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Mutual Fund: क्यों है निवेश का सबसे बेहतर जरिया?

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म्यूच्यूअल फण्ड क्या है – म्यूचुअल फंड (अंग्रेज़ी:Mutual fund) जिसे हिन्दी में पारस्परिक निधि कहते हैं, किन्तु इसका अंग्रेज़ी नाम अधिक प्रचलित है, एक प्रकार का सामुहिक निवेश होता है। निवेशको के समुह मिल कर स्टॉक, अल्प अविधि के निवेश या अन्य प्रतिभूतियों (सेक्यूरीटीज) मे निवेश करते है। म्यूचुअल फंड मे एक फंड प्रबंधक होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है और लाभ का हिसाब रखता है। इस प्रकार हुए फायदे को निवेशको मे बाँट दिया जाता है। स्टॉक बाजार की पर्याप्त जानकारी न होने पर भी निवेश की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुलभ मार्ग म्यूचुअल फंड होता है।

म्यूचुअल फंड संचालक (कंपनी) सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है और फिर इस राशि को उनके लिए बाजार में निवेश करती है। इनमें में निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह चिंता फंड मैनेजर की होती है। वही निवेशक के निवेश का रखरखाव करने वाला होता है। एक दूसरा लाभ ये भी होता है, कि छोटे निवेशक बहुत कम राशि जैसे 1000 रु.प्रतिमाह तक निवेश कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लेना होता है, जिसमें बैंक से ये राशि मासिक सीधे फंड में स्थानांतरित होती रहती है।

एक निश्चित अवधि में मुनाफा कमाने (रिटर्न) की उम्मीद में खर्च किया जाने वाला पैसा निवेश कहलाता है। निवेश के लिए आज हमारे पास कई सारे विकल्प हैं, मसलन, शेयर बाजार, सोना-चांदी, प्रॉपर्टी, एफडी, बॉण्ड,सरकारी सिक्योरिटीज बगैरह। लंबी अवधि के लिए म्युचुअल फंड ही निवेश का बेहतर जरिया है। रिटर्न, लिक्विडिटी, निवेश पर होने वाले खर्च, टैक्स समेत लंबी अवधि में महंगाई को मात देने में सबसे सशक्त साधन के पैमाने पर खरा उतरने वाला माना जाता है म्युचुअल फंड। इसमें कोई भी निवेशक सीधे-सीधे शेयरों में पैसा नहीं लगाता है, बल्कि जानकारों की अगुआई में एक टीम बेहतर शेयरों का चुनाव कर उसमें निवेश करती है।

म्युचुअल फंड की खास बातें:

क्या है म्युचुअल फंड (MF):
1-निवेश का साधन
2- बहुत से निवेशकों की बचत को जमा कर एक समान वित्तीय लक्ष्य को साझा करने वाला ट्रस्ट
3-एक ऐसी निवेश कम्पनी है जो अपने शेयर होल्डरो से इकट्ठा किया गया धन निवेश करती है

कहां होता है MF निवेश: जमा किए गए पैसों को पूंजी बाजार के साधनों मसलन, शेयर, डिबेंचर और दूसरी प्रतिभूतियों में निवेश

कैसे साझा होता है रिटर्न: निवेशों और प्राप्त पूंजी मूल्यवृद्धि के जरिये हासिल होने वाली
आय को इसके शेयरधारकों द्वारा अपने स्वामित्व वाली इकाइयों की संख्या के अनुपात में


म्यूचुअल फंड को अच्‍छे से पहचाने

चलिये इस टर्म को बहुत साधारण तरीके से समझाते हैं। मान लेते हैं आप एक निवेशक हैं और आपको वित्तीय बाजार कोई आइडिया नहीं है। आपको किसी प्रोफैशनल या विशेषज्ञ की मदद चाहिये। आपको क्या करना चाहिये, वो है म्यूचुअल फंड स्कीम। एक म्यूचुअल फंड स्कीम निवेशकों से पैसा एकत्र करती है और सिक्योरिटी मार्किट में निवेश करती है।

