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नारकोटिक्स विंग द्वारा जिला जेल मन्दसौर में नशामुक्ति शिविर का आयोजन

स्वयं.परिवार और समाज को सुरक्षित रखने के लिये नशे का त्याग आवश्यक. अतिण् पुलिस अधीक्षक श्रीमती चौहान

मन्दसौर। 6 फरवरी को मंदसौर जिला जेल में नारकोटिक्स विंग मंदसौर तथा पतंजली योग संगठन जिला मंदसौर के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति शिविर का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि नारकोटिक्स अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मीना चौहान थी। जिला जेल अधीक्षक श्री एम॰एस॰ रावत एवं पतंजली योग संगठन जिलाध्यक्ष श्री बंशीलाल टांक मंचासीन थे। 

श्रीमती चौहान ने कैदियों को नशे के दुष्परिणाम से अवगत कराते हुए कहा कि अधिकांशतः जितने भी अपराध हो रहे है उसमें अधिकांशतः नशे के कारण हो रहे है। नशा चाहे शराब का होए अफीमए गांजाए स्मैक आदि किसी का क्यों न हो। नशा करने पर नशा करने वाला वैचारिक दृष्टि से अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। भला.बुरा सोचने की शक्ति क्षीण हो जाती है और आवेश में अपराध कर बैठता है। अपराधी द्वारा किसी का मर्डर करने पर जहां मृत व्यक्ति का एक परिवार बर्बाद हो जाता है वहीं नशे से हजारों परिवार बर्बाद हो रहे हैं। 

श्रीमती चौहान ने अपराध की श्रेणी में वर्तमान में बच्चों के आ जाने से चिन्ता जताते हुए कहा कि अपराधी अपने अपराध को अंजाम देने के लिये पैसों का लालच देकर बच्चों को अपराधी के श्रेणी में ढकेल देते है। इसलिये बच्चों की देखभाल उन्हें गलत आचरण वाले तत्वों के जाल में फंसने से बचाना आवश्यक है। 

आपने निरूद्ध भाईयों के मानव शरीर की महत्ता बताते हुए कहा कि मानव शरीर का एक.एक अंग बहुमूल्य है। यदि हमारी एक आंख ही खराब हो जाये तो उसे बदलवाने ;दूसरी नेत्र लगानेद्ध में कितना खर्चा होता है तो फिर सम्पूर्ण शरीर कितना महत्वपूर्ण है जो केवल परिवार.समाज ही राष्ट्रहित में उपयोग हो सकता है परन्तु गलत संगत और बुरी लत के कारण नशे के अधीन होकर परमात्मा की अनमोल भेंट को अकारण यूं ही बर्बाद कर देते है। इसलिये प्रत्येक भाई को जेल से रिहा होने के पूर्व यह संकल्प लेकर जाना चाहिये कि वह जीवन कभी भी किसी प्रकार का नशा नहीं करेगा। 

श्रीमती चौहान ने दृढ संकल्पित होकर नशा छोड़ने में योग की महत्ता बताते हुए योग प्रशिक्षक श्री टांक द्वारा आज से प्रारंभ योग उसमें सहायक होगा। 
प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन में जेलर श्री रावत ने कहा कि जीवन बहुत ही बहुमूल्य है। नशे के वशीभूत होकर अपराधी बनकर जेल मंे आना किसी को अच्छा नहीं लगता फिर भी जो अपराध हो जाता है उसका बड़ा कारण नशा है। आपने कहा कि वे स्वयं हर प्रकार के नशे से तो मुक्त हैं ही परन्तु चाय तक का सेवन नहीं करते। आपने कहा कि फिर दुबारा जेल में नहीं आना पड़े। इसलिये जेल जीवन को सुधारने का एक अवसर है जहां हर प्रकार से जीवन में दुबारा अपराध नहीं करने के संस्कार दिये जाते है। 

टांक ने हर प्रकार के नशे और अपराध से बचने के लिये मानसिकता और बुरे विचारों में आमूल परिवर्तन होकर अच्छे विचारों के प्रादुर्भाव में योग की महत्वपूर्ण भूमिका बनाई। 

उपस्थित रहे. एएसआई प्रकाश मालीवाड़ए प्रधान आरक्षक रूपेश शर्माए प्रधान आरक्षक दीपक शुक्लाए प्रधान आरक्षक कुलदीपसिंहए प्रधान आरक्षक प्रहलाद यादव सहित जेल स्टॉफ आदि। संचालन अनिल संगवानी ने किया और आभार डिप्टी जेलर श्रीमती सोमना ठाकुर ने माना। 

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