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SC ने पद्मावत को फिर से दिखाई हरी झंडी, कहा- रिलीज हो फिल्म (MP – RAJASTHAN)

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमें देशभर के सिनेमाघरों में विवादास्पद बॉलीवुड फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन की अनुमति देने के उसके 18 जनवरी के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्म को रिलीज किया जाए।

राज्य सरकारों द्वारा दी गई दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, आप कुछ संगठनों की धमकी और हिंसा का हवाला दे रहे है। हम ऐसी याचिका पर सुनवाई क्यों करें? एक वैधानिक संस्था ने इसकी मंजूरी दी है। इसे रिलीज किया जाए। लोग इस बात को समझें और सरकार इसे लागू करे। दोनों राज्य सरकारों ने इस आधार पर शीर्ष अदालत से अपना पिछला आदेश वापस लेने की मांग की है कि इससे इन राज्यों में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होगी।

शीर्ष अदालत ने फिल्म के प्रदर्शन पर गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को गत 18 जनवरी को हटाकर 25 जनवरी को देशभर में इसे प्रदर्शित किये जाने का रास्ता साफ कर दिया था। न्यायालय ने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत इस फिल्म को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी करने से अन्य राज्यों को भी रोक दिया था।
यह फिल्म महाराजा रतन सिंह और उनकी मेवाड़ की सेना तथा दिल्ली के सुल्तान अदाउद्दीन खिलजी के बीच 13 वीं शताब्दी में हुई ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है। जब दोनों राज्यों के वकीलों ने न्यायालय के 18 जनवरी के आदेश में संशोधन की मांग करने वाले अपने अंतरिम आवेदनों का उल्लेख किया तो प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘इन आवेदनों को कल सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करें।’
शीर्ष अदालत ने अपने 18 जनवरी के आदेश के जरिये फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी। फिल्म निर्माता वायकॉम 18 की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने याचिकाओं पर अविलंब सुनवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद जिस तरह से चीजें हो रही हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बीच, फिल्म के प्रदर्शन का विरोध कर रहे दो संगठनों- श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने भी उच्चतम न्यायालय का रुख किया और खुद को पक्षकार बनाने की मांग की। वे इस आधार पर फिल्म के प्रदर्शन का विरोध कर रहे हैं कि यह समुदाय की भावनाओं को आहत करती है।

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