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भाजपा का दौहरा चरित्र – केरल में शुद्ध बीफ’सप्लाई के वादे के साथ जनता से वोट मांग रही

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गाय वास्तव में राजनीतिक कामधेनु है। हैरानी की बात है कि गुजरात में गोहत्या पर उम्रकैद का कानून बनाने वाली भाजपा केरल में शुद्ध बीफ’सप्लाई के वादे के साथ जनता से वोट मांग रही है। वहां मल्लापुरम विधानसभा उप चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी ने वादा किया है कि अगर वह चुनाव जीता तो  लोगों को ‘अच्छे बीफ’ की सप्लाई सुनिश्चित करेगा। मल्लापुरम में 12 अप्रैल को चुनाव होना है। बीजेपी के उम्मीदवार एन श्रीप्रकाश ने कहा, ‘मेरी तरफ से यह कोशिश होगी  कि साफ सुथरे बूचड़खाने और अच्छी क्वालिटी का बीफ सप्लाई सुनिश्चित हो। इन जनाब ने कांग्रेस पर आरोप जड़ा कि उसने कुछ राज्यों में सत्ता में रहते हुए गोहत्या पर बैन लगाया। हालांकि केरल में बीफ गोमांस की बिक्री पर कोई रोक नहीं है। केरल में बड़ी आबादी मुसलमानों और ईसाइयों की है और मल्लाप्पुरम ‍जिले  में तो मुस्लिम आबादी 70 फीसदी है। यह देश का पहला ई- साक्षर जिला भी है। लिहाजा भाजपा को वोट के लिए बीफ की वकालत करनी पड़ रही है। श्रीनिवास का यह स्टैंड गो पट्टी में भाजपा के उस परंपरागत रूख से एकदम विपरीत है, जहां पार्टी इसे जीने- मरने का सवाल और हिंदुअों को एक रखने का आधार मान रही है। यूपी, झारखंड और अब बिहार में भी अवैध बूचड़खानों  पर गाज इसीलिए गिर रही है कि वे गोवंश का मांस सप्लाई कर रहे थे।
दरअसल डेढ़ साल पहले बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त जोरों से उठा गाय और गोमांस का मुददा भाजपा की हार के बाद ठंडा पड़ गया था। लेकिन यूपी में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के पश्चात योगी सरकार द्वारा राज्य में अवैध बूचड़खाने बंद कराने की सख्त मुहिम चलाए जाने  से अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी गोहत्या पर कड़ाई से रोक की नई प्रतिस्पर्द्धा सी  चल पड़ी है। हर मुख्यमंत्री खुद को योगी से ज्यादा गोभक्त दिखाने में लगा है। इसी के चलते गुजरात में गोहत्या पर उम्रकैद जैसा कड़ा कानून बना तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह ने गोकशी करने वालों  को फांसी देने की वकालत कर डाली। यह बात अलग है ‍िक इतना करने के बावजूद इन मुख्यतमंत्रयों को योगी के मुकाबिल टीआरपी  नहीं मिल पा रही। उधर एआईएमआईएम के नेता सलाउददीन अोवैसी ने बीफ को लेकर भाजपा पर गहरा तंज किया कि उसके लिए बीफ यूपी में ‘ममी’ है तो उत्तर पूर्व में ‘यम्मी’ है। अर्थात भाजपा के लिए यूपी में गोमाता है तो पूर्वोत्तर में वही ‘स्वादिष्ट’ मांसाहार का कारण है। अोवैसी की बात