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20 हजार फीट जमीन के मूल प्रकरण की फाईल नगरपालिका से हुई गायब

आगे विजय गुर्जर ने इस मामले में बताया है कि मेघदूत नगर में लगभग 20 हजार फीट भूमि है जिसकी लागत लगभग 10 करोड़ रूपये है। यह भूमि स्कूल की खूली भूमि है (मेघदूत नगर काॅलोनी रिकार्ड अनुसार) जिसका प्रकरण कई वर्षों से तत्कालिन नगर सुधार न्यास द्वारा पत्रकारों व भाजपा नेताओं को सस्ते भाव में दिये गये प्लाटों के साथ-साथ चल रहा है। इस प्रकरण में जगतपति आयोग ने दी गई भूमियों को नियम व कानून के विरूद्ध मानते हुए पूरी तरह से निरस्त कर था। इस आदेश के विरूद्ध यह सभी लोग उच्च न्यायालय में गये थे। मगर उच्च न्यायालय ने भी जगतपति आयोग के निर्णय व रिपोर्ट को ही सही मानते हुए उक्त भूमियों के आवंटन प्रक्रिया को अवैध मानकर निरस्त कर दिया था मगर इस भूमि पर नगरपालिका की मिलीभगत से बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है जिसकी कोई अनुमति भी निर्माणकर्ता द्वारा नहीं ली गई है। नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस प्रकरण में अपनी ओर से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की है साथ ही इस प्रकरण की मूल फाईल देखने के लिये मांगने पर संबंधित अधिकारियों ने अवगत कराया कि नगरपालिका कार्यालय से मूल प्रकरण की फाईल गायब हो चुकी है।
अन्त में पार्षद विजय गुर्जर ने उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना व मूल फाईल गायब होने के मामले से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान, नगरीय प्रशासन मंत्री मायासिंह, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री व लोक समिति अध्यक्ष महेन्द्रसिंह कालूखेड़ा, आयुक्त विवेक अग्रवाल को अवगत कराते हुए मांग करी है कि दस करोड़ रूपये की शासकीय भूमि को बचाने के लिये मिलीभगत के चलते स्थानीय स्तर पर कार्यवाही हो पाना संभव नहीं लगती इसलिये आप इस मामले में शीघ्र से शीघ्र ठोस कार्यवाही करे, साथ ही दोषी अधिकारी व कर्मचारियों को तत्काल दण्डित किया जाए।

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