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2011 के मानव तस्करी मामले मे 4 दोषियों को 10-10 वर्ष की सजा

मंदसौर। अपर सत्र न्यायाधीश एनएस बघेल ने मानव तस्करी व देह व्यापार से संबंधित एक मामले में एक महिला सहित चार आरोपितों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। 2011 में उजागर हुए इस मामले में 19 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया था। जिनमें से 12 को अपने माता-पिता के पास भेज भी दिया गया था। न्यायाधीश ने इस चिन्हित सनसनीखेज प्रकरण में लगभग 135 पेज में निर्णय लिखा है।

मीडिया सेल प्रभारी नितेश कृष्णन ने बताया कि संभवतः मंदसौर जिले में किसी भी न्यायालय द्वारा 135 पृष्ठों में दिया गया निर्णय प्रथम बार हुआ है। अभियोजन के अनुसार 9 मार्च 2011 को अजाक थाने के तत्कालीन डीएसपी जेएस अरोरा ने सूचना मिलने पर मल्हारगढ़ थाना प्रभारी अनिरूद्घ वाधिया व पुलिस फोर्स के साथ महू-नीमच राजमार्ग पर ग्राम मुरली बाछड़ा में एक डेरे पर पांच नाबालिगों का सौदा करने के मामले में छह आरोपितों को छापामार कार्रवाई कर पकड़ा था। पूछताछ करने पर पांच लोगों ने इंदौर से आकर नाबालिग लड़की को बेचना बताकर अपना जुर्म स्वीकारा। खरीदने वाले ने अपना नाम राकेश पिता रोडू बाछड़ा निवासी काल्याखेड़ी बताया। नाबालिग लड़की को वैश्यावृत्ति के लिए खरीदना बताकर अपना जुर्म स्वीकारा। आरोपितों के मध्य लेन-देन के चार हजार रुपए भी जब्त किए। मल्हारगढ़ पुलिस ने भादंस की धारा धारा 365, 368, 366 क, 372, 120 बी व धारा पांच अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्घ किया।

जांच में तथ्य आया कि छह आरोपितों ने एक अन्य व्यक्ति केशिया पिता लक्ष्मण बाछड़ा निवासी रातीतलाई के साथ मिलकर कुल 19 लड़कियों को अन्य डेरों में बेचना बताया। आरोपितों के 27 मेमो के आधार पर कुल 21 आरोपित गिरफ्तार किए गए। इनसे मिली सूचना पर कुल 19 नाबालिग लड़कियों को बाछड़ा डेरो से वैश्यावृति के व्यापार से मुक्त कराकर सभी को बाल कल्याण समिति अपना घर मंदसौर भेजा गया। कुल 12 नाबालिग बालिकाओं ने अपने अभिभावक को पहचाना। इसके बाद उन्हें अभिभावकों को न्यायालय के आदेश से सुपुर्द किया गया। संपूर्ण विवेचना में तथ्य आया कि सभी आरोपितों ने अलग-अलग शहरों से नाबालिग लड़कियों का अपहरण कर बाछड़ा डेरों में वैश्यावृत्ति के उद्देश्य से बेचा। 2 जून 2011 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों को श्रवण करने के बाद षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश एनएस बघेल ने आरोपित सौरमबाई पति महेश बाछड़ा(31) निवासी पिपलियामंडी को भादंस की धारा 373 के तहत 10 वर्ष तथा धारा पांच अनैतिक देह व्यापार अधिनियम में 10 वर्ष, धारा 368 में 5 वर्ष तथा प्रत्येक धारा में पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना किया, दिनेश पिता बद्रीलाल बाछड़ा साल निवासी आशाराम कॉलोनी खरगोन को भादंस की धारा 366 क, 372, 373 में 10 वर्ष तथा पांच हजार रुपए जुर्माना, लक्ष्मण पिता रामसिंह सोलंकी (28) निवासी आशाराम कॉलोनी खरगोन को धारा 366 क, 372, 373 भादंवि में 10 वर्ष तथा 5000 रुपए जुर्माना किया, राकेश पिता रोड़ा बाछड़ा (26) निवासी नाहरगढ़ को भादंस की धारा 373 में 10 वर्ष की सजा तथा पांच हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। प्रकरण का संचालन उप संचालक अभियोजन बापूसिंह ठाकुर ने किया। सक्रिय सहयोग एडीपीओ नितेश कृष्णन ने किया।

 

संगठित गिरोह के माध्यम से अपराध किया

अभियोजन द्वारा प्रकरण की संपूर्ण विवेचना व तथ्यों को 31 गवाहों से अपर सत्र न्यायाधीश एनएस बघेल मंदसौर के समक्ष प्रमाणित किया गया। विशेष लोक अभियोजक बापूसिंह ठाकुर ने दंड के प्रश्न पर यह तर्क किया गया कि अपराध समाज के विरुद्घ गंभीर अपराध है तथा आरोपित संगठित गिरोह के माध्यम से संगठित तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया। इस कारण इन्हे कठोर दंड से दंडित किया जाना चाहिए।

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