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MP Board में  NCERT कोर्स होगा लागू, कॉलेज में चालू होगी वार्षिक प्रणाली, सेमेस्टर की होगी विदाई

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नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ होने के साथ ही इस बार पढ़ाई का पैटर्न नीचे से लेकर ऊपर अर्थात स्कूल से लेकर कॉलेज तक बहुत कुछ बदलने वाला है। इसको लेकर स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग में कवायद शुरू हो गई है। कुछ निर्णय हो चुके हैं तो कुछ में नियमों के तहत शुरूआत हो चुकी है। सब कुछ सही रहा तो जुलाई/अगस्त से पढ़ाई का पूरा पैटर्न ही बदला नजर आने वाला है। परीक्षा के दौरान अगर पर्यवेक्षक अपने पास मोबाइल रखे हुए मिलते हैं तो उनका मोबाइल जब्त भी किया जा सकता है। उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती हैं। वर्ष 2017-18 के शैक्षणिक सत्र में पहले बदलाव की शुरूआत होगी5वीं और 8वीं बोर्ड से, ये क्लासें अब बोर्ड परीक्षाओं में बदल जाएंगी। इसी के साथ कक्षा 1 से 7वीं तक के छात्रों को नए सत्र से एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई जाएगी। दो चरणों में ये बदलाव नए शैक्षणिक कैलेण्डर यानी न्यू सीजन से लागू किया जाना है। स्कूली शिक्षा से अलग कॉलेजों में नए सत्र से ही सेमेस्टर प्रणाली को विदाई दी जाने वाली है। कॉलेज की स्नातक परीक्षाएं अब वार्षिक प्रणाली से ली जाने वाली हैं। इसको लेकर सिलेबस में जरूरी बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड ऑफ  स्टटीज को वार्षिक प्रणाली का सिलेबस तैयार करने के निर्देश भी दे दिये गये हैं। इस तरह छोटी से बड़ी क्लास शिक्षा के पैटर्न में चेंज की शुरूआत होने वाली है। एटीकेटी नहीं सीधे फेल सेमेस्टर प्रणाली में अभी तक छात्र को दो विषयों में फेल होने पर एटीकेटी अगली क्लास में भी जाकर ऐसी परीक्षाएं दे सकता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला। छात्र को दो विषयों में पूरक आने पर उसे कक्षा में फेल कर दिया जाएगा। वार्षिक प्रणाली का पुराना नियम आने वाला है। उच्च शिक्षा विभाग इसको लागू करने को लेकर कोशिश शुरू कर चुका है। अभी तक थ्योरी 85 अंक और 15 नंबर असाइनमेंट के होते हैं,लेकिन अब पेपर सीधे 100 नंबर का होने वाला है। प्रैक्टिकल 50 नंबर का होगा।दो चरणों में

एनसीईआरटी कोर्स पहली खेप में कक्षा 1 से 7 और 9वीं से 11वीं एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई जाएगी। दूसरे चरण में अगले शिक्षण सत्र यानी 2018-19 से 8वीं के अलावा 10वीं और 12वीं में भी एनसीईआरटी कोर्स लागू किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि एनसीईआरटी का कोर्स लागू होने से शिक्षा नीति एक जैसी होगी। स्कूलों की किताब एक सी होने से जो भी प्रतियोगी परीक्षाएं होंगी,उनमें भाग लेने में बच्चों को सहूलियत होगी। छात्रों को उसी स्तर पर ज्ञान रहेगाए जैसा अभी तक अन्य राज्यों के छात्रों को होता है। केन्द्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने में छात्रों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सकता है। छोटी क्लास पास करना जरूरी 5वीं और 8वीं बोर्ड होने के बाद अब ऐसा नहीं होगा कि छात्र को ई ग्रेड भी आया है तो उसको अगली क्लास में दाखिला दे दिया जाएगा, छात्र ने पढ़ाई बेहतर नहीं की और परीक्षा में पासिंग मार्क नहीं आए तो उसे अगली कक्षा में दाखिला नहीं मिल सकता। अभी सर्वशिक्षा अभियान में 1 से क्लास 8 तक किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला, दो क्लासों के बोर्ड में बदलने से स्कूली शिक्षा में बदलाव होगा। स्कूल और हायर सेकंडरी की परीक्षाएं मार्च के प्रथम सप्ताह से शुरू होने जा रही हैं। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को कक्षाओं के भीतर मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित होता है। उन्हें मोबाइल बंद कर कक्षाओं के बाहर रखने कहा जाता हैं, लेकिन पर्यवेक्षकों और केन्द्राध्यक्षों पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होता है। इसका फायदा उठाते हुए कई बार महिला पर्यवेक्षक कक्षाओं के भीतर घरेलू बातें करती भी पाई जाती हैं, जिससे परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों का ध्यान भंग होता है। इसमें फोन पर उनका ज्यादातर जुमला, हैलो…नाश्ता बनाकर आई हूं, खा लेना, बाई को बर्तन बाहर निकाल देना आदि होता है। वहीं पुरुष पर्यवेक्षक भी दोस्तों, परिवार वालों, रिश्तेदारों से बात करते पाए जाते हैं। विद्यार्थियों की ऐसी सैकड़ों शिकायतें माध्यमिक शिक्षा मंडल के पास पहुंची हैं, जिसमें पर्यवेक्षकों के फोन पर बात करने से उनका डिस्टर्ब होना लिखा गया है। इसलिए इस बार से बोर्ड परीक्षाओं में केन्द्राध्यक्ष और पर्यवेक्षक भी परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर पाएंगे। परीक्षा के दौरान उन्हें अपना मोबाइल केन्द्राध्यक्ष को जमा करना होगा। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सुरक्षा की दृष्टि से भी यह फैसला लिया है। परीक्षा समाप्त होने के बाद वे अपना मोबाइल ले सकेंगे। जब्त हो सकता है मोबाइल परीक्षा के दौरान अगर पर्यवेक्षक अपने पास मोबाइल रखे हुए मिलते हैं तो उनका मोबाइल जब्त भी किया जा सकता है। उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती हैं, इसलिए उन्हें मोबाइल न रखने के निर्देश का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य किया गया है। सीसीटीवी कैमरे भी लगवा सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा केन्द्रों पर केन्द्राध्यक्ष चाहें तो सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे भी लगवा सकते हैं। इसके लिए केन्द्राध्यक्ष पहले अपनी ओर से सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे और इसके बाद जो भी इसका बिल होगा, उसका भुगतान बाद में मंडल की ओर से उन्हें कर दिया जाएगा। सीसीटीवी कैमरे उन केन्द्रों में फायदेमंद हैं जो केन्द्र संवेदनशील हैं और जहां परीक्षा नकल की संभावना ज्यादा होती है।

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