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2017 के 1 दिन के कलंक को धो गया 2018 का 10 दिन का किसान आंदोलन- साधुवाद-वंदन, मालव माटी के किसानों एवं प्रशासन को-बंशीलाल टांक 

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अमन-चैन-शान्ति के टापू से पहचाने जाने वाला मध्यप्रदेश का मालवा प्रांत जिसका दशकों से साक्षी और केन्द्र माना जाता रहा है अविभाजित जिला मंदसौर। ‘‘डग-डग रोटी, पग-पग नीर। मालव धरती बड़ी गंभीर।।’’ साहित्यकारों की रचनाओं मंे यह लोकोक्ति मात्र एक कहावत नहीं बल्कि हकीकत है। जिस क्षेत्र की जड़ माटी को गंभीर कहा जाता रहा हो तो फिर उस माटी में पैदा होकर उसके अन्न-जल-वायु से पोषित-पालित-धरती पुत्र किसान गंभीर क्यों ना होगा? इस मालव माटी का लाल अन्नदाता किसान तो हमेशा गंभीर, संवेदनशील रहा है-रहता है और रहेगा। उसकी यह सनातनी वसीयत को कोई छीन नहीं सकता परन्तु गत वर्ष 6 जून को इस मालव माटी के सपूत के नाम पर अथवा इस अन्नदाता की आड़ में जो कुछ भी घटित हुआ, 6 निर्दोष अन्नदाताओं को असमय अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा और दुष्परिणाम में जो कलंक लगा उससे मंदसौर-मालवा-मध्यप्रदेश ही नहीं सम्पूर्ण राष्ट्र और राष्ट्र के बाहर जिस प्रकार शांति, शीतल  तथा अहिंसा का मसीहा कहा जाने वाला यह क्षेत्र 6 जून के किसान आंदोलन के नाम पर हिंसा की आग में धधक गया, उसकी लपटे-बदनुमा दाग वर्ष भर क्षेत्र को विचलित रहा, कारण किसान चाहे मंदसौर, मालवा, महाराष्ट्र का हो अथवा उत्तर प्रदेश, हरियाणा का हो, धरती पर भेजकर पालन पोषण करने में जन्मदाता परमात्मा के बाद अन्नदाता के रूप में यदि किसी को यह पहचान मिली है तो वह भारत के किसान को और इसलिये अपनी महती गरिमा को छोड़कर वह राष्ट्रीय मार्ग पर आते-जाते ट्रक, दो पहिया, चार पहिया वाहनों को आग के हवाले, नगर में सड़क के किनारे ठेला गाड़ी खड़ाकर दिन भर खड़े रहकर उसमें रखी फल सब्जी बेचकर रोजी रोटी कमाने वाले महिला पुरूषों के ठेलों को आंेधे कर फल-सब्जी को सड़क पर बिखेर देना, लूट लेना, गांव से आने वाले दूध विक्रेताआंे की दूध से भरी टंकियों को औंधी कर सड़क पर ढोल देना, रक्षा में तैनात पुलिस जवानों पर हमला, थाने का घेराव यह सब कुछ हुआ था 6 जून 2017 के उस मनहूस दिन को जिसने सम्पूर्ण राष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था, किसानों की आड़ में भोलेभाले किसानों को मोहरा बनाकर किन निहीत स्वार्थी तत्वों ने अंजाम दिया था। यह तो जारी जांच पूरी होनेे पर ही पता चल पायेगा परन्तु इस वर्ष, गत वर्ष के आंदोलन के संदर्भ में मात्र 1 दिन नहीं 1 जून से 10 जून तक लगातार 10 दिन तक सम्पूर्ण राष्ट्र में किसान आंदोलन की घोषणा से जिस प्रकार असंभावित अनपेक्षित माहौल, वातावरण से निजात पाने के लिये जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के साथ ही आम जन के लिये जो ऊहापोह की स्थिति बनी उससे निजात दिलाने जिला प्रशासन मुखिया धीरगंभीर कलेक्टर श्री ओ.पी. श्रीवास्तव जी तथा पुलिस प्रशासन कप्तान श्री  मनोजकुमार सिंहजी का चौबीसों घण्टे मुस्तैदी के साथ कुशल नैतृत्व और उनका किसानों के साथ निरंतर जीवन्त सम्पर्क-सहयोग का ही सुखद परिणाम रहा कि इस 10 दिवसीय आंदोलन से पूर्व 30 मई को म.प्र. के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की कॉलेज ग्राउण्ड पर विशाल जनसभा और उसके बाद 6 जून को गत वर्ष के 6 किसानांे की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी की पिपलियामंडी खोखरा में अपार भीड़ के बावजूद गत वर्ष की तरह इस बार किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्तेजना आदि का माहौल नहीं होकर लगातार 10 दिन का आंदोलन पूर्ण रूपेण शांति के साथ सम्पन्न हो गया। हालांकि पंजाब-हरियाणा सहित कुछ प्रांतों में दूध की टंकिया ढोलने, दूध के भरे टेंकर से सडक पर दूध बहाने, सब्जियां फेंकने जैसी कुछ छूट-फुट घटनाओं के समाचार थे। परन्तु मंदसौर की गत वर्ष के आंदोलन की घटना को लेकर सम्पूर्ण भारत में 1 जून से 10 जून तक जो आंदोलन चला उसमें सम्पूर्ण मंदसौर जिला ही नहीं पूरे प्रदेश में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और सम्पूर्ण आंदोलन पूर्णतया शांति के साथ सम्पन्न हो गया। इसके लिये मंदसौर क्षेत्र ही नहीं सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के अन्नदाता किसान भाई साधुवाद-वन्दन के पात्र है। इससे निश्चित ही उस दाग को धोने में सहायता मिली है जो किसान आंदोलन के नाम पर इस शांत-सुखद-शुकुन भरे जिले ने झेला है। इसके लिये अन्नदाताओं के साथ ही जिला एवं पुलिस प्रशासन और विशेष रूप से सम्पूर्ण आंदोलन के दौरान जनहित को ध्यान में रखकर स्थानीय मीडिया जगत की जो सकारात्मक सराहनीय भूमिका रही है, सभी मंगल बधाई के पात्र है।

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