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मन्‍दसौर भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक जिला है। मन्‍दसौर का प्राचिन नाम दशपुर था ! पुरातात्विक और ऐतिहासिक विरासत को संजोए उत्तरी मध्य प्रदेश का मन्‍दसौर एक ऐतिहासिक शहर है। भारत की आजादी के पहले यह ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। ऐतिहासिक महत्त्व और भारत की सांस्कृतिक विरासत के कई अमूल्य चिह्न यहाँ दिखाई देते हैं। मन्‍दसौर हिन्दू और जैन मंदिरों के लिए खासा लोकप्रिय है। पशुपतिनाथ मंदिर, बाही पारसनाथ जैन मंदिर, धर्मराजेश्वर और गांधी सागर बांध यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल हैं। शिवना नदी के किनारे स्थित भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के कारण यह देश भर में प्रसिद्ध है। इसे नेपाल के काठमांडु स्थित भगवान पशुपतिनाथ के समान ही माना गया है। यहां मालवी बोली बोली जाती है। जो राजस्थानी और हिन्दी की मिश्रित भाषा है। यहां अफीम का उत्पादन विश्व में सबसे अधिक होता है। इस कारण भी यह जिला पूरे विश्व में जाना जाता है। स्लेट-पैंसिल उद्योग जिले का महत्वपूर्ण उद्योग है।
मध्‍यप्रेदश के उत्‍तरी पश्चिमी भाग में मालवा के पठार पर स्थित मन्‍दसौर जिले की अधिकांश सीमा राजस्थान सीमा को स्पर्श करती है। 5535 वर्ग किमी वाले जिले में जनसंख्या का घनत्व 242 प्रति वर्ग किमी है । 2011 की जनगणना के अनुसार मन्‍दसौर जिले में कुल 944 गाँव है । यह प्रदेश का औसत क्षेत्रफल वाला जिला है। जो 142 कि॰मी॰ उत्तर से दक्षिण और 124 कि॰मी॰ पूर्व से पश्चिम की ओर फैला हुआ है। जिला पश्चिम में अजमेर रतलाम व पूर्व में दिल्ली मुम्बई पश्चिम रेलवे लाईन से जुडा है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं 79 मन्‍दसौर शहर से गुजरता है । मन्‍दसौर मप्र के उत्तर में स्थित है जो उज्जैन कमिश्नर संभाग के अंतर्गत आता है।
भौगोलिक दष्‍टि से यह जिला 230°45°50°° अक्षांश उत्तर और 250°2°55°° अक्षांश उत्तर सामानांतर तथा 740°42°30°° पूर्व और 750°50°20°° पूर्व के मध्य स्थित है। समुद्र तल से लगभग 1516 फीट उचॉई पर स्‍थित हैं । यह जिला राजस्थान के चार जिलों पश्चिम और चित्तौड़गढ़, उत्तर में भीलवाड़ा, उत्तर-पूर्व में कोटा और पूर्व में झालावाड़ के साथ ही दक्षिण में मध्य प्रदेश के रतलाम व उत्तर में नीमच जिले की सीमा से लगा हुआ है। मन्‍दसौर के तीन और से राजस्‍थान के समीप होने के कारण इसे राजस्‍थान का सीमान्‍त प्रहरी एवं मालवा का सिंह द्वार भी कहा गया है। मन्‍दसौर क्षेत्र अरावली तथा विंध्‍य पर्वत श्रृखॅलाए क्रमश: उत्‍तर पश्चिम तथा दक्षिण पुर्व में फैली हैं । यहॉ की मिटटी अत्‍यन्‍त उपजाउ हैं, जो कि अफीम की खेती के लिए विश्‍वभर में प्रसिध्‍द हैं । इसी शस्‍य- श्‍यामलता के कारण दशपुर लोकजगत में अन्‍नापूर्ण का वरदान कहा गया हैं । धन धन्‍य से परिपूर्ण इस क्षेत्र में उर्वरा भूमि के लिये के कबीर ने कहा हैं – मालवा भूमि गहन गम्‍भीर पग-पग रोटी डग-डग नीर यहां की जलवायु सुखद हैं, न अधिक गर्मी न अधिक सर्दी । यहॉ वर्षा का औसत 65 से 80 के बीच रहता हैं । यह क्षेत्र प्राकृतिक सम्‍पदा एवं वन्‍य प्राणियों से परिपूर्ण हैं । खनिज सम्‍पदा स्‍लेट पेन्सिल, यहॉ के आर्थिक जीवन पर प्रभाव डालती हैं । स्‍लेट पेन्सिल को सफेद सोने की संज्ञा दी जाती हैं। यह जिला 8 तहसीलों मन्‍दसौर, मल्‍हारगढ़, गरोठ, भानपुरा, सीतामऊ, सुवासरा, शामगढ़, दलोदा में बंटा हुआ है।
भारत जनगणना 2011 के अनुसार जारी किये गये आकणों के अनुसार मन्‍दसौर जिले की आबादी 13,40,411 है जिसमें से पुरुष और महिला 6,82,851 और 6,57,560 क्रमशः है । जबकि 2001 की जनगणना में मन्‍दसौर जिले की कुल आबादी 11,83,724 थी, जिसमें पुरुष 6,05,119 और महिलाए 5,78,605 थी ।

मंदसौर जिला तथ्य
राज्यमध्य प्रदेश
जिलामंदसौर
जिला मुख्यालयमंदसौर
जनसंख्या (2011)1965970
विकास0.2344
लिंग अनुपात840
साक्षरता71.03
क्षेत्रफल (वर्ग किमी)5530
घनत्व (/ वर्ग किमी)242
तहसीलमंदसौर, मल्हारगढ़, गरोठ, शामगढत्र, दुलोदा, भानुपरा, सुवासर, सितामउ
लोकसभा क्षेत्रमंदसौर
विधानसभा क्षेत्रमंदसौर, मल्हारगढ़, गरोठ, सुवासर
भाषाएंमालवी, हिंदी
नदियां
अक्षांश-देशांतर
पर्यटन स्थलभगवान पशुपतिनाथ मंदिर, नालचा माता मंदिर, गांधी सागर बांध, बुद्ध गुफा, चामुंडा माता मंदिर, यशवंतराय कोठारी की छतरी, कपिलेयवर मंदिर, अंबे माता मंदिर, नीलकंठेश्वर महादेव, मल्काना आश्रम आदि
शासकीय कॉलेज-विश्वविद्यालयउडिया पीजी कॉलेज गरोठ, प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी शासकीय कॉलेज, शासकीय कॉलेज सितामउ, राजीव गांधी शासकीय कॉलेज, शासकीय कॉलेज पीपरिया मंडी, शासकीय संगीत कॉलेज आदि