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500 और 1000 के पुराने नोटों का क्या करेगा RBI?.. जानें

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RBI 500-1000 रुपये के जो नोट मिलेंगे उन नोटों का पहले करेंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम (सीवीपीएएस) करेगा जिससे पता चलेगा कि वापस आए नोट असली हैं या नकली. इसके बाद असली नोटों का इस्तेमाल नई करेंसी का कागज तैयार करने में किया जाएगा. इसका मतलब ये नहीं कि नकली नोट बेकार हो जाएंगे. आरबीआई नकली नोटों का इस्तेमाल पेपरवेट, कैलेंडर फाइलें बनाने में करता है. तो हो सकता है कि आने वाले समय में आप जिन फाइलों, कैलेंडर का इस्तेमाल करें वो नकली नोटों से बने हों. इन नोटो को फाइलें, कैलेंडर्स आदि बनाने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। साथ ही, जो नोट तय मानक के हिसाब से सही-सलामत अवस्था में हैं, उन्हें नई करंसी में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ओर सुनने में आया है कि गड्ढे भरने और जाड़े से बचने में काम आएंगे पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट।

आरबीआई 500 रुपये और 1000 रुपये के उन तमाम नोटों को नष्ट करने की तैयारी में जुटा है, जो पीएम नरेंद्र मोदी के शब्दों में अब ‘कागज के टुकड़े’ रह गए हैं। हालांकि वापस लिए गए ये नोट बर्बाद नहीं होंगे।

आरबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘हमने पूरी तैयारी कर ली है।’ उन्होंने कहा कि ऐसी करेंसी को पतले-पतले टुकड़ों में काटा जाएगा और फिर उनका उपयोग किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ‘इन नोटों को इस तरह काटा जाएगा कि टुकड़ों को फिर से जोड़कर नोट न बनाया जा सके। फिर इन टुकड़ों को एक ह्यूमिडिफायर में डाला जाएगा, जो इन्हें ब्रिकेट्स यानी ईंट जैसे टुकड़ों में बदल देगा। हम इन टुकड़ों को कॉन्ट्रैक्टर्स को देंगे, जो मुख्य तौर पर इनका उपयोग गड्ढे भरने में करते हैं।’

अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं किया गया है कि नष्ट किए जाने वाले इन नोटों का कोई और इस्तेमाल होगा या नहीं। मार्च 2016 के अंत में 500 रुपये के 1570 करोड़ नोट सर्कुलेशन में थे। उस समय तक 1000 रुपये के 632.6 करोड़ नोट चलन में थे।

दुनियाभर में सेंट्रल बैंक खराब नोटों को नष्ट करने के कई तरीके अपनाते हैं। इनमें उन्हें जलाकर इमारतों में गर्मी का इंतजाम करने तक जैसे उपयोग भी हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड 1990 तक ऐसी करंसी को जलाकर बैंक की इमारत में गर्मी की व्यवस्था करता था। बाद में 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में बैंक ने ऐसी करंसी की रीसाइक्लिंग शुरू की। इसमें उसने खराब हो चुकी खाद्य सामग्री के निस्तारण में अपनाई जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे मिले उत्पाद का उपयोग जमीन की उर्वरता बढ़ाने में किया गया।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (भारत के आरबीआई जैसा अमेरिकी सेंट्रल बैंक) भी करंसी की श्रेडिंग यानी उसकी बेहद पतले टुकड़ों में कटाई करता है, लेकिन नोटों का आंकड़ा उसके मामले में कम रहता है। फेड रिजर्व इन नोटों को प्री-पैकेज्ड नॉवेल्टी सोवेनियर्स में बदल देता है और लोग उन्हें खरीदते हैं। यह बैंक कलात्मक उपयोग या कमर्शल इस्तेमाल के लिए भी श्रेडेड करेंसी की बड़ी मात्रा ऑफर करता है।

साल 2012 में हंगरी के सेंट्रल बैंक ने जाड़े के मौसम में जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाने के लिए पुराने नोटों को जलाया था। बैंक ने उन करेंसी नोट्स को ब्रिकेट्स में बदला और उन्हें समाजसेवी संगठनों को दे दिया था।

क्या कहता है रिजर्व बैंक?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सालाना 2,700 करोड़ रुपये करंसी निर्माण में खर्च करता है। 98% ‘कन्ज्यूमर पेमेंट’ भारत में कैश द्वारा किए जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘लगभग पूरी तैयारी कर ली गई है। करंसी को पतले-पतले टुकड़ों में काटा जाएगा और फिर उनका उपयोग किया जाएगा। इन नोटों को इस तरह काटा जाएगा कि टुकड़ों को फिर से जोड़कर नोट न बनाए जा सकें। फिर इन टुकड़ों को एक ह्यूमिडिफायर में डाला जाएगा, जो इन्हें ब्रिकेट्स यानी ईंट जैसे टुकड़ों में बदल देंगे। इन टुकड़ों को कॉन्ट्रैक्टर्स को दिया जाएगा, जो मुख्य तौर पर इनका उपयोग गड्ढे भरने में करते हैं।’

कहां क्या होता है?
अमेरिका में फेडरल रिजर्व बैंक चलन से बाहर हुए नोटों को छोटे-छोटे हिस्सों में काट देता है, जिनका उपयोग कलात्मक कार्यों के लिए किया जाता है। दुनिया के कुछ देशों में चलन से बाहर हो चुके नोटों का इस्तेमाल घर को गर्म करने के लिए भी किया जाता है। कई जगहों पर चलन से बाहर हुए करंसी नोटों को ब्रिकेट्स में बदलकर समाजसेवी संगठनों को दे दिया गया।

एवरेस्ट से भी ऊंचे 500, 1000 के नोट –
500, 1000 रुपये के 23 बिलियन (2300 करोड़ रुपये) जो अब चलन से बाहर हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इन्हें अगर एक साथ लाया जाए, तो यह माउंट एवरेस्ट से 300 गुना ऊंचा ढेर बन जाएगा।

अब तक कितने रुपये पहुंचे बैंक?
31 मार्च, 2016 तक देश की अर्थव्यवस्था में 500 और 1000 रुपये के नोटों की कुल कीमत 14.95 लाख करोड़ रुपये थी। यानी, जितनी नकदी सर्कुलेशन में है, उसका 86 फीसदी। सैद्धांतिक तौर पर देखें तो अब यह सारा पैसा बैंकों, डाकघरों के जरिए वास्तविक और आधिकारिक अर्थव्यवस्था में आ जाएगा। करीब 6 लाख करोड़ रुपये तो बैंकों में जमा करवाए भी जा चुके हैं।

इस घोषणा में 8 नवम्बर की आधी रात से देश में 500 और 1000 रुपये के नोटों को खत्म करने का ऐलान किया गया। इसका उद्देश्य केवल काले धन पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि जाली नोटों से छुटकारा पाना भी है।

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