में दम इसलिए है कि नागालैंड के भाजपा प्रमुख विससोली  हाऊंगू ने हाल में कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ यूपी जैसा कोई अभियान चलाने का इरादा नहीं है। ऐसी ही बात मेघालय प्रदेश भाजपा के महासचिव डेविड खरसाती ने भी कही। उन्होने कहा कि इन राज्यों में बीफ बैन का सवाल ही नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों में बहुसंख्य आबादी ईसाइयों की है। बीफ खाना इनके लिए सामान्य बात है और गाय उनकी नजर में मात्र एक दुधारू पशु है।
सवाल यह है कि गाय और गोमांस पर पार्टी का अलग- अलग राज्यों में अलग- अलग स्टैंड क्यों है? गोहत्या गो पट्टी के राज्यों में महापाप है। लेकिन वही  बात पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों पर लागू क्यों नहीं होती। क्या गाय की पवित्रता निर्धारण का आधार उसके नैसर्गिक गुण हैं या ‍िफर उसके राजनीतिक दोहन की क्षमता ? गाय अगर पवित्र है, (वह है भी) तो फिर इसके लिए जनसांख्यिरक दृष्टि से अलग- अलग मानदंड रचने की जरूरत क्यों हैं? होना तो यह चाहिए कि गाय और गोमांस पर प्रतिबंधात्मक कानून बनाकर पूरे देश में एक साथ लागू हो। क्यों हर राज्य  अपना अलग कानून बनाकर गायों को कटने से बचाने की कोािश में लगा है ?  गाय की पवित्रता दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में क्यों बरकरार नहीं पाती?  जबकि इनमें से कुछ राज्यों में गाय को माता मानने वाली हिंदू आबादी अल्प संख्या में ही सही, रहती  तो है। ऐसा तो नहीं है कि इन राज्यों में रहने वाले हिंदुअों की गोभक्ति में कोई कमी हो। और जब गाय और गोमांस का मुद्दा देश के अधिकांश राज्यों में ‘जीवन मरण’ का प्रश्न बना दिया गया हो, तब इन चुनिंदा राज्यों को गो आग्रहों से मुक्त रखने के पीछे कौन सी राजनीतिक‍ विवशता है? या तो पार्टी मानती है कि जिन राज्यों में गोरक्षा से वोट मिलते हों, वहां वैसे लिए जाएं और जिन राज्यों में ऐसा करने से बचने के कारण वोट मिलते हो तो वैसे लिए जाएं। अर्थात यहां गाय से ज्यादा महत्वपूर्ण है वोटों का दोहन।
गाय हर हिंदू के लिए अत्यंत पवित्र प्राणी है। गाय स्वयं देवता स्वरूप है और 33 कोटि देवताअों का घर भी है। वैदिक काल में वह आर्यों की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ थी। आज भी गाय गोपालकों का एक आर्थिक स्रोत है।  वेदों में कहा गया है कि ‘धेनु सदानाम रईनाम्। अर्थात गाय समृद्धि का मूल स्रोत है। गाय का हर अंग और उत्पाद उपयोगी है। वह ममता की प्रतिमूर्ति है। उसे पूजना ईश्वर आराधना जैसा है। लेकिन गायों के राजनीतिक देवत्व का पता खुद गायों को भी नहीं है। गाय और बीफ पर सुविधानसुार राजनीति से वोट तो मिल सकते  हैं,  लेकिन नैतिकता की वैतरणी भी पार होगी, ऐसा मान लेना खुद को मुगालते में रखना है।


