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Buddha Purnima 2017: बुद्ध पूर्णिमा: महत्व, मान्याताएं और प्रावधान

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती और उनके निर्वाण दिवस दोनों के ही तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन भगवान बुद्ध को बौध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। यह बुद्ध अनुयायियों का बड़ा त्योहार है। इस दिन को लोग बेहद ही धूमधाम के साथ मनाते हैं क्योंकि विश्वभर में करोड़ो लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। बता दें कि ऐसे कहा जाता है बुद्ध विष्णु भगवान के नौवें अवतार हैं। बुद्ध पूर्णिमा का त्यौहार हिंदुओं के लिए पवित्र माना जाता है।

अगर आप बुध पूर्णिमा के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि इस एक दिन से आपकी किस्मत पलट सकती है। बुध पूर्णिंमा एक ऐसा दिन होता है जब आप दान-पुण्य करके अपनी किस्मत को चमका सकते हैं। आइये आपको बुध पूर्णिमा का महत्त्व और इसके राज के बारे में बताते हैं। बुध पूर्णिमा बौद्ध धर्म अनुयायियों का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दिन बौद्ध धर्म को मानने वाले कई तरह के समारोह आयोजित करते हैं। दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयायी इसे अपने अपने तरीके से मनाते हैं।

कौन थे गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध भगवान का जन्म (563 ईसा पूर्व-निर्वाण 483 ईसा पूर्व) को हुआ, वह विश्व महान दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मगुरु और उच्च कोटी के समाज सुधारक थे। वह बुद्ध प्राचीनतम धर्मों में से एक महान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। उनका जन्म राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था, उनकी माता का नाम महामाया था, सात दिन बाद ही उनकी मां की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद महाप्रजापती गौतमी ने उनका पालन किया। शादी के बाद वह संसार को दुखों से मुक्ति का मार्ग दिलाने के लिए पत्नी और बेटे को छोड़कर निकल गए थे। सालों कठोर साधना करने के बाद वह बोध गया (बिहार) में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए।
शांति की खोज में कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ 27 वर्ष की उम्र में घर-परिवार, राजपाट आदि छोड़कर चले गए थे। भ्रमण करते हुए सिद्धार्थ काशी के समीप सारनाथ पहुंचे जहाँ उन्होंने धर्म परिवर्तन किया। यहाँ उन्होंने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचें कठोर तप किया। कठोर तपस्या के बाद सिद्धार्थ को बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह महान सन्यासी गौतम बुद्ध के नाम से प्रचलित हुए और अपने ज्ञान से समूचे विश्व को ज्योतिमान किया।
ऐसे करें पूजा
अलग-अलग देशों में ववहां के रीति-रिवाज के अनुसार ही पूजा की जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर को फूलों से सजाने के बाद दीप जलाएं जाते हैं। पूजा पाठ करने के बाद बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। वृक्ष की जड़ में दूध और सुगंधित पानी डालते हैं और दीपक जलाते हैं।

मान्यताएं

  • माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु का ने अपने नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया। यह नौवां अवतार था भगवान बुद्ध का। इसी उनका निर्वाण हुआ।
  • इसी दिन को सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा गरीबी के दिनों में उनसे मिलने पहुंचे। इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे थे, तो कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई।
  • इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं। माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्‍न होने से अकाल मौत का ड़र कम हो जाता है।
  • कहते है कि अगर बुध पूर्णिमा के दिन धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान किये जाएं तो सबसे बड़े दान गोदान के बराबर फल मिलता है।
  • हिन्दू मान्यता के अनुसार बुध पूर्णिमा के दिन पांच या सात ब्राह्मणों को मीठे तिल दान करने चाहिए। ऐसा करने से पापों का नाश होता है।
  • मान्यता यह भी है क़ि बुध पूर्णिमा के दिन अगर एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चन्द्रमा या सत्यनारायण का व्रत किया जाए, तो जीवन में कोई कष्ट नहीं होता।
  • श्रीलंका में बुध पूर्णिमा को काफी हद तक भारत की दीपावली की तरह मनाया जाता है, यहाँ इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं। घरों और प्रांगणों को फूलों से सजाया जाता है।
  • बुध पूर्णिमा के दिन लखनऊ के गोमती नदी किनारे बनारस के घाट की तर्ज पर महंत दिव्यागिरि जी महाराज गोमती आरती करती हैं।
  • बुध पूर्णिमा के दिन बोधगया में काफी लोग आते हैं, दुनिया भर से बौद्ध धर्म को मानने वाले यहां आते हैं।
  • बुध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है, बोधिवृक्ष बिहार के गया जिले में बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में हैं, वास्तव में यह एक पील का पेड़ है। मान्यता है कि इसी पेड़ के नीचे ईसा पूर्व 531 में भगवान् बुध को बोध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  • बुध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की टहनियों को भी सजाया जाता है, इसकी जड़ों में दूध और इत्र डाला जाता है और दीपक जलाए जाते हैं।
  • कुछ लोग बुध पूर्णिमा के दिन पंक्षियों को भी पिंजरों से आजाद करते हैं।

स्नान का महत्त्व
हिंदुओं में हर महीने की पूर्णिमा विष्णु भगवान को समर्पित होती है. इस दिन तीर्थ स्थलों में गंगा स्नान का लाभदायक और पाप नाशक माना जाता है. लेकिन वैशाख पूर्णिमा का अपना-अलग ही महत्व है. इसका कारण यह बताया जाता है‍ कि इस माह होने वाली पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है. इतना ही नहीं चांद भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है. कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन लिया स्नान कई जन्मों के पापों का नाश करता है.

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