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60 वर्ष पुराना शासनाधीन गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय भवन की ऊपरी जर्जर मंजिल भरभराकर गिर पड़ी

भानपुरा। नगर के बस स्टैंड पर भीड़ भरे क्षेत्र में बुधवार दोप. 3 बजे लगभग 60 वर्ष पुराना शासनाधीन गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय भवन की ऊपरी जर्जर मंजिल भरभराकर गिर पड़ी। उस समय बस स्टैंड पर काफी चहल पहल भी थी। पर हादसे से कुछ समय पहले ही भवन में बड़ी दरारे देखकर लोग दूर होे गए है।

इसके चलते कोई जनहानि नहीं हुई। पर नीचे स्थित दुकानों में सामान को जरुर नुकसान हुआ है। लोगों का कहना है कि इस दान में मिले इस भवन को लेकर शासन ने शुरु से ही घोर लापरवाही रखी। इसका नतीजा यह हुआ कि भरभराकर धराशायी हो गई ।

सालों से रखरखाव नहीं होने के कारण गांधी सार्वजनिक वाचनालय का भवन जर्जर तो हो रही रहा था। बुधवार को दोपहर में दीवार में दरारे देखकर प्रशासन ने पहले ही भवन से लोगों को दूर कर दिया था। दोप. 3 बजे गांधी सार्वजनिक वाचनालय का जर्जर भवन भरभराकर नीचे आ गिरा।

लोगों में अफरा-तफरी मच गई एवं सभी लोगों के मन में यह आशंका थी कि कहीं कोई भवन के मलबे में दब नहीं गया हो। परंतु किसी के हताहत या घायल नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस ली। पुलिस एवं प्रशासन ने तत्काल यहां आकर लोगों को हटाकर मलबा हटाना शुरु कर दिया।

भाजपा कार्यालय से लेकर अन्य दुकाने है यहां कई वर्षों से जर्जर हो रहे गांधी सार्वजनिक वाचनालय के भवन में नीचे एवं ऊपर 10 किराएदार है जो खाद, किराना,मिठाई , पान की दुकान, लाज एवं भाजपा कार्यालय चलाते थे शेष भवन में कुल मिलाकर 18 किरायेदार मौजूद हैं।

गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय में प्रभावित एवं गिरे हुए भवन में वर्तमान में प्रभावित व्यापारियों में कोमलचंद कोरिया, राजेश कुमार जैन, पदम कुमार सेठी, सुनील कुमार मांदलिया,तुलसीराम पंजाबी, ओमप्रकाश तंबोली, रामलाल पंजाबी ,राजेंद्र कुमार सोनी ,मनोज कुमार सोनी एवं राधेश्याम सागित्रा थे।

शैष जर्जर किंतु बचे हुऐ गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय भवन में अन्य किरायेदारों में भंवरलाल तंबोली, रमेशचंद्र चौबे, जगदीश कजोड़ीमल तंबोली, डॉ. बीएल बंबोरिया, एड.महेश कुमार भटनागर व एड .गोविंद प्रसाद तिवारी किराएदार है।

दान देने का उद्देश्य ही समाप्त हो गया

पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने बताया कि गांधी सार्वजनिक वाचनालय भवन की भूमि मेरे नानाजी स्व. हरकचंद चौरड़िया द्वारा भूमि दान दी गई थी। इसका उद्देश्य लगभग समाप्त हो गया था एवं इसके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नाममात्र के किराये पर लोगों ने कब्जा कर रखा था।

पूरे भवन को गिराकर नया भवन बनाना चाहिए

नियमानुसार यहां गांधी सार्वजनिक वाचनालय को चलाया जाना चाहिए। बस स्टैंड पर जर्जर भवन रहना बहुत ही घातक था प्रशासन और कब्जाधारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। पूर्व नप अध्यक्ष राकेश कुमार चौरड़िया ने कहा कि यह सार्वजनिक संपत्ति है पुराने लोगों ने बहुत मेहनत करके इसको बनाया था दुर्दशा के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है अब बचे हुए भवन को गिराकर नया भवन बनवाना चाहिए।

यहां पर वाचनालय बने और कब्जाधारियों को हटाया जाए। उल्लेखनीय है कि इस सार्वजनिक हित के भवन में भाजपा एवं कांग्रेस के अनेक नेताओं ने अपने रुतबे का इस्तेमाल करके नाम मात्र के किराए पर किराएदार के रूप में अपने को काबीज रखा था।

दरार पड़ने की सूचना पर ही पहुंच गए थे

तहसीलदार नारायण नांदेड़ा ने बताया कि मुझे भवन में दरार पड़ने की सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गया था। और नीचे व्यवसायियों एवं लोगों को आस-पास से हटा दिया था। अब भवन के दस्तावेज देखकर जांच कर मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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