केरल में भाजपा का वादाः अगर जीते तो खोलेंगे बूचड़खाने

जो भारतीय जनता पार्टी यूपी में बूचड़खाना बंद कराने का वादा करके चुनाव जीती थी, वही भाजपा केरल में बूचड़खाना खुलवाने का वादा करके चुनाव लड़ रही है। मलप्पुरम संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी एन श्रीप्रकाश शनिवार को पसंदीदा भोजन के चयन को सही ठहरा चुके हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि उपचुनाव जीतने की स्थिति में वह अपने संसदीय क्षेत्र में वैध बूचड़खाना खुलवाना सुनिश्चित करेंगे।

उनके इस बयान के बाद बूचड़खानों पर शुरू हुए हंगामे के बीच केरल भाजपा ने बीफ का समर्थन किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य महासचिव एमटी रमेश ने रविवार को यहां कहा कि केरल में बीफ पर प्रतिबंध नहीं है, ऐसे में इसका सेवन करने में कुछ भी गलत नहीं है।

रमेश ने भाजपा प्रत्याशी के बयान को सही ठहराते हुए कहा, केरल में बीफ प्रतिबंधित नहीं है, ऐसे में लोग जो चाहे खा सकते हैं। भाजपा की राज्य इकाई इसके खिलाफ नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में गोमांस प्रतिबंधित है, भैंस का मांस नहीं।

आप  मुझे वोट दीजिए,  मैं यहां अच्छे बूचड़खाने (स्लॉटर हाउस) खुलवाउंगा। ये नारा है केरल के बीजेपी नेता का। केरल के मलप्पुरम लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवार एन श्रीप्रकाश इसी नारे के साथ चुनावी जंग जीतने की तैयारी में हैं। बीफ को लेकर श्रीप्रकाश अपनी ही पार्टी के नेताओं से अलग विचार रखते हैं। शनिवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि गुजरात में गोहत्या पर उम्रकैद के बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी गोहत्या के खिलाफ है बीफ के खिलाफ नहीं।

बीजेपी नेता ने कहा कि हम अपनी पसंद का भोजन चुनते हैं तो इसमें दिक्कत क्या है? बीफ पर रोक नहीं लगाई गई है, रोक सिर्फ गोहत्या पर लगाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसे गलत तरीके प्रचारित कर लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं। श्रीप्रकाश ने कहा कि अगर मैं जीतता हूं तो अच्छी गुणवत्ता का बीफ देने वाले स्लॉटर हाउस खुलवाउंगा। कांग्रेस के समय कई राज्यों में बीफ पर रोक लगाई गई थी। दुर्भाग्यवश कुछ राज्यों में मरे हुए जानवरों के मांस को भोजन के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

दरअसल, श्रीप्रकाश को ये बात अच्छी तरह से पता है कि मलप्पुरम मुस्लिम बहुल आबादी वाला क्षेत्र है और यहां बीफ के बारे में पार्टी की विचारधारा के साथ खड़े रहने से नुकसान ही होगा। बीजेपी उम्मीदवार का बीफ के बारे में इस तरह का बयान पार्टी के मौकापरस्त चेहरे को भी दिखाता है। दो दिन पहले ही पूर्वोत्तर में पार्टी के नेताओं ने कहा था कि वे इस क्षेत्र में बीफ पर प्रतिबंध के बारे में वे सोच भी नहीं सकते। पार्टी नेताओं का यह बयान उसी दिन आया जब गुजरात में बीजेपी सरकार ने गाय का कत्ल करने वालों को उम्रकैद की सजा देने का बिल पारित किया था। वहीं छत्तीसगढ़ के बीजेपी मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आज कहा कि उनकी सरकार गायों को मारने वालों को लटका देगी।

मुस्लिम लीग के सांसद ई अहमद के निधन से मलप्पुरम निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है। केंद्रीय बजट पेश होने के एक दिन पहले संसद के अंदर ही उनकी तबित बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। विपक्ष का आरोप था कि बजट सत्र को बीच में रोकना ना पड़े इसके लिए उनकी मौत की खबर को कई घंटों तक दबाकर रखा गया। अहमद के परिवार को उन्हें देखने के लिए अस्पताल जाने की अनुमति तक नहीं दी गई थी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कांग्रेस के अन्य नेता भी अहमद को देखने के लिए अस्पताल गए, लेकिन उन्हें भी मिलने की इजाजत नहीं मिली। अहमद के दामाद ने कहा था कि मैं और मेरी पत्नी दोनों डाक्टर हैं, लेकिन मुझे ये नहीं समझ में आया है कि हमें उनसे मिलने क्यों नहीं दिया गया?

Post source : अजय बोकिल

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