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भगवान पशुपतिनाथ के आठों मुखों का शिवना ने किया जलाभिषेक

भगवान पशुपतिनाथ के आठों मुखों का शिवना ने किया जलाभिषेक

मंदसौर। मंदसौर में भारी बारिश का दौर बाढ़ का कहर जारी है।  मंदसौर के आसपास हुई जोरदार बारिश की वजह से शिवना नदी उफान पर आ गई है। शिवना नदी का पानी पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह तक जा पहुंचा है और गुरुवार रात 1:15 बजे शिवना नदी ने भगवान पशुपतिनाथ के आठों मुखों का जलाभिषेक किया। शुक्रवार सुबह नदी का पानी कम होना शुरू हुआ है। गुरुवार रात तक निचली बस्तियों की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि पुलिस, प्रशाशन, आम जनता के सहयोग से वहां रहने वालो को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। स्थिति को देखते हुए कई संगठनों द्वारा प्रभावितों को मदद पहुंचाई गई।

लगातार हो रही बारिश के चलते शिवना नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था, वहीं कालाभाटा बांध का तीसरा गेट खोलने पर यह पानी पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंच गया और पूरा मंदिर जलमग्न हो गया. मंदिर में पानी भरने के बाद भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी मूर्ती भी पूरी तरह से पानी में डूब गई.

मंदसौर शहर की पतासी गली, खानपुरा, बरगुंडा मोहल्ला, नीलमशाह दरगाह क्षेत्र व शनि विहार इलाके में पानी घुसने लगा। जलभराव की स्थिति निर्मित होने पर खानपुरा में अंजुमन स्कूल, केशव सत्संग भवन, छीपा जमातखाना में ठहरने की व्यवस्था की गई है। पताशे वाली गली, धानमंडी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति निर्मित होने पर माहेश्वरी स्कूल, आकामोती धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था की गई है। जिले के गांव हैदरवास में जलभराव की स्थिति होने की वजह से पिछले 2 दिनों से ग्रामीणों को राहत शिविर में रखा गया है. गंगा गार्डन के राहत शिविर में रह रहे लोग बारिश के थमने का इंतजार कर रहे हैं.

बता दें मंदसौर में जारी भारी बारिश से शहर की निचली बस्तियों में पानी भर गया है. शहर को शिवना के उफान ने दो हिस्सो में बाट दिया है. अभिनन्दन समेत कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति है. ग्रामीण अंचल में कई गावों में निचली बस्तियों में पानी भर चुका है. तालाबों के किनारे पर रहने वाले लोगों ने लबालब भरे तालाबों के पास डर के साए में जागकर रात गुजारी. पुलिस प्रशासन और समाजसेवियों की टीम मुस्तैदी से अपना काम कर रही है और राहत शिविरों में रह रहे लोगों को खाना और शुद्ध जल की व्यवस्था की जा रही है. अभी जिले में 3000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. बारिश से ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

पशुपतिनाथ मंदिर परिसर, धोबी समाज धर्मशाला में भी लोगों के ठहरने हेतु व्यवस्था की गई है। सीतामऊ तालाब से पानी अधिक आने के कारण खेड़ा गांव में कई घरों में पानी घुस गया है। लदुना में भी निचली बस्तियों को खाली करवाया गया।

अभी मन्दसौर में बीते दिनों आई बारिश से हालात सामान्य हुए ही थे कि, 14 अगस्त शाम से फिर शुरू हुई बारिश सुबह तक आफत बन गई। सुबह जब रहवासियों की नींदे खुलीं तो तेज़ बारिश से नदी नालों में जलस्तर बढ़ने लगा जिससे पानी लोगों के घरों में घुस गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मन्दसौर के गांधीनगर, यशनगर और अभिनंदन कॉलोनी के रहवासी इलाको में 2-2 फिट तक पानी भर गया।  पूरे क्षेत्र में बारिश होने से मन्दसौर के तेलिया तालाब ने भी विकराल रूप ले लिया है। जिसके वेस्टवेयर से निकला पानी मुख्य मार्ग पर बहने लगा है, नतीजतन वहां का यातायात बंद करना पड़ा है। 14 अगस्त को मन्दसौर सहित आसपास की बारिश से शिवना भी उफान पर आ गई है, जिसने भगवान मन्दसौर जिले में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान पशुपतिनाथ के चार मुखों का जलाभिषेक किया। जिसे देखने देखने के लिए वहां लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।

मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा विराजित है, जबकि नेपाल में चार मुखी पशुपतिनाथ विराजित हैं. इस प्रतिमा की तुलना नेपाल के पशुपतिनाथ से की जाती है. मंदसौर में इस प्रतिमा की स्थापना 23 नवंबर 1961 को स्वामी प्रत्यक्षानंद महाराज ने की थी, जिसके बाद 27 नवंबर को इस प्रतिमा को पशुपतिनाथ के रूप में नामकरण किया गया.  पहली बार यह प्रतिमा 1940 में देखी गई थी, जो कि शिवना नदी से बाहर आई थी. 21 सालों तक नदी के तट पर ही रखी रही इस प्रतिमा की इस दौरान नदी तट पर ही पूजा होती रही, लेकिन बाद में इसे मंदिर में विराजित किया गया.

मध्यप्रदेश में लगातार भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं कई लोगों को रेस्क्यू करके निकाला गया है। इस बीच मंदसौर के पशुपतिनाथ पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। मध्यप्रदेश के बदरवास, राजगढ़, रायसेन, मंदसौर, खंडवा और टीकमगढ़ में बाढ़ से लोग परेशान हो गए हैं। अब भी भारी बारिश का दौर जारी है। बाढ़ में फंसे हुए लोगों को बचाने का काम चल रहा है। इसके अलावा कई ट्रेनें शुक्रवार को भी विलंब से चल रही हैं।

 

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