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राजेश घाटिया हुए पंचतत्व में विलिन…. एक जन्म लेकर तुरन्त लौट आना…

भीषण दुर्घटना में घायल घाटिया का हुआ निधन, हुए पंचतत्व में विलिन

लोग अच्छे हैं बहुत दिल में उतर जाते हैं…..  इक बुराई है तो बस ये है कि मर जाते हैं…..

मंदसौर। 25 दिसम्बर 18 को राजस्थान की धार्मिक यात्रा पर गए श्री राजेश घाटिया व उनका पूरा परिवार एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दुर्घटना में राजेश की माता एवं बहन का निधन घटनास्थल पर ही हो गया था। जबकि उनकी पत्नी और पिता को भी गंभीर चोंटें आए थी जिनका ईलाज भी राजस्थान उदयपुर के अनंता हॉस्पिटल में चल रहा था। 1 फरवरी को राजेश घाटिया के स्वास्थ्य में सुधार के चलते उन्हें राजस्थान से मंदसौर के एक निजी अस्पताल मे भर्ती किया गया था। जहां उनक स्वास्थ्य में सुधार भी रहा था।

लेकिन 3 फरवरी रविवार को अचानक श्री घाटिया का स्वास्थ्य बिगढ़ा और उनकी मृत्यु हो गई। जिनकी अंतिम यात्रा उनके जनता कॉलोनी स्थित निवास से निकली जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भाग लियां मुक्तिधाम पर उनके परिजनों ने उनके पार्थिक शरीर को मुखाग्नि दी।


कोई व्यक्ति जिसे आप मन से प्रेम करते है या जिससे आप दूर नहीं रह सकते अगर अचानक से वे आपको छोड़कर भगवान के पास चले जाए तो वे पल सबसे ज्यादा दुखदाई होता है। एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा…. आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा….

अच्छे लोग कभी नहीं मरते वो अपनी माद्दी जिस्मानी सूरत से तो आज़ाद हो जाते हैं लेकिन उनकी यादें दिलों में हमेशा घर किए रहती हैं और हम उन्हें वक़्तन फ़वक़्तन याद करते रहते हैं।

Hello Mandsur.com (Brajesh Arya)


अनन्ता से अजय तक का संघर्षमय सफर….

मानवीय जिंदगी ईश्वर प्रदत्त एक वरदान है, जो हज़ारों योनियों में उत्पत्ति एवं मृत्युवरण के उपरांत प्राप्त होती है। इसी मानवीय योनि में पोरवाल समाज के एक बिरले शख्स राजेश घाटिया पिता सत्यनारायण घाटिया पैदा हुए थे, जिनकी मिलनसारिता, स्नेह, सहयोग भावना से हमारा समाज ही नहीं, अन्य समाज के व्यक्ति भी कायल थे। शायद भगवान को भी स्वर्ग में नेकदिली इंसानों की ज़रुरत रही होगी, तभी काल के क्रूर हाथो के माध्यम से तीर्थाटन कर लौट रहे इस शख़्स एवं इसके परिवार जनों को गत 25 दिसम्बर, 2018 को एक आसामयिक दुर्घटना का शिकार होना पड़ा।

जिसमें उनकी माताजी एवं बहन का देहावसन उसी दिन हो गया था एवं पिताजी अभी भी उपचाररत है।

इसी तारतम्य में भाई राजेश भी दुर्घटनाग्रस्त हुए। उन्हें तत्काल उदयपुर के अनन्ता हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। सवा माह जिंदगी और मौत के थपेड़ों से दो-चार होते उन्हें गत 01 फ़रवरी, 2019 को अजय हॉस्पिटल मंदसौर लाया गया। गत 02 फ़रवरी, 2019 को सांय जब मैं एवम मित्र दशरथ दानगढ़ उनकी तबियत देखने गए तो महसुस हुआ कि वे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर लेंगे लेकिन कहते है कि “दीपक बुझने के पूर्व उसकी लौ अधिक तेज हो जाती है।” शायद कुछ ऐसा ही उनके साथ हुआ। यमदूतों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। पत्नी अनिता, मासूम आदित्य एवं परी के सिर से साया सदा के लिये उठा लिया।

इन संघर्ष भरे दिवसों में समाज ने एवं अन्य समाजजनों ने तन मन धन से जो अविस्मर्णीय मानवीय सहयोग दिया वह “राजेश जी” के लिऐ सच्ची “श्रद्धांजलि” है।
प्रवीण गुप्ता
अध्यक्ष- पोरवाल समाज, मंदसौर

एक जन्म लेकर तुरन्त लौट आना… मैं तुम्हे लोगो की इस भीड़ में भी… मित्र तुम्हे पहचान ही लुंगा…

मित्र की दहकती चिता के पास  खड़ा, मैं साथ बिता हर पल मन ही मन दोहरा रहा था, लपटे अपनी गर्मी से उन यादों को और लगातार बना रही थी। यारी ऐसी की याद करो और वो कुछ पल में आ जाए…

इस निर्मोही डिजिटल दुनियां के बावजुद, वो निस्वार्थ… बातों बातों में हौसला देने वाला, हर बार, हर हाल में साथ खड़ा रहने वाला… उसकी ऊपर वाली जेब मे अक्सर वो कागज़ मिल ही जाते थे, जिनसे उसका कोई सरोकार नही होता था, लेकिन बस किसी का काम उसके माध्यम से हो जाए, और खुशी से वो कह दे, वाह राजेश भाई मजा आ गया, आपका धन्यवाद… उस पर वो मेरा यार हँस कर एक ही जवाब देता था… आपका काम होना था हो गया, आप तो और कोई आदेश करो!!

