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RTI अधिनियम को जिन्दा दफनाने में लगे कर्मचारी…!

सुचना के अधिकार अधिनियम 2005 के नियम 6(1) के अंतर्गत आवेदक राधेश्याम मारू द्वारा मंदसौर कलेक्टर के लोक सुचना अधिकारी के समक्ष 10 मई 2016 को एक आवेदन प्रस्तुत कर कलेक्ट्रट के दो बाबु के प्रथम नियुक्ति आदेश एंव संलग्न योगयता, मूल निवासी एंव अन्य समस्त दस्तावेजो की प्रमाणित प्रतिलिपीया मांगी गयी। लेकिन कलेकट्रेट के भ्रष्ट कामचोर जिम्मेदार द्वारा नियमो का हवाला देकर आवेदक को गुमराह किया गया जिसको लेकर आवेदक द्वारा सी.एम हेल्प लााईन मे शिकायत दर्ज करा कर जानकारी दिलाने की मांग की गई।
मांगी गई जानकारी को लेकर आवेदक को कार्यालय कलेक्टर मंदसौर के संयुक्त कलेक्टर के टिप, हस्ताक्षर से जारी एक पत्र क्रमांक 706/वित्त-1/स्थापना/2016 दिनांक 18 मई 2016 प्राप्त हुआ जिसमे उल्लेखित किया गया कि जानकारी तृतीय पक्ष से सम्बंधित होने के कारण अनावेदक की मंशा जानने के लिए 10 दिवस का समय दिया गया है समय सीमा मे पत्र का जवाब नही देने पर एक पक्षीय कार्यवाही की जाऐगी। लेकिन जिम्मेदार पत्र जारी कर भुल गये। आवेदक को नियत समय सिमा में लोक सुचना अधिकारी ने काई भी जानकारी नही दी ।
लोक सुचना अधिकारी द्वारा जानकारी नही देने पर आवेदक द्वारा सुचना के अधिकार अधिनियम 2005 में प्राप्त शक्तियों के तहत अधिनियम की धारा 5(1) के अंतर्गत अपीलीय अधिकारी कार्यालय कलेक्ट्रेट मंदसौर को नियमानुसार अपील दायर कर उपरोक्त जानकारिया दिए जाने का निवेदन किया । अपीलअर्थी को कई बार पेषी पर बलाया गया । अपीलिय अधिकारी द्वारा जानकारी नहीं देते हुवे न्यायालय अपार कलेक्टर जिला मंदसौर (पीठासीन अधिकारी अर्जुनसिंह डाबर, अपर कलेक्टर ) प्रकरण क्रमांक 29/अपील/सू अ/15-16 (आदेश पत्र दिनाक 31 अगस्त 2016) थमा दिया गया जिसमे उल्लेख किया गया की अपीलार्थी द्वारा पेश अपील मेमो टिप पर लोक सुचना अधिकारी के द्वारा अपने पत्र क्रमांक 970/वित्त-1/स्थापना/2016 दिनांक 15 जुलाई 2016 को टीप प्रस्तुत कर अनुरोध किया गया की आवेदक/अपीलार्थी द्वारा जो जानकारी मांगी गयी वो व्यक्तिगत सेवा अभिलेख की होने से तृतीय पक्षकार होने के नाते जानकारी को दिए जाने में असहमति व्यक्त की गयी है और सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(जे) का हवाला देते हुए अपीलार्थी को जानकारी नहीं दी जा सकती है। अपीलार्थी की अपील अस्वीकार कर नस्तीबद्ध कर दी गयी।
सरकारी कामकाज में पारर्दर्शियता के लिए सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 कानून बना है जिसके तहत आम व्यक्ति को शासकीय विभागो से सभी प्रकार की जानकारी मांगने का हक है। जानने का हक है…..विगत दिनो सोशल मीडिया पर एक जानकारी को पड़ कर अपीलार्थी के मन में एक सवाल आया ……भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र जी मोदी की अंक सूची सुचना के अधिकार के तहत दी जा सकती तो …. मंदसौर के कलेक्टर के बाबु की अंकसूची क्यों नहीं दी जा सकती.? मतलब मंदसौर कलेक्टर के कर्मचारी सुचना के अधिकार अधिनियम को जीते जी दफनाने मे लगे है। आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी समय सीमा मे नही देने और नियमो को तौड मरोड़ कर आवेदक को प्रताड़ित किया गया, जिसको लेकर आवेदक द्वारा 22 सितम्बर 2016 को सीएम सीएम हेल्प (181)लाईन को शिकायत दर्ज कराई गई की मंदसौर कलेक्टर के ज़िम्मेदारी द्वारा सुचना के अधिनियम का पालन नही किया गया और मांगी गई जानकारीयां नही दी गई। आवेदक ने शिकायत में उल्लेखित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश क्रमांक स.च 277234/2012 के अनुसार लोकसेवक की योग्यता जानकारियां सार्वजानिक की जा सकती है। यह जानकारी राधेश्याम मारू ने दी।

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