चलिये हम आपको एक उदाहरण देते हैं
मान लीजिये, एक म्यूचुअल फंड स्कीम है सुपर रिटर्न्स फंड, जिसे सुपर रिटर्न एसेट मैनेजमेंट कंपनी लॉन्च करती है। यह कंपनी नये ऑफर के साथ बाजार में आयेगी। उस ऑफर का नाम है सुपर रिटर्न मिड कैप स्कीम। निवेशक उसमें निवेश करते हैं और कंपनी 100 करोड़ रुपए इकठ्ठा कर लेती है। अब यही कंपनी इन रुपयों को बाजार में निवेश करेगी। अगर यह स्कीम इक्व‍िटी स्कीम है, तो 100 करोड़ का ज्यादातर भाग शेयर बाजार में लगा देगी। अगर यह डेब्ट स्कीम है तो कंपनी इसी पैसे को सरकारी योजनाओं, बॉन्ड आदि में निवेश करेगी।
अब अगर कंपनी ने आपको शुरुआत में एक यूनिट की कीमत 10 रुपए ऑफर की थी। यानी आपने 10 रुपए की दर से 1000 यूनिट खरीदीं और आपने 10 हजार रुपए निवेश किये। एक साल बाद सुपर रिटर्न मिड कैप द्वारा जो पैसा शेयर बाजार में निवेश किया गया था वह बढ़कर 12 रुपए प्रति यूनिट हो गया।
तो आप अपने म्यूचुअल फंड को वापस कंपनी को 12 रुपए की दर से बेच सकते हैं, जिससे 1000 यूनिट पर आपको 12000 रुपए प्राप्त होंगे।

क्या होगा अगर नया खरीददार यूनिट खरीदने का इच्छुक हो?
नये खरीददार के लिये जो यूनिट खरीदने का इच्छुक है, उसे अब 12 रुपए प्रति यूनिट की दर से धन जमा करना होगा। क्योंकि उस स्कीम की कीमत चढ़ कर 12 रुपए हो गई है। इसका मतलब उसे 12 रुपए देने होंगे। नीचे दिये गये उदाहरण में हमने इसे साधारण बनाने की कोशिश की है, यह मानकर कि सुपर रिटर्न मिड कैप फंड एक ओपन एंडेड फंड है।

भारत में म्यूचुअल फंड के प्रकार

आगे भी हम आपको यह समझाने के लिये अपनी बात बहुत साधारण तरीके से रख रहे हैं, ताकि आप म्यूचुअल फंड को अच्छी तरह समझ सकें।

1. इक्विटी फंड इक्विटी फंड वो स्कीम होती है, जिसमें कंपनी निवेशकों से इकठ्ठा हुए धन का ज्यादातर भाग इक्विटी शेयर में निवेश करती है इस प्रकार की स्कीम ऐसे निवेशकों के लिये अच्छी रहती हैं, जो 3 से 5 वर्ष या अधिक अवधि के लिए निवेशित रहना चाहते है, एवं इक्विटी स्कीम में SIP के माध्यम से निवेश सुरक्षित रहता है एवं सर्वाधिक return भी प्राप्त होता है

2. डेब्ट फंड डेब्ट फंड स्कीम के अंतर्गत इकठ्ठा हुआ ज्यादातर कॉरपोरेट ऋण स्कीम, सरकारी स्कीम, आदि में निवेश किया जाता है। इस प्रकार का म्यूचुअल फंड बैंक फिक्स डिपाजिट से ज्यादा return देते है एवँ उन निवेशकों के लिये उपयुक्त रहता है, जो 1 से 2 वर्ष तक निवेशित रहना चाहते हैं।

3. बैलेंस फंड बैलेंस फंड में कंपनी निवेशकों से प्राप्त धन को इक्विटी और डेब्ट दोनों में निवेश करती है। इसका मकसद भी अंत में भारी मात्रा में धन कमाना होता है। जाहिर है कंपनी बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए मार्केट में पैसा डालती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा धन कमा कर निवेशकों को उनका रिटर्न दिया जा सके।