कहां मिलते है ऐसे लोग इस 4G के जमाने मे…??

बेशक वो राख बनकर हवा का एक सुक्ष्म  हिस्सा आज बन गया… लेकिन वो मेरा यार, मेरा मित्र… जिसने बेवजह हर किसी की मुस्कुराहट की वजह बन जाना… समझा ही दिया!

काश तुम इतनी जल्दी हवा में घुलकर, मेरी सांसो में यु ना समाते…

व्यक्तिगत तौर पर राजेश घाटिया जैसे मित्र आसानी से नही मिल पाते है, जो सबके लिए कभी भी, कही भी तैयार रहे! बेशक उनकी जिंदगी में संघर्ष था, लेकिन फिर भी दूसरों के संघर्ष में वो आगे रहकर उसका एक हिस्सा बन जाते थे! प्रेक्टिकल जमाने में कोई कैसे भावनात्मक रूप से कुछ ही पल में आपकी तकलीफ सुलझाने में कैसे आपका ही एक हिस्सा बन जाता है… ये अहसास तब होने लगता है जब आपके पास किसी की यादे शेष रह जाती है! काम ऐसा हिस्से आया है कि जमाने भर के चेहरे और चरित्र एक पल में समझ आ जाते हैं, ऐसे में जब गले में हाथ डालकर साथ चलने वाले को कांधा देना पड़े… तो हर वो बात हर कदम पर आत्मा को हिला देती है, की ऊपरवाले के फैसले कभी कभी इतने क्रूर कैसे हो सकते हैं? बेशक अपनी जिंदगी से किसी अच्छे और सच्चे इंसान को यू अचानक खो देना बड़ा ही दुखद लगता है, खासकर उस माहौल में… जहाँ सिर्फ लोगों की शक्ल में एक भीड़ आपके पास होती है… एक अच्छे दोस्त को खोना जो एक अच्छा इंसान भी था… बहुत तकलीफ देता है मित्र !!

ईश्वर के फैसले हर हाल में स्वीकारना ही पड़ते है, फिर भी तुम एक कोशिश मेरे लिए कर लेना… एक जन्म लेकर तुरन्त लौट आना… अपने उसी अंदाज में …मैं तुम्हे लोगो की इस भीड़ में भी .. मित्र तुम्हे पहचान ही लुंगा !!

आकाश चौहान (आजतक)


एक हंसता मुस्कुराता चेहरा, एक जिंदादिल इंसान, अचानक जब दृष्टि पटल से ओझल हो जाता है, तो मन उदास हो जाता है…. ऐसे ही आज भाई राजेश घटिया के अचानक एक ऐसे अंजान सफर पर चले जाने से… जहा से कोई वापस नहीं आता, मन बहुत दुखी है.!

मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हू कि.. राजेश जी घाटिया के परिवार को यह दुख सहन करने की क्षमता प्रदान करें और राजेश जी को अपने चरणों में स्थान दे….. विनम्र श्रद्धांजलि शत शत नमन – अशोक संचेती 


ऐ- दोस्त…हमें इस मतलबी दुनियाँ में अकेला भटकते छोड़ कर, तू क्यों इतने चैन से सो गया…?

कुछ दर्द, जिनको मिले हुए एक अरसा गुज़र गया, न जाने क्यों आज मैंने फिर उसे महसूस किया…?

कुछ यादें, जो हमारी कहीपे खो गए थी, न जाने क्यों आज अचानक उसे याद किया…?

एक दिन, जब तुजसे रूठ गए थे हम, न जाने क्यों आज वह दिन हमारे मानसपट पर उभर आया…?

वह रुदन, जिनको हम दिल की गहराइयों में कहीं दबा चुके थे, न जाने क्यों आज वह रुदन फिरसे उभर आया…?

वह पानी, जिनको हम कबके गिरा चुके थे इन् आखों से, न जाने क्यों आज वह पानी फिरसे इन् आँखों में छलक आया…?

वह चहेरा, जिनको हम तकरीबन भूल ही चूके थे, न जाने क्यों आज वह चहेरा अचानक ही हमारे सपनों में आया…?

वह सहारा, जिनके ज़रिये हम रोज़ चलते थे ज़िन्दगी की राहो में, न जाने क्यों आज हमें वह सहारा याद आया…?

वह इंसान, जिनके साथ अपना सारा सुख – दुःख बांटा हमने, न जाने आज वह इंसान कहाँ खो गया…?

ऐ- दोस्त…हमें इस मतलबी दुनियाँ में अकेला भटकते छोड़ कर तू क्यों इतने चैन से सो गया…?

तू क्यों इतने चैन से सो गया…? तू क्यों इतने चैन से सो गया…?

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