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बैलारी कांड : गोवा घूमने के शौकीन राकेश पाटीदार का हाथ अपराधियों के साथ ?


बैलारी कांड को लेकर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहा राकेश पाटीदार अपराधियों के परिजनों को लेकर भोपाल पहुँचा। कमलनाथ से मुलाकात करवाई और पुलिस कार्यवाही को लेकर नाराजगी व्यक्त की।

मन्दसौर। बड़े ही आश्चर्य की बात है कि कुख्यात बदमाशों तस्करों के विरुद्ध मंदसौर पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है, लेकिन यह सख्त कार्यवाही कांग्रेस का उपचुनाव में प्रत्याशी रह चुका राकेश पाटीदार हजम नहीं कर पा रहा है। उपचुनाव में हरदीप सिंह डंग से करारी शिकस्त खाने वाला राकेश पाटीदार अब अपराधियों के पक्ष में खड़ा हुआ नजर आ रहा है। जैसा कि जनचर्चा हमेशा रही है और राकेश पाटीदार के क्रियाकलाप भी कुछ ठीक नहीं रहे हैं, सूत्रों की माने तो राकेश के संबंध तस्करों से बहुत गहरे हैं, शायद इसीलिए पुलिस पर हमला करने वाले कुख्यात तस्कर अमजद लाला और उसके साथियों के विरुद्ध डीआईजी के निर्देशन में मंदसौर जिला पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में चल रही सराहनीय कार्यवाही को भी राकेश पाटीदार पचा नहीं पा रहा है। गोवा घूमने का शौकीन राकेश कुख्यात अपराधियों के परिजनों को अपने साथ लेकर भोपाल पहुंचा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात करवाई। वहां पुलिस कार्रवाई को सरासर गलत बताया और इस अच्छी कार्यवाही को रुकवाने के हथकंडे अपनाएं। चुनाव में बुरी तरह पछाड़ खा चुका राकेश पाटीदार समाज के लिए नासूर बन चुके लोगों के पक्ष में खड़ा होकर अपना बचा-कुचा राजनीतिक भविष्य भी बर्बाद कर रहा है। जो व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनना चाहता हो उसकी खुद की छवि साफ सुथरी होना चाहिए और उसके आसपास रहने वाले लोगों की छवि भी साफ स्वच्छ होना चाहिए, लेकिन राकेश पाटीदार के आसपास फोटो में कौन लोग खड़े है ये देखकर जनता को समझ जाना चाहिए कि राकेश कैसे लोगों को बढ़ावा देना चाहता है। राकेश ने बेलारी मामले को लेकर अपराधियों के पक्ष में खड़े होकर समाज को बता दिया है कि राकेश पाटीदार का हाथ अपराधियों के साथ है। ये सब जनता देखेगी तो क्या सोचेगी ये भी राकेश ने नहीं सोचा। शायद इसलिए नहीं सोचा कि जनता ने तो नकार दिया अब काम तो तस्कर और अपराधी ही आएगे ? वैसे चुनाव में हार का कारण भी राकेश पाटीदार की छवि ही बनी है, उस बिगड़ी हुई छवि को सुधारने की बजाय राकेश यहां एक बार फिर लड़खड़ा गया है।*तूफ़ानी कार्यवाही ठंडी क्यों पड़ गई ?*सीतामऊ टीआई अमित सोनी पर कुख्यात फरार तस्कर अमजद लाला ने फायरिंग की थी। इसके बाद सीतामऊ थाना क्षेत्र के गांव बेलारी से लेकर भोपाल तक इस घटना को लेकर पुलिस महकमा अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने को आतुर दिख रहा था। तूफानी कार्यवाही आखिर अचानक ठंडी कैसे पड़ गई ? 19 मकानों पर नोटिस चिपकाए गए और दो मकान तोड़कर प्रशासन चुप क्यों बैठ गया ? बताया गया था कि 5 मकानों को तोड़ने की अनुमति शुरुआत में ही मिल चुकी थी लेकिन सिर्फ दो ही मकान तोड़े गए और कार्यवाही ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। आनन-फानन में 50000 का ईनाम घोषित कर दिया, न जाने कहां-कहां से अमजद के संपर्क में आए लोगों को उठाकर पुलिस ले आई, मनावर में वसीम को उठाने गई और वो नहीं मिला तो उसके छोटे भाई को उठा लाई ? लेकिन अमजद हाथ नहीं लगा और पुलिस ने जो कहा था वह कार्रवाई भी नहीं हो रही है, क्या यही है माफिया का सफाया अभियान ?

क्या पुलिस पर कार्यवाही ना करने का दबाव आया है ?

बैलारी कांड के बाद पुलिस ने गुंडों के विरुद्ध जो कार्रवाई की उससे जनता में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी और वाकई पुलिस की कार्रवाई बहुत प्रशंसनीय थी। पुलिस अपना काम अंजाम तक पहुंचाना भी चाहती थी। लेकिन अचानक कार्यवाही में आई शिथिलता को देखते हुए लगता है कि पुलिस पर कार्रवाई न करने का कहीं ना कहीं से दबाव और वह भी तगड़ा दबाव आया है ? वरना बेलारी और सूरजनी से पठान गैंग का सफाया होना तय था। अगर पुलिस पर कार्रवाई न करने का दबाव आया है तो इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता। पुलिस को खून का घूंट पीना पड़ेगा। वरना वर्दी पर हाथ उठाने वाले के हाथ काट दिए जाते हैं और होना भी यही चाहिए। क्योंकि जनता के रक्षक ही सुरक्षित नहीं होंगे तो वो जनता की रक्षा कैसे करेंगे

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