म्यूचल फण्ड के फायदे

पेशेवर व्यवस्थापन – म्युचुअल फंड के हर एक परियोजना के निवेश का व्यवस्थापन करने के लिए पेशेवर व्यक्ति की (फंड मनेजर) नियुक्ति की जाती है| यह व्यक्ति के निचे बहोत सारे टेकनिकल और फंडामेंटल अनालिस्ट काम करते है, जो मार्केट का रिसर्च करते है और आपना रिपोर्ट पेशेवर व्यवस्थापक को सौपते है जिसके आधार पर फंड मैनेजर आपना निवेश का फैसला लेता है| इसके जरिए निवेश का एक पोर्टफोलियो बन जाता है, जिसमे विभिन्न प्रकारके सिक्युरिटीज का समूह बन जाता है, जो की विभिन्न प्रकारके शेअर्स, बोंड्स, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स आदि का, योजना के अनुसार, हो सकता है| इसकी वजहसे बाजार की जोखिम विभाजित हो जानेसे कम हो जाती है| और ऐसी सेवा आपको बहुत कम फी में मिल जाती है, अगर आपको यह सेवा अकेले लेनेकी इच्छा हो तो उसके लिए आपको काफी जादा फी देनी पड़ लगती थी|

फंड का स्वामित्व अधिकार – एक निवेशक होने के वजहसे जिस परियोजना में आप निवेश करते हो उस योजना की यूनिट्स याने (शेअर्स) प्राप्त हो जाती है और परियोजना में जितने भी कुल यूनिट्स होते है उसके अनुपात में आपका उस योजना में स्वामित्व बन जाता है| चाहे आप कम या जादा पैसो का निवेश करते हो, आप जैसे बहुत सरे लोगोंका पैसा इकट्ठा होनेकी वजहसे आपके पैसे विभिन्न प्रकारके निवेश के साधनों में निवेश किये जाते है, जिसका आपको लाभ मिलता है|

जोखिमों का विविधिकरण – म्युचुअल फंड में निवेश करके आप के पैसेका विभिन्न निवेश साधनों में, जैसे की शेअर्स, बांड्स, आदि विविध साधनों में होने की वजहसे जोखिमों का विविधिकरण हो जाता है| इसके वजहसे अगर उसमेसे कुछ साधनों के कीमतों कम या जादा होने की आपको चिंता करनेकी जरुरत नही होती है|विभिन्न प्रकारकी परियोजना म्युचुअल फंड में विभिन्न प्रकारकी परियोजनाए उपलब्ध होती है उसमे से कही में जादा जोखिम होती है तो कही में कम होती है, कही में शियर बाजार के चढाव उतार का परिणाम होता है तो कही में शेअर बाजार का जोखिम कम या बिलकुल ही नही होता है, आप जैसी जोखिम लेना चाहते हो वैसे परियोजना का निवेश के लिए चयन करने का आपको हक़ होता है| एक ध्यान में रखिये की म्युचुअल फंड के योजना में जितनी जादा जोखिम होती है उतना ही जादा लाभ होने की संभावना होती है और जितनी कम जोखिम उतना ही कम लाभ का अवसर होता है| इक्विटी योजना में जोखिम जादा होती है मगर लाभ भी जादा ही मिलता है| एक ध्यान में रखिये की जब आप इक्विटी योजना में निवेश करते हो तो आप उसमे हमेशा हर महिना निवेश लम्बे समय तक करते रहते है तो जादा लाभ मिलनेका अवसर उतनाही बढ़ जाता है| कम समय में नफा या नुकसान कुछ भी हो सकता है मगर अगर आप १५ से २० साल हर महिना एस.आय.पि. के माध्यम से निवेश करते हो तो बहुत अच्छा लाभ आप अपने निवेश पर जरुर कमा सकते हो|


म्यूचल फंड के क्या फायदे है और ये शेयरों से किस तरह से अलग है?

म्यूचल फंड के कई फायदे है, अव्वल तो इसमे आपको कम पूँजी, कम समय और काफी कम तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इसमे जोखिम भी कम रहता है। म्यूचल फंड के फायदों को संक्षेप मे इस तरह से बताया जा सकता है:

