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परीक्षा के दिनों में अवश्य करें इन योगासनों का अभ्यास, होगा बड़ा लाभ

यह एक ऐसा आसन है जो बच्चों के लिए बेहद लाभकारी है क्योंकि इससे बच्चों का तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है और स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है। इस आसन के अभ्यास के लिए जमीन पर उल्टे होकर लेट जाएं।

जैसे−जैसे परीक्षा के दिन नजदीक आते हैं, अभिभावकों और बच्चों दोनों में तनाव बढ़ने लगता है। अत्यधिक तनाव के कारण बच्चों की स्मरण शक्ति भी कमजोर होती है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि तन−मन दोनों को शांत रखने के प्रयास किए जाएं और कुछ ऐसे योगासनों का अभ्यास किए जाए, जिससे बच्चों की स्मरण शक्ति का विकास हो। तो चलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में बताते हैं, जो परीक्षा के दिनों में बच्चों के लिए काफी मददगार हो सकते हैं−

भुजंगासन
यह एक ऐसा आसन है जो बच्चों के लिए बेहद लाभकारी है क्योंकि इससे बच्चों का तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है और स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है। इस आसन के अभ्यास के लिए जमीन पर उल्टे होकर लेट जाएं। इसे बाद अपने दोनों हाथों को अपने फेफड़ों से सटाकर जमीन पर रखें और शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं। कुछ क्षण इस स्थिति में रूकने के बाद वापिस लौट आएं।

गरूड़ासन
गरूड़ासन बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने के साथ−साथ तनाव को भी दूर करने में मददगार है। इसलिए अगर परीक्षा के दिनों में इसका अभ्यास किया जाए तो विशेष लाभ होता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए पहले एड़ी व पंजे मिलाकर और हाथों को पैरों के बाहर लगाकर खड़े हो जाएं। अब दाएं हाथ को सीधा ऊपर उठाएं। अब उसे कोहनी से मोड़कर मुंह से समान लाएं। इसके बाद बाएं पैर को ऊपर उठाकर उसे दाएं हाथ  की कोहनी से जोड़ से ऊपर रखें। दोनों हथेलियों को घुमाकर एक−दूसरे पर रखें और नमस्कार मुद्रा बनाएं। अब मेरूदंड को सीधा रखते हुए दाएं घुटने को मोड़ें। अब बाएं घुटने को दाईं जंघा पर रखें और पंजे को पिंडली में फंसाएं। कुछ क्षण इस स्थिति में रूकें। अब श्वास छोड़ते हुए पहले की स्थिति में आएं। अब यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

 

बालासन
चूंकि परीक्षा के दिनों में बच्चे लगातार कई घंटों तक पढ़ने के कारण काफी थक जाते हैं, जिससे अनिद्रा, तनाव व चिड़चिड़ेपन का अहसास होता है। इस स्थिति से निपटने में बालासन काफी मददगार है। इसका अभ्यास करने से बच्चों को बेहद शांति और सुकून का अहसास होता है। इसके अभ्यास के लिए सबसे पहले पलथी लगाकर अपनी ऐडियों पर बैठें और शरीर के ऊपरी भाग को जंघाओं पर टिकाएं। अब सिर को जमीन से लगाएं। साथ ही अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और हथेलियों को जमीन से लगाएं। अब अपने हिप्स को ऐडियों की ओर ले जाते हुए सांस छोड़ें। इस अवस्था में कुछ क्षण रहें और फिर पहले वाली स्थिति में लौट आएं।

-मिताली जैन

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