसे ज्यादा जिम्मेदार है जिसने बच्चों को संस्कारों से दूर कर दिया है। यदि बच्चें करना भी चाहते है तो बड़े उन्हें कह देते है नहीं-नहीं यह तुमसे नहीं होगा।  जब कह दिया कि तुमसे नहीं होगा तो वास्तव में नहीं होता है, बच्चें वह करते ही नहीं है। इसके बाद सामान्य बोलचाल में एक बात सामान्य हो गई है कि आजकल के बच्चें सुनते ही नहीं है। जब बच्चें के अंदर के जज्बे को इस तरह से सार्वजनिक पुरूस्कार दिया जाता है तो बच्चा वास्तव में नहीं सुनता है। निराशा, हताशा,अपमान और मर्यादा की वजह से दोनो पीढ़ियों में संवाद समाप्त हो गया है और यहीं से सारी समस्याओं की जड़ शुरू होती है। लेकिन समाज को यदि ऊंचाईयों पर ले जाना है तो इस दूरी को समाप्त करना पड़ेगादो पीढ़ियों की बीच बड़ती इस दूरी को पाटने का काम साधु कर सकते है। बच्चों को समझने की जिम्मेदारी पिता की है उन्हें दूनिया को समझाना पड़ेगा, वर्तमान की आपाधापी,महत्वाकांक्षाओं में युवा निराश हो रहा है, शिक्षा के विकास के आगे इंसान छोटा रह गया है। लेकिन यदि चिंतन को सकारात्मक बना लिया जाये तो स मस्याओं का समाधान किया जा सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि लेखन सत्य के साथ जब सकारात्मक होता है तो प्रेरणा बन जाता है लेकिन नकारात्मकता विध्वंश का कारण भी बनती है। हमें पंथ और सम्प्रदाय में बांट दिया गया है, धर्म की आड़ में हम असहिष्णु हो गये है, जो यर्थाथ कहता है उसे कड़वा कहा जाता है। सेवा के संस्कार विश्व को भारत ने दिये है लेकिन आज विदेशों में तो इन संस्कारों को आत्मसात किया जा रहा है लेकिन हमारे यहां हम भूलते जा रहे है। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में तो डिग्री देने से पहले किसी चेरिटी में 15 दिन सेवा कार्य करना अनिवार्य है।  सेवा अध्यात्म का अंग है लेकिन यदि कोई बिना दिखावे के कोई सेवा करता है तो उसे महत्व नहीं दिया जाता है ऐसे में नाटक, नौटंकी को ही सेवा का रूप दे दिया गया। ऐसे में युवाओं में चेतना जागृत करने की आवश्यकता है, उन्हें दूनिया को समझाने की आवश्यकता है, दो पीढ़ियों के बीच संवादहीनता को समाप्त करने की आवश्यकता है। आचार्यश्री ने कहा कि  युवा पीढ़ि को संवेदना से रूबरू कराने के लिये ही इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

शिविर का कार्यक्रम

आचार्यश्री रामानुजजी ने कहा कि युवा चेतना शिविर श्री रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, कनखल हरिद्वार में 14 मार्च से प्रारम्भ होगा, तीन दिनों तक चलने वाले शिविर में प्रतिदिन एक घंटा विवेकानंद योग, पौन घंटा आत्मशक्ति यज्ञ और दो घंटे तक रामकृष्ण सेवा कार्य होगें इसके तहत शिविर में आये युवाओं को अस्पताल में वालियेन्टरी सेवा देना होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन दोपहर 3 से 7 बजे तक युवाओं के लिये विशेष प्रवचन होगें। शिविर के अंतिम दिन 16 मार्च को सायं 7 बजे दान के रूप में प्राप्त सहयोग राशि का चेक रामकृष्ण मिशन को समर्पित किया जायेगा। इस कार्यक्रम का विशेष प्रसारण आस्था टीवी चैनल पर भी किया जायेगा। शिविर में स्वामी नित्यशुद्वानंदजी, स्वामी उमेश्वरानंदजी, स्वामी कमलाकांतानंदजी, स्वामी देवतानंदजी, स्वामी हरिमहिमानंदजी, स्वामी दयाधिपानंदजी, स्वामी अभयानंदजी और वरिष्ठ सन्यासीगण भी विशेष रूप से उपस्थित रहेगें। इस शिविर सम्मिलित होने के लिये मोबाईल 9425101666, 9425944011, 9009698096, 9827394705, 9907873792 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

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