  • म्यूचल फंड महंगे शेयरों मे निवेश करने का सस्ता तरीका है।
  • म्यूचल फंड मे जोखिम कम होता है क्योंकि आपका पैसा किसी एक शेयर मे ना लगाकर, कई शेयरों मे एक साथ लगाया जाता है।
  • म्यूचल फंड पेशेवर फंड व्यस्थापकों (Fund Managers) द्वारा चलाए जाते है, जिनको शेयर बाजार की काफी अच्छी जानकारी होती है। इनको किसी भी शेयर मे प्रवेश करने और बाहर निकलने के अवसरों का बेहतर ज्ञान रहता है।
  • म्यूचल फंड हाउस (AMCs) के पास अपनी रिसर्च टीम होती है, इनके पास शेयरों के सम्बंध मे तकनीकी जानकारी और विश्लेषण मौजूद रहता है। कुल मिलाकर इनकी रिसर्च टीम किसी भी निवेशक के मुकाबले शेयर बाजार की अधिक जानकारी रखती है।
  • छोटे निवेशक का समय और श्रम बचता है।
  • म्यूचल फंड की गतिविधियों पर सेबी की कड़ी नजर रहती है, इस तरह से छोटे निवेशकों के हितों को अनदेखा नही किया जा सकता।
  • म्यूचल फंड मे आप निश्चित अवधि मे आटोमेटिक तरीके से (SIP) से निवेश अथवा निकासी (SWP) कर सकते है।
  • चूँकि म्यूचल फंड बड़े स्तर पर खरीदारी करते है इसलिए उनको ब्रोकरेज और अन्य खर्चों पर भी बचत होती है।
  • म्यूचल फंड के निवेश मे काफी ज्यादा पारदर्शिता होती है।
  • निवेशक को किसी भी प्रकार का निवेश खाता (Demat Account) नही खोलना पड़ता।
  • निवेशक सही समय पर किसी भी एक स्कीम से दूसरी स्कीम मे जा सकता है।

म्यूचुअल फंड से जुड़े सवालों के जवाब –

सवाल: मेरी उम्र 35 साल है। मुझे बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए पैसे जुटाने हैं। बेटे की उम्र 7 साल और बेटी 4 साल की है। मेरे पास 35 लाख रुपये का लाइफ कवर है। 3 साल से मैं हर महीने एसआईपी के जरिए रिलायंस रेगुलर सेविंग में 3000 रुपये, रिलायंस ग्रोथ में 1000 रुपये, एचडीएफसी टॉप 200 में 3000, डीएसपी बीआर रेगुलर इक्विटी में 3000 और आईसीआईसीआई ब्लूचिप इक्विटी में 1000 रुपये का निवेश करती हूं। क्या पोर्टफोलियो में कुछ बदलाव की जरूरत है?
जवाब : आपको इक्विटी फंड में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। आप आईएसीआईसीआई प्रू फोकस्ड ब्लूचिप फंड में 4000 रुपये, बिरला इक्विटी फंड में 4000 रुपये और एचडीएफसी टॉप 200 में 3000 रुपये निवेश करें और बाकी दो फंड्स जैसे रिलायंस रेगुलर सेविंग और रिलायंस ग्रोथ फंड से निकल जाएं।

सवाल: मेरी उम्र 27 साल है और मासिक आमदनी 1 लाख रुपये है। मैं रिलायंस इक्विटी ऑपर्च्युनिटीज में 1000 रुपये, एचडीएफसी बैलेंस्ड में 2000 रुपये, आईसीआईसीआई प्रु डिस्कवरी में 3000 रुपये और बिड़ला सनलाइफ इक्विटी में 2000 रुपये निवेश करता हूं? म्यूचुअल फंड में माह 8,000 रुपये लगा रहा हूं। बच्चे की पढ़ाई के लिए 25 साल बाद 1 करोड़ रुपये और रिटारमेंट के लिए 20 साल बाद 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य है। क्या लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश बढ़ाना होगा? म्यूचुअल फंड में ही पैसे डालूं या बैंक एफडी में?
जवाब : आपको 20-25 साल के लिए निवेश करना है इसलिए डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड चुनना चाहिए। आप रिलायंस इक्विटी ऑपर्च्युनिटीज और आईसीआईसीआई प्रू डिस्कवरी में बने रहें और लार्जकैप में आईसीआईसीआई फोकस्ड ब्लूचिप फंड जोड़ें। वहीं मल्टीकैप में एचडीएफसी इक्विटी फंड जोड़ें। 20-25 साल के लिए बैलेंस्ड फंड चुनना सही स्ट्रैटेजी नहीं है। बच्चे की पढ़ाई के लिए 25 साल में 1 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आपको हर महीने करीब 6,000 रुपये का निवेश करना होगा। वहीं रिटायरमेंट के लिए 20 साल में 1 करोड़ रुपये जुटाने के लिए हर महीने 11,000 रुपये का निवेश करना पड़ेगा।

