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3 कलाकारों पर खर्च होगे 38 लाख: भगवान पशुपतिनाथ मेला

नगर पालिका जनता की कमाई का पैसा फिल्मी सितारों पर बहा रही है….

मंदसौर। भगवान पशुपतिनाथ मेला प्रतिवर्षानुसार भगवान पशुपतिनाथ पाटोत्सव के समय लगाया जाता है और प्रतिवर्ष मेला नगर पालिका की वजह से सुर्खियों में भी रहता है कभी अव्यवस्थाओं, तो कभी पार्षदपतियों की सेल्फी तो कभी मेले में भ्रष्टाचार की वजह से।

इस वर्ष मेले का शुभारंभ 31 अक्टूबर 17 मंगलवार को होने वाला है। मेले की अंतिम तैयारियों के लिये मेला समिति की अंतिम बैठक रविवार 29 अक्टूबर को बुलाई गई लेकिन कोरम के अभाव में बैठक दो घंटे देरी से प्रारंभ हो पाई। बैठक करा समय दोपहर 1 बजे रखा गया था लेकिन मेला समिति के आठ सदस्यों में से केवल तीन ही बैठक में उपस्थित हो पाये पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण समिति की बैठक 3 बजे प्रारंभ हो पाई। बैठक में नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, सीएमओ श्री सविता प्रधान गौड और मेला सभापति राधिका किशोर शास्त्री और जितेन्द्र सोपरा ही उपस्थित थे बाद में मेला समिति सदस्य आजाद देवी कोठारी और दीपिका जैन को बुलाया गया जिसके बाद बैठक प्रारंभ हो पाई। बाकी के जिम्मेदार सदस्य बैठक से गायब रहते हुए संडे की छुट्टी मनाते रहे।

बैठक में 19 लाख 75 हजार रूपये में हिमेश रेशमिया और 10 लाख में गोविन्दा बुलाने का तय किया गया। और भी अन्य कलाकारों के नाम आये थे जो कम राशि में आने को तैयार थे, लेकिन समिति ने 19 लाख रूपये में हिमेश रेशमियॉ को फायनल किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 लाख 75 हजार रूपये में हिमेश रेशमियॉ को बुलाने के लिये सीएमओ श्रीमती प्रधान ने इसका विरोध भी किया लेकिन सीएमओ के विरोध के बाद भी हिमेश रेशमियॉ को फायनल कर दिया गया। दूसरे सेलीब्रेटी के रूप में राजू श्रीवास्तव को बुलाया जा रहा है जो मेले में आने के 8 लाख 50 हजार रूपये लेेगे। इस तरह मात्र 3 कलाकारों पर ही नगर पालिका ने लगभग 38 लाख खर्च करने के फसले दिये। देरी से प्रारंभ हुई बैठक को 15 से 20 मिनिट में खत्म कर दिया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मेला का बजट 60 लाख रूपये है। आधे से भी ज्यादा रकम केवल 3 कलाकारों पर खर्च कर देना कही मेले में अभी से भ्रष्टाचार की हवा चलने लगी है लगता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबकुछ पहले से ही तय था बैठक केवल ओपचारिकता के लिए की गई। बैठक में नपा अध्यक्ष व मेला सभापति ने समिति के अन्य सदस्यों की छोड़ो नगरपालिका सीएमओ की भी नही चलने दी और इन नामों को बिना चर्चा के अपनी मन मर्जी से फाइनल कर दिया।

जनता को अन्य जो समिति के सदस्य उपस्थित नहीं थे उनसे भी बराबर का हिसाब लेना चाहिए की समिति की अहम बैठक जिसमें आर्थिक निर्णय लेने थे उनमें से वो नदारद क्यों रहे अगर उन्हे समिति में रहना ही नहीं था समिति का हिस्सा क्यों बने।

लगता है मेला जनता के लिए नहीं भ्रष्टाचार करने के लिए आता है। जनता की कमाई का पैसा इस प्रकार अपने मन मर्जी से खर्च कर देना कहा तक उचित है। जनता का इसका जवाब मांगना चाहिए। क्या जनता विभिन्न महंगें करों के द्वारा जो पैसा जमा किया है वों इस प्रकार उड़ा देना कहा तक सही है जनता इसका जवाब मांगेंगी।

इधर देरी से प्रारंभ हुई बैठक उधर परेशान होते रहे दुकानदार
मेला समिति की बैठक नगर पालिका में रविवार को दोपहर 1 बजे बुलाई गई थी और दोपहर 3.30 बजे मेले में बाहरे आये दुकानदारोे को लॉटरी सिस्टम से दुकाने आवंटित करने के लिये गोटी सिस्टम प्रारंभ किया जाना था। लेकिन इधर नगर पालिका में बैठक ही दो घंटे देरी से प्रारंभ हो पाई तो उधर दुकानदारों ने लॉटरी मे देरी होने पर हंगामा कर दिया था जिसे बाद में नपाध्यक्ष व सीएमओं ने पहुॅचकर शांत करवाया।

वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार तो लगता है भगवान पशुपतिनाथ ने भी मन मे सोचा होगा काश मेरे नाम पर इस मैले का नाम ना होता….. जय हिन्द वन्देमातरम

 

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