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GST को लेकर नगरपालिका सभाकक्ष में आयोजित हुई कार्यशाला

मंदसौर। चैंबर ऑफ कॉमर्सएवं दशपुर मंडी व्यापारी संघ के तत्वावधान में रविवार को शहर के नगरपालिका सभाकक्ष में कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में जीएसटी को लेकर व्यापारियों की जिज्ञासाओं व सवालों का समाधान किया। इसमें सूरत गुजरात के सीएस पीयूष कोतक व सिद्धार्थविजयवर्गीय ने व्यापारियों को विभिन्न जानकारियां दी। सीएस पीयूष व सिद्धार्थ ने बताया कि जीएसटी में वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन टैक्स वसूले जाएंगे। पहला सीजीएसटी यानी सेंट्रल जीएसटी जो केंद्र सरकार वसूलेगी। दूसरा एसजीएसटी यानी स्टेट जीएसटी जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी। कोई कारोबार अगर दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आइजीएसटी यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाएगा। इसे केंद्र सरकार वसूल करेगी और उसे दोनों राज्यों में समान अनुपात में बांट दिया जाएगा। कार्यशाला में कर सलाहकार व व्यापारी उपस्थित थे। चैंबर ऑफकॉमर्स के अध्यक्ष अभय डोसी ने बताया कि शीघ्र ही कर सलाहकार संघ व सीए एसोसिएशन के मार्गदर्शन में अलग- अलग व्यापार की अलग- अलग बैठके होगी। शीघ्र ही इसकी जानकारी दी जाएगी।

सर्विस देने वालों पर असर

सीए पीयूष ने बताया कि अभी सर्विस टैक्स में रजिस्ट्रेशन केंद्रीयकृत है। इसके चलते इनपुट सर्विस टैक्स पूरे देश में कहीं भी सेवा देने पर उपयोग किया जा सकता है। जीएसटी के तहत राज्य के आधार पर रजिस्ट्रेशन होगा। जो जिस राज्य में सेवा दे रहा है उसे वहीं रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। एक राज्य के सीजीएसटी और एसजीएसटी को दूसरे राज्य के सीजीएसटी और एसजीएसटी से सेटऑफ नहीं किया जा सकेगा। मतलब किसी सेवा देने वाले की दो राज्यों में ब्रांच है तो उसको कार्यशील पूंजी में दिक्कत आ सकती है। साथ ही जीएसटी की दरें 5, 12, 18 और 28 फीसदी के स्लैब में तय होंगी। सेवाओं को 18 फीसदी के दायरे में लाया जा रहा है। अभी सर्विस टैक्स 15 फीसदी है जीएसटी में ये 3 फीसदी बढ़कर 18 फीसदी हो जाएगा। इससे भी आपकी अतिरिक्त पूंजी जाएगी। कुल मिलाकर अगर आप जीएसटी के तहत कोई कारोबार कर रहे हैं तो अपने कारोबार को चलाने के लिए कार्यशील पूंजी का प्रबंधन बेहतर तरीके से करना होगा।

इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था में बदलाव

कार्यशाला में बताया गया कि मौजूदा टैक्स सिस्टम में इनपुट टैक्स क्र्रेडिट उसी इनपुट पर मिलती है जो आपके टैक्स आउटपुट से जुड़ा है। अगर कोई व्यापारी खरीद करता है तो उसको वैट इनपुट पर क्रेडिट तभी मिलेगा जब उसकी बिक्री हुई हो। अगर कारोबार के लिए कोई खर्च किया है तो उसका के्रेडिट नहीं मिलेगा। मान लीजिए अगर किसी व्यापारी ने विज्ञापन सेवा पर सर्विस टैक्स दिया है तो उसको क्रेडिट नहीं मिलेगा। ये कारोबार का खर्च माना जाएगा। जीएसटी में इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके तहत कारोबार से जुड़े किसी इनपुट या सेवा के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा। नई व्यवस्था में अब ऊपर जिस व्यापारी का उदाहरण दिया है वो इनपुट का टैक्स क्रेडिट ले सकता है। इसके लिए कारोबारियों को रटिस्टर्ड कारोबारियों और सेवा देने वालों से खरीद करनी होगी।

एडवांस पर भी टैक्स

जीएसटी के तहत बाद की तारीख में सामान या सेवा देने के लिए किसी ने एडवांस लिया है तो उसे एडवांस मिलने की तारीख को टैक्स देना होगा। अभी सिर्फ सर्विस टैक्स में एडवांस पर टैक्स देने की व्यवस्था है। इससे उन कंपनियों पर असर पड़ेगा जो सामान की सप्लाई करती हैं। अभी किसी मैन्युफैक्चरर या ट्रेडर को एडवांस पर टैक्स नहीं देना होता है पर जीएसटी में ये देना होगा। एडवांस रसीद पर सप्लायर टैक्स देगा पर सामान लेने वाले को उसका इनपुट टैक्स क्रेडिट तुरंत नहीं मिल पाएगा। क्रेडिट टैक्स बिल मिलने के बाद ही उपलब्ध हो पाएगा। इसलिए कोई भी कॉन्ट्रैक्ट करते समय इस एडवांस क्लॉज का जरूर ध्यान रखें।

क्या बिक्री होने से पहले टैक्स चुकाना होगा

बताया गया कि कोई व्यापारी अलग-अलग टैक्स दरों वाला सामान एक पैकेट में रखकर बेचता है तो उस पर जीएसटी में टैक्स की लागू होने वाली दर क्या होगी। व्यवसायी ने पूछा कि क्या बिक्री होने से पहले ही कर चुकाना जरूरी होगा। जवाब में बताया गया कि कोई व्यक्ति एक ही पैकिंग में 5, 12, 18 या 28 प्रतिशत की टैक्स दर वाली वस्तुओं को एक साथ एक ही मूल्य पर बेचता है तो ऐसे माल की बिक्री पर कर की वह दर लागू होगी जो अधिकतम होगी। अब तक वैट के अंतर्गत माल की बिक्री पर टैक्स देयता आती थी जबकि जीएसटी में माल या सेवा की सप्लाय पर ही कर दायित्व लागू हो जाता है। किसी व्यापारी ने जीएसटी लागू होने के 6 महीने पहले वैट एक्ट के अंतर्गत माल बेचा है और वह जीएसटी लागू होने के छह महीने बाद तक भी प्राप्त होता है जो उस पर जीएसटी के अंतर्गत कोई कर लागू नहीं होगा।

मौजूदा स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लागू होगा

नए जीएसटी नियमों के तहत मौजूदा स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लागू होगा। पुराने स्टॉक पर पूरा टैक्स क्रेडिट नहीं लागू होगा। आवेदन के 6 0 दिन के भीतर जीएसटी का सिर्फ 40 फीसदी इनपुट टैक्स क्रेडिट होगा। कारोबारी को 6 0 दिन के भीतर स्टॉक डिटेल देना होगा। अगर पहले से टैक्स बकाया है तो इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं होगा।

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