सवाल: 6 साल में 25 लाख रुपये चाहिए। मैं हर महीने 8,000 रुपये लगा सकता हूं। किस तरह का पोर्टफोलियो बनाना चाहिए?
जवाब: हर महीने 8000 रुपये के निवेश से 6 साल में 8 लाख रुपये ही जुट पाएंगे। इसलिए 6 साल में 25 लाख रुपये के लिए आपको हर महीने 25,000 रुपये लगाने होंगे। आप निवेश के लिए आईसीआईसीआई बैलेंस्ड और बीएसएल फ्रंटलाइन इक्विटी फंड चुन सकते हैं।


म्यूच्यूअल फण्ड – ग्रोथ एवं डिवीडेंट ऑप्शन

Purpose के आधार पर मूल रूप से विभिन्‍न प्रकार की Mutual Fund Schemes को 2 भा‍गों में विभाजित किया जा सकता है, जिन्‍हें Growth Fund व Dividend Fund के नाम से जाना जाता है और दोनों ही तरह की Schemes की अपनी अलग जरूरत व अपना अलग महत्‍व है। चलिए, इन्‍हें थोड़ा विस्‍तार से समझने की कोशिश करते हैं।

What is Growth Fund

जब हम किसी MF Scheme के Growth Plan में Invest करते हैं, तब हम Fund Manager को ये अधिकार देते हैं कि Companies द्वारा Stocks पर दिया जाने वाला Dividend Directly हमारे Bank A/c में Transfer न हो बल्कि Fund Manager हमें प्राप्‍त होने वाले उस Dividend Amount को भी उसी MF Scheme के विभिन्‍न Stocks में फिर से Invest कर दिया जाता है। परिणामस्‍वरूप हमारे Investment का Capital बढ़ जाता है यानी हमारे MF Scheme का NAV बढ़ जाता है, फलस्‍वरूप Long Term में हमें मिलने वाला Return भी बढ़ जाता है।

What is Dividend Fund

जब हम किसी MF Scheme में Dividend Plan के अन्‍तर्गत Invest करते हैं, तब Companies द्वारा दिया जाने वाला Dividend को Fund Manager द्वारा उसी MF Scheme के विभिन्‍न Stocks में फिर से Invest न करके निवेशक को भुगतान कर दिया जाता है, Fund Manager Monthly, Quarterly, Half-Yearly अथवा Yearly Basis पर सम्‍पूर्ण Investment Amount में से कुछ हिस्‍सा Investor को Return कर देता है।

परिणामस्‍वरूप Investor के Investment का Capital कम हो जाता है यानी MF Scheme का NAV कम हो जाता है, फलस्‍वरूप Long Term में मिलने वाला Return उतना नहीं बढ़ता, जितना Growth Fund में बढ़ता है और यही वजह है कि Growth Plan व Dividend Plan, दोनों के NAV में काफी अन्‍तर होता है क्‍योंकि निश्चित समयावधि पर Dividend के रूप में MF Scheme से Cash Amount, Investor को Return कर दिया जाता है और MF Scheme से Cash कम होने पर NAV कम हो जाता है।

जिन लोगों को Monthly, Quarterly, Half-Yearly अथवा Yearly Basis पर Salary के रूप में कुछ Amount की जरूरत होती है, सामान्‍यत: वे लोग Dividend Plan को चुन सकते हैं।


Right Investment: म्‍यूचुअल फंड

शेयर बाजार को निवेश के लिए सबसे फायदेमंद लेकिन जोखिम भरे टूल के रूप में जाना जाता है। साधारण निवेशक के लिए शेयर बाजार के उतार चढ़ाव और कंपनियों के टेक्निकल चार्ट्स का सही-सही अंदाज लगा पाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में म्‍यूचुअल फंड्स मार्केट में निवेश करने का सबसे समझदारी भरा और आसान जरिया माना जाता है। यहां बड़े फंड मैनेजर्स आपके निवेश को मुनाफेमंद बनाने का काम करते हैं। लेकिन इसे बावजूद बहुत से लोगों के बीच म्‍यूचुअल फंड्स को लेकर भ्रांतियां है। जिसके चलते आसान और फायदे के बावजूद लोग इन टूल्‍स में निवेश करने से बचते है, लिक्विडपैसा आपकी इन्‍हीं भ्रातियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। जिससे आप भी इन फंड्स में सुकून भरा निवेश कर सकें।

म्यूचुअल फंड्स में छोटी राशि भी कर सकते हैं निवेश
लोगों का मानना है कि जब तक आपके पास बड़ी पूंजी नहीं है, तब तक आप म्‍यूचुअल फंड मार्केट का रुख नहीं कर सकते। लेकिन वास्तव में म्यूचुअल फंड्स में आप 1000 रुपए से भी निवेश शुरु कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक निवेश करने के लिए सबसे अच्छा समय तब होता है जब आप शुरुआत करें। छोटी रकम से भी आप बाजार में निवेश कर सकते हैं। जितना जल्दी आप निवेश करना शुरु करेंगे उतनी ही जल्दी आप अपना कॉर्पस बना पाएंगे।

लोगों का मानना है कि म्‍यूचुअल फंड में सिर्फ लंबे समय के लिए ही निवेश कर सकते हैं। लेकिन वास्तव में म्यूचुअल फंड्स छोटे (शॉर्ट टर्म) और लंबे (लॉन्ग टर्म) समय दोनों के लिए होते हैं। शॉर्ट टर्म पांच साल से कम के लिए होते हैं और निवेशक डेट म्यूचुअल फंड्स में से चयन कर सकते हैं जो कि बैंक की एफडी से बेहतर होती है। लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स सबसे अच्छे विकल्प होते हैं। लिक्विड फण्ड जो बैंक बचत खाते के समान होता है, इसमें 1 दिन के लिए भी निवेश किया जा सकता है और मोटा लाभ कमाया जा सकता है.

लोग टैक्‍स सेविंग के लिए दूसरे इंस्‍ट्रूमेंट का प्रयोग करते हैं लेकिन वास्तव में म्यूचुअल फंड्स में निवेश टैक्स सेविंग्स लाभ मुहैया कराता है, लेकिन सिर्फ इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में जिसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 सी के तहत कर कटौती के योग्य होते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से एक साल बाद किए गए कैपिटल गेन पर टैकस छूट मिलती है और डेट फंड्स के कैपिटल गेन पर तीन साल बाद टैक्स लगता है जो कि इंडेक्सेशन लाभ के कारण काफी कम दर पर लगता है

वास्तव में म्यूचुअल फंड्स का मतलब केवल स्टॉक्स या इक्विटी मार्केट में निवेश करना नहीं होता है। म्यूचुअल फंड्स मुख्य एसेट क्लास के आधार पर क्लासिफाइड होते हैं। जैसे कि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में इक्विटिज में निवेश होता है, डेट म्यूचुअल फंड्स में डेट या फिक्स्ड इनकम में निवेश होता है और मनी मार्केट फंड्स में निवेश के विकल्पों में जैसे कि ट्रैजरी बिल्स और रिपर्चेस एग्रीमेंट्स।

म्‍युचुअल फंड की गणना उसकी एनएवी से होती है। वास्तव में फंड की नेट एसेट वैल्यु (एनएवी) बेमतलब होता है क्योंकि ये निवेश फंड की मार्केट वैल्यु को दर्शाता है न कि बाजार के दामों को। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आपके पास दो विकल्प है- 1000 यूनिट फंड ए की जिसकी एनएवी 10 रुपए है और 100 यूनिट्स फंड बी की जिसकी एनएवी 100 रुपए है। आपने फंड ए की 1000 यूनिट खरीदने का फैसला लिया। एक साल के बाद क्योंकि दोनों फंड्स का एक जैसा पोर्टफोलियो है तो दोनों 20 फीसदी की दर से बढ़ेंगे। फंड ए की एनएवी 12 रुपए हो जाएगी और फंड बी की 120 रुपए। आपकी निवेश वैल्यु 12000 रुपए तक बढ़ जाएगी और रिटर्न दोनों का एक सा होगा।

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